Home » इंडिया » Rajnath and Mehbooba achieved one thing: to irk Kashmir even more
 

राजनाथ का दूसरा कश्मीर दौरा, राजनीतिक समाधान अभी भी नदारद

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 August 2016, 8:56 IST

एक ही महीने में गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा कश्मीर की दूसरी यात्रा के बावजूद राज्य में शांति बहाली की दिशा में कुछ खास उपलब्धि हासिल नहीं हुई. इससे अलगाववादी और आम जनता दोनों ही निराश हैं.

राजनाथ के दौरे को ‘धुंधली उम्मीद’ कह कर हुर्रियत और जमात-ए-इस्लामी ने एक तरह से केंद्र को आईना दिखाया है कि वह घाटी के हालात के प्रति गंभीर नहीं है. साथ ही यह भी जता दिया कि अगर जम्मू-कश्मीर की इसी तरह उपेक्षा की जाती रही तो भारत और दक्षिण एशिया का भविष्य खतरे में है.

संवाददाता सम्मेलन की खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कश्मीर समस्या के ‘स्थाई एवं अंतिम समाधान’ के लिए वार्ता के प्रस्ताव संबंधी अपेक्षित राजनीतिक हल से इतर, राजनाथ सिंह ने इस समस्या के हल के लिए कुछ प्रशासनिक उपाय सुझााए.

संवाददाता सम्मेलन की शुरूआत में राजनाथ ने कश्मीरियों के साथ सहानुभूति जताई और अगले कुछ दिनों में पैलेट गन के विकल्प की घोषणा करने की बात कही.

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बोलीं महबूबा- घाटी में उकसाने वालों के बच्चे महफूज

गृहमंत्री श्रीनगर में बुलाए गए भीड़ भरे संवाददाता सम्मेलन में लोगों से अपनी बात पर भरोसा करने की अपील करते दिखे. राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी उनके साथ थी. मुफ्ती ने बाद में राजनाथ सिंह के प्रयासों पर यह कह कर पानी फेर दिया कि कश्मीर में जो लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वे सिर्फ पांच प्रतिशत हैं, और इन प्रदर्शनकारियों पर किया गया बल प्रयोग जायज था.

एक सवाल के जवाब देते हुए महबूबा भड़क गई और बोलीं- 'क्या सेना के शिविर पर हमला करने वाला कोई बच्चा था जो वहां टॉफी लेने गया था? दक्षिणी कश्मीर में जिस 15 साल के लड़के ने सैन्य शिविर पर हमला किया क्या वह वहां दूध लेने गया था?

उनके इस बयान को तुरंत ही इस रूप में लिया गया कि वे अपने राज में हुई हत्याओं और हताहतों को जायज ठहराने की कोशिश कर रही हैं.

हुर्रियत ने कहा राजनाथ का दौरा कोई नई बात नहीं है

राजनाथ के संवाददाता सम्मेलन के तुरंत बाद हुर्रियत ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, ‘घाटी जल रही है और अब भी भारत सरकार जम्मू -कश्मीर के लोगों का संघर्ष समाप्त करने और घाटी का विवाद हल करने के प्रति गंभीर होने के बजाय पैलेट गन और उसके विकल्पों पर बहस कर रही है.'

‘राजनाथ की इस घोषणा से भारत सरकार का गैर जिम्मेदराना रवैया ही उजागर होता है कि कश्मीरी युवाओं के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जैसे केंद्र सरकार यहां कोई समाज कल्याण योजना का शुभारंभ कर रही हो.’

हुर्रियत के अलगाववादी धड़े ने कहा, ‘अगर भारत सरकार इसी तरह कश्मीरियों की ओर से आंखें मूंदे रही तो केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा दक्षिण एशियाई क्षेत्र ही संकट में नजर आता है.

...इसलिए कोई फायदा नहीं

हुर्रियत की ही तरह जमात-ए-इस्लामी ने भी राजनाथ के दौरे को ‘नूरा कुश्ती’ की ही संज्ञा दी. जमात-ए-इस्लामी ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, ‘गृहमंत्री राजनाथ सिंह का घाटी का दो दिवसीय दौरा बेकार की कवायद साबित हुई और मुख्य मुद्दे के हल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. आम कश्मीरियों की मांग है कि कश्मीर समस्या का हल किया जाए. पूरा जम्मू-कश्मीर चाहता है कि कश्मीर घाटी में वही स्थिति बहाल हो जाए जैसी कि भारत-पाक के बंटवारे से पहले थी.’

कश्मीर में पैलेट गन की जगह होगा मिर्ची बम का प्रयोग!

