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कश्मीर पर बैठक: वार्ता के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नहीं जाएगा कश्मीर

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:48 IST

शुक्रवार को कश्मीर के ताजा हालात पर केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक की. बैठक की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और गृह मंत्री राजनाथ ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि फिलहाल कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नहीं जा रहा है.

क्या सरकार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हुर्रियत से बात करेगी? इस सवाल पर अरुण जेटली ने कहा कि सरकार हालिया परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में फैसला लेगी. पेलेट गन के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि इस मामले में विशेषज्ञों की कमिटी विचार कर रही है. यह सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है और उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की कमिटी की सलाह के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकेगा. सुरक्षा के मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. हालांकि, सुरक्षा बल पूरे संयम के साथ कार्रवाई करेंगे.

वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर और उसके लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र ने 80 हजार करोड़ रुपए का पैकेज देने का फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वक्त आ चुका है कि बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में लोगों पर अत्याचार के संबंध में पाकिस्तान दुनिया को जवाब दे.

सर्वदलीय बैठक में सतीश मिश्रा, डेरेक ओ ब्रायन, सुखदेव सिंह ढिंढसा, सुदीप बंदोपाध्‍याय, शरद यादव, दुष्‍यंत चौटाला, सीताराम पासवान, अनंत कुमार, कर्ण सिंह, डी राजा, प्रेमचंद गुप्‍ता, तारिक अनवर, प्रफुल पटेल आदि नेता शामिल हुए. विपक्ष ने कश्‍मीर में स्थिति सामान्‍य बनाने के लिए विश्‍वास बहाली के कदम उठाने की मांग की. साथ ही, पैलेट गन के इस्‍तेमाल को बंद करने की भी मांग उठी. इसके अलावा नागरिक इलाकों से अफ्स्‍पा को समाप्‍त करने सभी संबंधित पक्षों जिसमें अलगाववादी भी शामिल हैं, से वार्ता करने की भी मांग विपक्ष ने की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) जम्‍मू-कश्‍मीर का ही भाग है. उन्‍होंने कहा कि सरकार को विदेशों में रह रहे पीओके के निर्वासित लोगों से संपर्क करना चाहिए और उनसे बात की जानी चाहिए. पीएम ने कहा, जम्‍मू-कश्‍मीर के चार हिस्‍से हैं, कश्‍मीर, लद्दाख, जम्‍मू और पीओके. उन्‍होंने बलूचिस्‍तान सहित पाकिस्‍तान के अन्‍य हिस्‍सों में हो रहे मानवाधिकार उल्‍लंघन का भी जिक्र किया.

इससे पहले मानसून सत्र के आखिरी दिन कश्मीर के ताजा हालात पर एक प्रस्ताव पारित किया गया. सांसदों ने पिछले एक महीने से कश्मीर में जारी कर्फ्यू और हिंसा पर अपनी चिंता जाहिर की. कश्मीर पर पारित प्रस्ताव में कहा गया कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो सकता.

First published: 12 August 2016, 6:57 IST
 
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