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राजस्थान: इस अकेले नेता ने BJP और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ाकर रख दी है

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 November 2018, 15:10 IST

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले एक नेता ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ा रखी है. हनुमान बेनीवाल नाम के इस नेता ने अचानक ही चुनावों में सबका ध्यान आकर्षित किया है. उनकी रैली में इतनी भीड़ इकट्ठा होती है जितनी पीएम मोदी और अमित शाह भी इकट्ठा नहीं कर पाते. भाषण देने में माहिर बेनीवाल को सुनने के लिए इतनी भीड़ आती है जिसे देख बीजेपी और कांग्रेस के पसीने छूट रहे हैं.

हनुुमान बेनीवाल की लोकप्रियता ऐसी कि उन्हें सुनने के लिए लोग जगह न मिलने पर खंभों पर खड़े हो जाते हैं और बाउंड्री के बाहर खड़े रहते हैं. राजस्थान विधानसभा चुनावों में यह जाट नेता दोनों बड़ी सियासी पार्टियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है. बीजेपी से बागी हुए हनुमान बेनीवाल एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनकी राजनैतिक पहचान कोई दबा नहीं सका.

बीजेपी से हुए हैं बागी

करीब 15 साल पहले जोधपुर में एक सभा चल रही थी. बीजेपी की तरफ से आयोजित यह सभा जाट समाज के लिए थी. तब राजस्थान में बीजेपी के पास कोई बड़ा जाट चेहरा नहीं था. इस वजह से दिल्ली के जाट नेता और वाजपेयी सरकार के मंत्री साहब सिंह वर्मा को राजस्थान के जाट बाहुल्य वाले इलाकों में प्रचार के लिए भेजा गया था.

जोधपुर में हो रही इस सभा को उन्हें संबोधित करना था. लेकिन वर्मा समय पर नहीं पहुंचे. इस कारण भीड़ छंटने लगी. जब लोग जाने लगे तो इतने में राजस्थान यूनिवर्सिटी का एक छात्रनेता मंच पर पहुंचा और अपने भाषण से समां बांध लिया. ये कोई और नहीं हनुमान बेनीवाल थे. इस सभा में दिए गए अपने भाषण की भाषण शैली से वह ऐसे लोकप्रिय हुए कि आज तक कोई सियासी पार्टी उनका तोड़ नहीं निकाल पाई है.

 

छात्र पॉलिटिक्स से बने थे नेता

छात्र राजनीति से पॉलिटिक्स में कदम रखने वाले बेनीवाल ने अपने पिता के कांग्रेस नेता होने के बावजूद बीजेपी ज्वॉइन की थी. लेकिन साल 2010 में उन्होनें खुलेआम बीजेपी के नेताओं को भ्रष्ट करार दिया था और कांग्रेस-बीजेपी की सांठगांठ होने के आरोप लगाते हुए अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इसके बाद उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी थी.

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साल 2013 में बेनीवाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र खींवसर से निर्दयलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ा और मोदी लहर के असर के बावजूद भी रिकॉर्ड मतों से जीत हांसिल की. तब बीजेपी ने उनको हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था लेकिन उन्होंने इतिहास ही बदल दिया था. इसके बाद बेनीवाल ने नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर और जयपुर जिलों में 5 सफल हुंकार रैलियों का आयोजन किया जिनमें जुटी लाखों की भीड़ की गूंज दिल्ली तक जा पहुंची.

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फिलहाल बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठन किया है और इस बार के चुनाव में ज्यादातर दोनों पार्टियों के बागी नेताओं को टिकट दिया है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने राजस्थान के 200 सीटों में से 57 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. जाटों की लड़ाई को आगे ले जाना बेनीवाल का एक मात्र सपना था. उनके पास युवाओं को साथ लेकर चलने का हुनर है. बेनीवाल मानते हैं कि बीजेपी-कांग्रेस की आपसी सांठ-गांठ है और दोनों ही एक दूसरे के भ्रष्टाचार को छुपाते हैं. जिस कारण क्षेत्रीय पार्टियों का राज होना चाहिए.

बेनीवाल को पूरा भरोसा है कि उन्हें चाहे कुछ मिले या ना मिले लेकिन वे दोनों पार्टियों को चुनावों में कड़ी टक्कर देगें. बेनीवाल धुंआधार प्रचार कर रहें हैं और एक दिन में 6 से 8 सभाएं करते हैं.

First published: 28 November 2018, 15:10 IST
 
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