इसी प्रकार दुख्तराने मिल्लत नेता असिया अंदराबी ने एक वक्तव्य में कहा कि ‘गृहमंत्री महज अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंख में धूल झोंकने के लिए यहां खानापूर्ति करने आए थे. ये दौरे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाने के लिए किए जाते हैं कि भारत सरकार को कश्मीरियों की चिंता है.’

राजनाथ के इस बयान पर कि ‘जम्मू-कश्मीर के बिना भारत का भविष्य नहीं है’, अंदराबी ने कहा ‘कश्मीरी लोग भारत के साथ अपने भविष्य के बारे में सोच भी नहीं सकते.’

कदम उठाने में चूक

राजनीतिक विश्लेषक और कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. गुल वानी कहते हैं कि इस मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर पहल नहीं की जा रही क्योंकि नीति की नहीं, विकल्पों की कमी ज्यादा है.

वानी ने कहा, 'भाजपा कश्मीर पर अपने बरसों से चले आ रहे राजनीतिक रुख पर ही कायम है. इसलिए वह राज्य में कोई बड़ा राजनीतिक पहल करने में असमर्थ दिखाई दे रही है. वाजपेयी ने जरूर कश्मीर समस्या का हल ढ़ूंढते हुए पार्टी की राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठ कर काम करने का प्रयास किया था, लेकिन दिल्ली में मौजूदा सरकार अपनी राजनीतिक विचारधारा में इस कदर जकड़ी हुई है कि वह कश्मीर समस्या का कोई सकारात्मक हल खोज ही नहीं पा रही.

घाटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर सरकार का ढुलमुल रवैया

इसलिए इस मसले के किसी राजनीतिक हल पर पहुंच पाना भाजपा के लिए चुनौती है. इस तरह का रवैया अख्तियार कर सरकार ने अलगाववादियों की भावनाएं और भड़का दी हैं. अब ऐसा कोई बीच का रास्ता नहीं बचा है, जिस पर चलकर वार्ता की जा सके.

वानी ने कहा, 'पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्तों ने मामले को और उलझा दिया है. इसलिए केंद्र के लिए बिना पाक को शामिल किए घाटी में कोई सार्थक वार्ता शुरू करना मुश्किल होगा. इसलिए केंद्र सरकार कश्मीर के साथ किसी तरह का राजनीतिक संबंध नहीं बना पा रही है. ऐसा इसलिए है क्योंकि केंद्र सरकार यह मान बैठी है कि विचारधारा के हिसाब से वह इसके अनुकूल नहीं है.’

मुख्य धारा के लोगों ने क्या कहा

हालांकि विपक्ष ने घाटी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल की समीक्षा के निर्णय का स्वागत किया है. सभी दलों ने राज्य में एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजने के केंद्र के निर्णय की भी सराहना की है.

प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा, 'कांग्रेस ने कई बार दोनो सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में यह मांग उठाई है कि घाटी में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाए जो हर वर्ग के व्यक्ति से खुल कर बात कर सके और उनकी राय ले सके.

राजनाथ के इस दौरे से कश्मीर को निराशा ही हाथ लगी है. इससे व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर वर्ग परेशान हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि गृहमंत्री आएंगे तो यहां सामान्य हालात बहाली के लिए कोई न कोई राजनीतिक हल जरूर सुझाएंगे.

एक दिन में तीन मरे, 500 घायल, 50 की आंखें फूट गईं, आप कहते हैं कश्मीर में स्थिति सामान्य है?

फयाज रसूल नाम के एक व्यापारी ने कहा, 'कश्मीर पर केंद्र की नीति छलावा से अधिक कुछ नहीं है. हम कश्मीरी घाटी में स्थाई शांति बहाली चाहते हैं. ज्यादा कुछ नहीं. फिलहाल केंद्र कश्मीर में शांति और सामान्य हालात बहाली की प्रतीक्षा कर रहा है.’

पहले, कश्मीरी व्यापारियों ने राजनाथ सिंह से मिलने से इनकार कर दिया था. कश्मीरी ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चरर फेडरेशन के सदस्य मुहम्मद यासीन खान ने कहा, ‘कश्मीर ऐसा विवाद है, जिसे विश्व समुदाय ने भी स्वीकार लिया है. आजादी की वकालत कर रहे प्रतिनिधि ही हमारे असल नेता हैं. अगर भारत कश्मीर विवाद का हल चाहता है तो उसे पाकिस्तान के साथ वार्ता करनी ही होगी. हमसे बात करके भारत को क्या मिलेगा? हम तो व्यापारी हैं.'

First published: 28 August 2016, 8:56 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी