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तेलंगाना सरकार को बहा ना ले जाए हैदराबाद की बारिश

ए साए शेखर | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
QUICK PILL
  • समस्याएं निश्चित रूप से इंसान की पैदा की हुई हैं. शहर में इसलिए बाढ़ आई क्योंकि खुली नालियों के पास गैरकानूनी निर्माण से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है.
  • केसीआर के बेटे और नगरपालिका प्रशासन मंत्री के टी रामा राव ने टैंक बेड्स और नालियों के पास के सभी गैरकानूनी निर्माण को हटाने के लिए ‘ऑपरेशन डिमोलिशन’ शुरू किया है लेकिन कोशिशें अभी भी नाकाफ़ी.

भारी बरसात से लोगों को अक्सर पुरानी कहावत याद आ जाती है, ‘इट्स रेनिंग कैट्स एंड डॉग्स.’ पर हैदराबाद में तो इस मानसून डायनोसोर बरसे हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के मुताबिक 1908 से हैदराबाद ने बरसात की इतनी अधिकता नहीं देखी, जितनी कि अकेले सितंबर में 450 फीसदी से ज्यादा देख ली. पर कहते हैं ना, हरेक निराशा में उम्मीद की किरण होती है.

इस भारी वर्षा से भी दो उम्मीदें बनीं. पिछले साल केसीआर ने बिजली विभाग से मजाक में पूछा था कि हल्की बूंदा-बांदी में भी बिजली क्यों चली जाती है? पर इस बार बरसात के सैलाब के बावजूद अधिकांश कालोनियों में चौबीस घंटे बिजली आई. दूसरी अच्छी बात यह हुई कि तेलंगाना के टैंक, नदियां और जलाशय लबालब भरे हैं, जो देखने को कम ही मिलते हैं. सरकार को उम्मीद है कि इससे अगले तीन साल तक भरपूर फसल होगी. यह तो हुई भारी बरसात की अच्छी खबरें.

अतिक्रमण और नियमन

बारिश और उससे आई बाढ़ से भारत के दूसरे सबसे बड़े आईटी हब पर कहर टूट पड़ा. वजह प्राकृतिक हो सकती है, पर समस्याएं निश्चित रूप से इंसान की पैदा की हुई हैं. शहर में इसलिए बाढ़ आई क्योंकि खुली नालियों के पास गैरकानूनी निर्माण से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है. 2003 में जहां नालों पर 13000 अतिक्रमण थे, ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कारपोरेशन ने 15000 अतिक्रमण बताए, जो पिछले 13 सालों में हुए हैं. और उनके हिसाब से कुल 28000 अतिक्रमण हैं.

केसीआर ने खुद ने कहा था कि नालियों का काफी हिस्सा और खुली जगह पर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे इस शहर में बहुत ही खराब स्थिति पैदा हो गई. हालांकि उन्होंने बड़ी चतुराई से इसके लिए औरों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पिछले छह दशकों में जो गलतियां कांग्रेस और तत्कालीन संयुक्त आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकारों से हुई हैं, उन्हें सुधारने में कुछ साल लगेंगे. शहर में नालियों से अतिक्रमण हटाने में 11,000 करोड़ का खर्चा आएगा. 175 से ज्यादा लेकबेड्स पर भी अतिक्रमण हैं, और पिछले कुछ वर्षों में गैरकानूनी निर्माण बन गए हैं.

बाद वाली सरकारों ने जो भवन के नियमन की स्कीम लागू की, इससे 1992 से कानून में छूट मिल गई और बिल्डर्स के निश्चित रूप से मजे हो गए. सरकार ने 1992 और 1998 के बीच सात सरकारी आदेश जारी किए, और इन गैरकानूनी गतिविधियों के समर्थन से उत्साहित इन गैरकानूनी निमार्णों का नियमन करने के लिए कानून और अध्यादेश जारी होने लगे. 2003 के एक्ट सं. 6 को राज्यपाल ने 15 अप्रेल 2003 को अनुमति दी. इससे राज्य में अन्य म्यूनिसिपल कारपोरेशंस को नियमन में और राहत मिल गई. फिर जीओ एमएस. 901/31.12.2007 आया, जिसने असैनिक प्राधिकारी को अतिक्रमण को रद्द करने के लिए बुलडोजर चलाने और उन्हें ‘नियमित’ घोषित करने का अधिकार दिया. तेलंगाना बनने के बाद भी, राज्य सरकार ने गैरकानूनी नक्शों के नियमन के लिए जीओ, एमएस सं, 151/2.11.2015 और गैरकानूनी निर्माण के नियमन के लिए 152/2.11.2015 जारी किया. हालांकि यह मुद्दा हाई कोर्ट गया, और सरकार को नियमन के नियमों में संशोधन करने को कहा गया.

सब जगह पानी ही पानी

इन छूट का व्यापक प्रभाव हुआ. जो जगह निजी घरों और अपार्टमेंट्स के चारों ओर छोडऩी थी, छूट नहीं पाई. आर्थिक उदारीकरण के बाद के युग ने हैदराबाद का बहुत भला किया है. पर इससे जो बुरा हुआ, वह अब महसूस किया जा रहा है. और उससे भी खराब अब भी होना शेष है. जब आईटी कंपनियां शहर में तेजी से उभरीं, राजनेताओं ने उनका स्वागत किया और अपने ‘नजरिए’ की डींग हांकी. लेकिन उनका गड़बड़ नजरिया अब सबसे खराब रूप में सामने है, क्योंकि बाद की सरकारों ने शहर के बुनियादी सामाजिक ढांचे को बनाने पर कभी ध्यान नहीं दिया.

