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महानायक अमिताभ बच्चन के घर राजीव गांधी ने सोनिया संग लिए थे सात फेरे...

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2017, 11:33 IST
Rajiv Gandhi

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 26वीं पुण्यतिथि है. आज के दिन 21 मई 1991 को तत्कालीन मद्रास (चेन्नई) के श्रीपेरंबुदूर में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के आत्मघाती हमलावरों ने बम विस्फोट में उनकी हत्या कर दी थी.

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ. उनका नाम राजीव इसलिए रखा गया क्योंकि नेहरू की पत्नी का नाम था कमला. और राजीव का मतलब होता है कमल. कमला की यादें ताजी बनी रहे इसलिए नेहरू ने इनका नाम राजीव रखा.

बचपन में राजीव गांधी ने खेल-खेल में महात्मा गांधी के पैरों में फूल चढ़ा दिए तो महात्मा गांधी ने कहा बेटा ऐसा किसी की मृत्यु होने पर करते है. ये एक संयोग ही है कि उसी के अगले दिन यानी 31 जनवरी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी.

राजीव गांधी हायर एजुकेशन के लिए लंदन गए. जहां साल 1964 में इटली की रहने वाली एडविग एन्टोनिया एल्बीना माइनो भी लंदन के कैम्ब्रिज में इंग्लिश पढ़ने आई थीं. उसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई.

एडविग एन्टोनिया एल्बीना माइनो, जो आज भारत में सोनिया गांधी के नाम से जानी जाती हैं. भारत आने के बाद सोनिया गांधी दिल्ली में अमिताभ बच्चन के घर रही थी.

राजीव गांधी और सोनिया गांधी की शादी अमिताभ बच्चन के दिल्ली स्थित गुलमोहर पार्क के आवास पर हुई थी और मां तेजी बच्चन और पिता हरिवंश राय बच्चन ने ही सोनिया गांधी का कन्यादान किया था. सोनिया और राजीव गांधी के रिश्ते के बारे में इंदिरा गांधी को पहले कुछ नहीं पता था.

राजीव गांधी पेशे से पायलट थे उन्होनें एयर इंडिया में नौकरी भी की, लेकिन बाद में दबाव बनाने के बाद राजनीति में आए. ये दबाव मां इंदिरा गांधी ने 1980 में संजय गांधी की मौत के बाद बनाया था. संजय गांधी की मौत के बाद उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी से राजीव गांधी सांसद चुने गये.

साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोकसभा की सबसे बड़ी जीत हासिल की थी. उस चुनाव में कांग्रेस ने 533 में से 404 सीट हासिल की. इसी जीत के साथ राजीव गांधी भारत के 7वें प्रधानमंत्री बने थे.

राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन दोनों खास दोस्त थे. राजीव की मृत्यु के दिन अमिताभ बच्चन और राहुल गांधी अमेरिका में थे. दोनों एक ही प्लेन से भारत आए थे.

राजीव गांधी की हत्या का कारण श्रीलंका के राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने के साथ हुआ वह समझौता बना, जिसमें राजीव ने श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों को दबाने के लिए भारत की शांति सेना को श्रीलंका भेजने की मंजूरी दी थी.

लिट्टे नहीं चाहता था कि भारत की शांति सेना को श्रीलंका भेजा जाए. शांति सेना भेजे जाने से पहले लिट्टे प्रमुख वी प्रभाकरन दिल्ली में राजीव गांधी से मिलने आया था. राजीव गांधी के साथ प्रभाकरन की बातचीत असफल रही.

प्रभाकरन ने श्रीलंका में तमिल हितों की खातिर राजीव गांधी की बात मानने से इंकार कर दिया तो राजीव ने प्रभाकरन को दिल्ली के होटल अशोका में बात मानने तक नज़रबंद करा दिया. प्रभाकरन ने खुद को मुक्त कराने के लिए राजीव गांधी की बात पर सहमति जता दी. जब प्रभाकरन सारी बातें मान गया तो उसे श्रीलंका जाने की इजाजत दी गई. इस घटना के बाद प्रभाकरन राजीव का दुश्मन बन गया और राजीव गांधी को मारने का प्लान बनाने लगा.

21 मई 1991 को तत्कालीन मद्रास से 30 किलोमीटर दूर श्रीपेरंबुदूर में राजीव गांधी कांग्रेस पार्टी का चुनाव प्रचार करने पहुंचे. जब राजीव पहुंचे तो वहां हाथों में माला लिए हजारों लोग खड़े थे. इन्हीं में एक लिट्टे की सुसाइड हमलों के लिए बनी काली बाघिन विंग की मेंबर धनु भी थी. सलवार सूट पहने नजर के चश्में लगाए, ये लड़की अपने देश की नहीं थी बल्कि श्रीलंका की थी.

स्टेज के सामने डी शेप का घेरा बना हुआ था जहां सिर्फ वीवीआईपी को आने की इजाजत थी. हाथ में चंदन की माला लिए धनु आगे बढ़ती है तभी तमिलनाडु की सब इंस्पेकटर अनसुइया (जिसकी ड्यूटी रैली ग्राउंड में लगी हुई थी) धनु को हाथ पकड़कर आगे बढ़ने से रोकती है. धनु पलटने ही वाली थी कि राजीव गांधी की आवाज आती है कि सबको आने दो. फिर आगे बढ़कर धनु जैसे ही राजीव गांधी के पैर छूती है और बम फट जाता है. इसके बाद राजीव गांधी समेत 17 लोगों की मौत हो गर्इ.

First published: 21 May 2017, 11:33 IST
 
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