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अजमेर: सरकारी अस्पताल में अब तक नौ नवजात बच्चों की मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2016, 16:15 IST

अजमेर के सरकारी जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्‍पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से अब तक नौ नवजात बच्‍चों की मौत हो चुकी है. इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्ती बरतते हुए एक डॉक्‍टर को उसके पद से हटा दिया है.

जिला अस्‍पताल में लापरवाही का यह आलम है कि गर्मी के मौसम में बीमार बच्‍चों के लिए एयरकंडीशनर तो दूर पंखे भी काम नहीं कर रहे हैं. अस्पताल में मरने वाले नवजातों को जेएलएन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था.

वहीं इस मामले में जेएलएन अस्‍पताल प्रशासन का कहना है कि मृत बच्‍चों का जन्‍म इस अस्‍पताल नहीं हुआ था, इन्‍हें गंभीर परिस्‍थिति में इलाज के लिए शहर के दूसरे अस्पतालों से लाया गया था.

पढ़ें: अजमेर: सरकारी अस्पताल में 5 शिशुओं की मौत, लापरवाही का आरोप

इनमें से एक अजमेर का था, जबकि बाकी को जिले की दूसरी जगहों और भीलवाड़ा जिले से लाया गया था.

डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप


दूसरी ओर इन मृतक बच्‍चों के माता-पिता अस्‍पताल के डॉक्‍टरों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि बच्‍चों की स्‍थिति बिगड़ने के बाद उनके बुलाने पर डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी.

इस मामले में एक मृतक नवजात की मां शबाना ने कहा, "मेरा बच्‍चा पिछले आठ दिनों से अस्‍पताल में था, लेकिन डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया." शबाना के बच्‍चे की मौत रविवार रात को हो गई थी.

ड्यूटी से नदारद डॉक्टर बर्खास्त


इस बीच प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री राजेंद्र राठौड़ का कहना है, "बच्‍चों के मौत की शुरुआती जांच रिपोर्ट मिल गई है. आयोग को पता चला है कि असिस्‍टेंट प्रोफेसर महेंद्र मंगल अपने ड्यूटी के समय अस्‍पताल में नहीं थे. हमने उनको तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है."

मालूम हो कि रविवार को 6 नवजात बच्चों की मौत के बाद सरकार ने तीन सदस्‍यीय आयोग का गठन किया था. इस मामले में यह भी पता चला है कि अस्‍पताल के बाल चिकित्‍सा विभाग के प्रमुख बीएस कर्नावत सोमवार से 7 दिन की छुट्टी पर चले गए हैं.

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्‍टर ने अस्पताल अधीक्षक से करनावत की छुट्टी स्‍वीकारे जाने का कारण लिखित रूप में मांगा है.

कठघरे में बाल रोग विभाग


जेएलएन अस्पताल के बाल विभाग ने नवजात बच्चों की मौत पर सफाई देते हुए कहा था कि इन बच्‍चों की मौत सेप्‍टीसिमीया की वजह से हुई. इसके बाद दूसरे नवजातों को वार्ड में इंफेक्‍शन से बचाने के लिए शिफ्ट किया गया.

इस मामले में अस्‍पताल के सुपरिटेंडेंट पीसी वर्मा ने कहा कि सोमवार को मरने वाले दो बच्‍चों को दूसरे अस्‍पताल से गंभीर स्‍थिति में लाया गया था.

वर्मा के मुताबिक मरने वाले दो बच्‍चों में से एक 10 दिन की बच्‍ची थी, जो ब्यावर के सरकारी अस्‍पताल से लाई गई थी. उसका वजन डेढ़ किलोग्राम था और वह निक्रटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस से पीड़ित थी. 

आईसीयू में 24 घंटे तैनाती का आदेश


वहीं दूसरा बच्चा 18 दिन का था, जिसे भीलवाड़ा के अस्‍पताल से लाया गया था. वह सेप्‍सिस से गंभीर रूप से पीड़ित था. अस्‍पताल के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे अस्‍पतालों से रेफर होकर आए इन बच्‍चों के वजन कम थे.

वहीं पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राठौड़ ने सोमवार को स्‍वास्‍थ्य विभाग और अस्‍पताल के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी. आईसीयू में असिस्‍टेंट प्रोफेसर रैंक के डॉक्‍टरों को 24 घंटे तैनाती के आदेश दिए गए हैं.

First published: 18 May 2016, 16:15 IST
 
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