जब हैदराबाद आईटी क्रांति की वजह से हुए विकास के बाद की सुखानुभूति का आनंद ले रहा था, प्रकृति ने 2000 में अपना प्रकोप दिखाया. उस समय जाम नालों और पानी से भरी सडक़ों के कारणों का अध्ययन करने के लिए तत्कालीन सरकार ने विवश होकर एक कमेटी बनाई. किर्लोस्कर कमेटी ने बताया कि 390 किलो मीटर लंबे नालों पर 13000 अतिक्रमण हैं. आधे से ज्यादा नालों का पानी मूसी में चला जाता है, जिससे यह नदी गंदा नाला बन गई है. हुसैन सागर झील, जो शहर के मध्य में है, में सभी गंदे नालों और इंडस्ट्री के अपशिष्ट पदार्थों से लबालब पानी जाता है. 514 मीटर के टैंक लेवल से ज्यादा भर जाने के कारण अधिकारियों को पानी छोडऩा पड़ता है. इस पानी की वजह से यहां के लोगों को जगह खाली करके सुरक्षित स्थानों पर जाने को विवश होना पड़ता है. उफनते पानी का केवल 20 फीसदी इन नालों में जा सकता है. बाकी का पानी शहर की प्राकृतिक क्षमता और लोगों के धैर्य की परीक्षा लेता है.

बेहाल सडक़ें

निजामपत, मियापुर, मलकाजगिरी, सिकंदराबाद, अलवल, दिसुखनगर, वनस्थलीपुरम, बीएन रेड्डी नगर, करमनघाट और आलीशान आईटी गलियारे की उप्पल जैसी किफायती आवासीय बस्तियों की दूरी को देखते हुए आने-जाने के साधन आवश्यक हो गए. पर जन-परिवहन के साधन बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए पूरे नहीं पड़ते. प्रसिद्ध जवाहर लाल नेहरू आउटर रिंग रोड, राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पी वी नरसिंहा राव एक्सप्रेस हाईवे-सभी ने इन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है. पर शहर ने कभी खत्म न होने वाले मरम्मत, रखरखाव और निर्माण को भुगता है. शहर में 9,100 किमी सडक़ का नेटवर्क है, जिसके कई मालिक हैं-जीएचएमसी, सडक़ और भवन विभाग, नेशनल हाइवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया. इनमें से कोई भी एक दूसरे की सडक़ों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मरम्मत नहीं कर सकता, विस्तार नहीं कर सकता. 178 किमी की कुल मुख्य सडक़ें कई बार क्षतिग्रस्त हुईं, और 65000 से ज्यादा गड्ढे देखे गए. उनमें से कइयों की मरम्मत की गई, पर 3200 अब भी ठीक होने हैं. जीएचएमसी अधिकारियों के मुताबिक टूटी-फूटी सडक़ की कुल लंबाई 1,800 किमी है.

पिता-पुत्र वादे पूरे करेें

केसीआर के बेटे और नगरपालिका प्रशासन मंत्री के टी रामा राव ने टैंक बेड्स और नालियों के पास के सभी गैरकानूनी निर्माण को हटाने के लिए ‘ऑपरेशन डिमोलिशन’ शुरू किया है. वे लगभग सभी कालोनियों में व्यक्तिगत रूप से गए, जो घुटने से नीचे पानी में डूबी हुई थीं, और कुछ में बरसात के रुके पानी में कारें तैर रही थीं. मंत्री ने कहा कि सरकार के पक्ष में और अतिक्रमण के खिलाफ कोर्ट में बहस करने के लिए अधिकारियों और कानून विशेषज्ञों का ग्रुप बनाया गया था. 

मुख्यमंत्री ने हैदराबाद हाई कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन को कॉल किया और हालात के बारे में बताया. राज्य और शहर के विकास में बरसात के कहर के कारण आ रहीं कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए न्यायालय से सहयोग मांगा. लोग वायरल बुखार और डेंगू से पीड़ित हैं. चिकनगूनिया होने की भी खबरें आई हैं. हफ्ते से कम समय में 40000 लोग गवर्नमेंट फीवर हॉस्पिटल पहुंच चुके हैं. स्वास्थ्य दस्तों और सहयोगी स्टाफ को चौकस रहने को कहा गया है, जबकि निजी अस्पताल भी बुखार से पीड़ित मरीजों से भरे पड़े हैं.

तेलंगाना सरकार के लिए चीजें संतोषप्रद नहीं हैं. लोगों ने केसीआर की तेलंगाना राष्ट्र समिति को जीएचएमसी चुनावों में 150 नगर निगम के डिविजनों में से 100 गिफ्ट किए थे. अब सही यही है कि मुख्यमंत्री और उनके बेटे अपने वादे पूरे करें. टीआरएस का हनीमून पीरियड पूरा हो चुका है. यदि वह काम नहीं करती है, तो उनका आगे का सफर हैदराबाद की वर्तमान सडक़ों जैसा ही ऊबड़-खाबड़ होगा.

 

First published: 28 September 2016, 2:49 IST
 
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