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राजस्थान महिला आयोग की सदस्य ने रेप पीड़िता के साथ ली सेल्फी

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 12:15 IST

रेप पीड़िता के साथ सेल्फी लेने के बाद राजस्थान महिला आयोग की सदस्य सौम्या गुर्जर सवालों के घेरे में है. इस बीच मामले में उठे विवाद पर आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने सदस्य से लिखित सफाई मांगी है. 

हालांकि हैरानी की बात यह है कि आयोग की सदस्य सौम्या गुर्जर के साथ सेल्फी में अध्यक्ष सुमन शर्मा खुद भी दिखाई दे रही हैं. दरअसल बुधवार को जयपुर उत्तर महिला पुलिस थाने में सुमन शर्मा और सौम्या गुर्जर दुष्कर्म पीड़िता से मिलने थाने गई थीं. उसी दौरान सेल्फी ली गई थी. 

सौम्या गुर्जर ने ली सेल्फी

सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल हो गई. जिसमें राज्य महिला आयोग की सदस्य सौम्या गुर्जर को सेल्फी लेते देखा जा सकता है.

आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा का कहना है कि जब वह पीड़िता से बातचीत कर रही थीं, उसी दौरान आयोग की सदस्य ने इन सेल्फी को क्लिक किया. 

सौम्या से मांगा स्पष्टीकरण

सुमन शर्मा का कहना है, "मुझे इस बारे में पता नहीं है. मैं ऐसे कार्यो का समर्थन नहीं करती, इसलिए मैंने आयोग की सदस्य से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा है. सदस्य को कल तक इस पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है."

राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा, "मैं सेल्फी लेने को जायज नहीं ठहरा रही हूं. यह गलत था."

तस्वीर में अध्यक्ष सुमन शर्मा भी दिखीं

थाने में पुलिस अधिकारी के कमरे में सुमन शर्मा और सदस्य सौम्या गुर्जर सेल्फी में दिखाई दे रही हैं. सेल्फी की तस्वीर में गुर्जर को मोबाइल पकडे हुए और सुमन शर्मा को सेल्फी खिंचवाने के लिये पोज बनाते नजर आ रहा है.

दहेज के लिये 51,000 रुपये नहीं देने पर पीड़ित महिला ने अपने पति और जेठ पर दुष्कर्म, अभद्र भाषा, उसके माथे और हाथ में अपशब्द गुदवाने का आरोप लगया है. 

इस बीच, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष डॉक्टर अर्चना शर्मा ने आमेर दुष्कर्म पीड़िता के साथ सेल्फी खींचे जाने की कड़ी निंदा करते हुए इसे महिला आयोग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह बताया है. 

आमेर रेप पीड़िता के साथ सेल्फी

कांग्रेस नेता ने कहा कि पीड़िता को पहले ही न्याय मिलने में देरी हुई है. अदालत के निर्देश के बावजूद 24 घण्टे में प्राथमिकी दर्ज होने के बजाए 10 दिन लग गए. इससे पता चलता है कि प्रदेश का शासन और प्रशासन महिला अपराधों पर कितना सजग है.

कांग्रेस नेता ने साथ ही कहा, "महिला आयोग संवैधानिक संस्था है, जिसके प्रतिनिधियों को न्याय दिलाने में पीडित महिलाओं की आवाज उठाते हुए सरकार को बाध्य करना चाहिए ना कि आयोग में उन्हें सरकारी प्रतिनिधि की तरह व्यवहार करना चाहिए." 

'महिला आयोग ने उड़ाया मजाक'

अर्चना शर्मा ने साथ ही कहा, "पीडिता का विवरण और उसका चित्र सार्वजनिक किया जाना संज्ञेय अपराध है, जिसके लिए आईपीसी की धारा 228-ए में दो साल के कारावास का प्रावधान है."

अर्चना शर्मा ने कहा, "महिला आयोग की अध्यक्ष एवं उसके सदस्यों को अगर यह मूलभूत जानकारी भी नहीं है तो इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिला आयोग कितनी गंभीरता के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है.

महिला आयोग की सदस्य द्वारा सेल्फी लिया जाना एक गंभीर मामले का मजाक उड़ाने जैसा है, जिसे संज्ञान में लेकर उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए."

First published: 30 June 2016, 12:15 IST
 
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