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मेरी मौत के जिम्मेदार मुख्यमंत्री और डिप्टी CM हैं, दर्दनाक नोट लिखकर किसान ने की आत्महत्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 June 2019, 13:11 IST

कर्ज में डूबकर किसानों द्वारा आत्महत्या करने के कई मामले सामने आते हैं. ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ है, लेकिन इस बार किसान ने कर्च में डूबकर सिर्फ आत्महत्या ही नहीं की, बल्कि अपने सुसाइट नोट में आत्महत्या करने का जिम्मेदार मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम को ठहराया. दरअसर, राजस्थान के श्रीगंगानगर में कर्ज में डूबे किसान ने आत्महत्या कर ली.

सबसे आश्चर्य की बात ये है कि किसान ने सुसाइट करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने सुसाइड करने का जिम्मेदार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट को मौत का जिम्मेदार ठहराया है. किसान ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरी मौत के बाद अशोक गहलोत पर मुकदमा दायर करना. बता दें कि राजस्थान के ठाकरी के गांव में सोमवार को किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी.

सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

"मैं आज अपनी जीवन लीला समाप्त करने जा रहा हूं. इसमें किसी का कोई दोष नहीं है. इस मौत के जिम्मेदार गहलोत और सचिन पायलट हैं. उन्होंने बकायदा बयान दिया था कि 10 दिन में आपका कर्ज माफ कर देंगे. हमारी सरकार आई तो अब इनके वादे का क्या हुआ. सभी किसान भाइयों से विनती है कि मेरी लाश जब तक मत उठाना जब तक सभी किसानों का कर्ज माफ ना हो. आज सरकार को झुकाने का वक्त आ गया है. अब इनका मतलब निकल गया है. सभी भाइयों से विनम्र निवेदन है कि सब किसान भाइयों के लिए मरने जा रहा हूं. सबका भला होना चाहिए किसान की एकता को आज दिखाना है. मेरी मौत का मुकदमा अशोक गहलोत पर कर देना. मेरे गांव ठाकरी के वासियों से भी विनती करता हूं कि गांव में एकता बनाए रखना. मेरा घर मेरा परिवार आप लोगों के भरोसे छोड़ कर जा रहा हूं. मेरे परिवार का ख्याल रखना एक बात और अब की बार सरपंची गांव में रखना. यह विनती है मेरी. आपका सोहन लाल कड़ेला."

मृतक किसान का नाम सोहन कड़ेला (45) है. मुख्यमंत्री द्वारा किए गए कर्ज माफी के वादे को पूरा ना करने की वजह से किसान ने आत्महत्या कर ली. जहर खाने के बाद किसान को गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौारान उनके दम तोड़ दिया.

कर्जमाफी का कांग्रेस ने किया था ऐलान

मालूम हो कि बीते साल दिसंबर मे हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा किया था. चुनाव जीतने के बाद गहलोत सरकार ने फैसला किया था कि किसानों का कॉपरेटिव बैंक का पूरा कर्जा माफ होगा. इसके साथ ही गहलोत सरकार ने किसानों से वादा किया था कि किसानों का 2 लाख तक का अल्पकालीन कृषि कर्ज भी माफ किया जाएगा. गहलोत के इन फैसलों के बावजूद भी कर्जमाफी को लेकर सरकार पर कई सवाल खड़े होते आ रहे हैं.

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First published: 25 June 2019, 13:11 IST
 
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