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राजीव गांधी और संजय गांधी भाई होकर भी एक-दूजे से इतने जुदा, दोनों के व्यक्तित्व में था काफी अंतर

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2020, 20:19 IST

Rajiv Gandhi Death Anniversary: राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री के रूप में काफी लोकप्रिय थे. उनकी सौम्य छवि के सभी कायल थे. राजीव से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि आप किस रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे. इस पर उनका जवाब था- "एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो भारत को 21वीं सदी में लेकर गया और जिसने उसके माथे से विकासशील देश का लेबल हटाया."

राजीव गांधी ने संचार क्रान्ति लाने समेत कई ऐसे कदम उठाए जो भारत को 21वीं सदी में लेकर गए. राजीव गांधी 21 मई सन् 1991 को बम धमाके में मारे गए थे. वह स्वभाव से सौम्य और कम बोलने वाले व्यक्तित्व के इंसान थे. राजीव गांधी राजनीति से अलग अपनी जिंदगी जीने में खुश रहना चाहते थे. वह राजनीति की बजाय एक सामान्य जिंदगी जीना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव में उन्होंने राजनीति में आखिरकार कदम रख ही लिया था.

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दूसरी तरफ, उनके भाई संजय गांधी के व्यक्तित्व में काफी अंतर था. भले ही राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर इंदिरा गांधी की पहली पसंद राजीव गांधी थे. लेकिन संजय गांधी ने 1970 में ही अपनी मां की छत्रछाया में राजनीति में कदम रखा. उस दौरान कांग्रेस की नीतियों में संजय गांधी की अहम भूमिका मानी जाती थी. जबकि, राजीव गांधी अपनी निजी जिंदगी में पायलट के पद पर काफी खुश थे.

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संजय गांधी एक बिगड़ैल बेटे के रूप में उभरे थे. राजनीति में उन्होंने अपनी अहम भूमिका निभाते हुए इमरजेंसी के दौरान बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था. संजय गांधी अपनी मां इंदिरा गांधी से काफी करीब थे. नेहरू-गांधी परिवार के काफी करीब माने जाने वाले पुपुल जयकर से इंदिरा गांधी ने कभी कहा था, "संजय की जगह कोई नहीं ले सकता है, वह मेरा बेटा था लेकिन मुझे उससे बड़े भाई की तरह मदद मिलती थी."

इसका अंदाजा आपको इमरजेंसी के दौरान लिए गए उनके फैसलों में लग सकता है. तब विपक्षी नेताओं द्वारा संजय गांधी की गिरफ्तारी का आदेश देना, सरकारी कामकाज में बिना किसी आधिकारिक भूमिका के हस्तक्षेप करना और सेंसरशिप लागू करना जैसे गंभीर आरोप संजय गांधी पर लगे. इसने उनकी छवि को काफी खराब किया था.

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First published: 21 May 2020, 20:10 IST
 
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