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मोदी-शाह ने बिहार की हार से ली सीख, उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रचार अभियान के प्रमुख होंगे राजनाथ

पाणिनि आनंद | Updated on: 12 June 2016, 9:12 IST
QUICK PILL
  • राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश में बीजेपी की प्रचार अभियान समिति के प्रमुख होंगे. राजनाथ सिंह अब उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ पार्टी का चेहरा होंगे.
  • राजनाथ के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि उनका बीजेपी और आरएसएस दोनों से बेहतर संबंध है. प्रचार के दौरान वह आरएसएस और बीजेपी के बीच बेहतर तरीके से तालमेल बिठा सकते हैं.

राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश में बीजेपी की प्रचार अभियान समिति के प्रमुख होंगे. हालांकि बीजेपी ने अभी तक उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनाथ सिंह अब उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ पार्टी का चेहरा होंगे.

यह सब कुछ अचानक नहीं हुआ है. पिछले कुछ महीनों के दौरान पार्टी के मामलों और प्रधानमंत्री के समक्ष राजनाथ सिंह की मौजूदगी और उनकी अहमियत बढ़ी है. 

मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रैली करने की योजना बनाई. रैली के बाद राजनाथ सिंह पार्टी में मजबूत बनकर उभरे हैं. सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

सहारनपुर में प्रधानमंत्री मोदी से पहले राजनाथ सिंह ने जनसभा को संबोधित करते हुए 14 साल के वनवास को खत्म करने की अपील की और कहा कि वह इस बार बीजेपी की सरकार को चुनें. पार्टी पिछले 14 सालों में विधानसभा में ठीक प्रदर्शन करने में पूरी तरह से विफल रही है.

इलाहाबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद बीजेपी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसकी लड़ाई क्षेत्रीय दलों से होगी. पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि इलाहाबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक महज स्टंट नहीं है बल्कि सिंह के उभार का साफ और स्पष्ट संकेत है.

जवाबदेही का कारण

राजनाथ सिंह मोदी कैबिनेट में उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चेहरा हैं. वह इससे पहले भी कैबिनेट मंत्री रहे हैं और साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. मोदी बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में इस बार क्षेत्रीय नेतृत्व को नजरअंदाज नहीं करना चाहते हैं.

यही वजह है कि बीजेपी इस बार सिंह के नाम को आगे बढ़ा रही है. हालांकि अमित शाह ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अभी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घाोषणा नहीं की गई है. इसके बाद राजनाथ सिंह का विरोध करने वालों की संख्या भी घट गई है.

27 मई को जब सहारनपुर की रैली के बाद दिल्ली में पत्रकारों ने अमित शाह से पूछा था कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का वनवास कब खत्म होगा और कौन पार्टी के राम होंगे, तब शाह ने हंसते हुए कहा, 'हड़बड़ी में आने की जरूरत नहीं है. हम आपको इस बारे में सही समय पर इत्तिला करेंगे.'

राजनाथ सिंह राजपूतों का चेहरा रहे हैं. पार्टी ओबीसी केशव प्रसाद मौर्या को राज्य का प्रेसिडेंट बना चुकी है.

राजनाथ सिंह राजपूतों का चेहरा रहे हैं. पार्टी केशव प्रसाद मौर्या को राज्य का प्रेसिडेंट बना चुकी है. वह ओबीसी हैं. तो अब साफ है कि दूसरी बड़ी जिम्मेदारी किसी सवर्ण को दी जाएगी. अब अगड़ा और पिछड़ा जाति के समीकरण की मदद से बीजेपी अपने मिशन 265 प्लस को पूरा करेगी. राजनाथ को सीधे तौर पर जातिगत राजनीति की वजह से चुना गया है.

राजनाथ के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि उनका बीजेपी और आरएसएस दोनों से बेहतर संबंध है. प्रचार के दौरान वह आरएसएस और बीजेपी के बीच बेहतर तरीके से तालमेल बिठा सकते हैं.

साथ ही वह सरकार में भी शामिल हैं. उन्हें आगे रखकर यह संदेश दिया जाएगा कि पार्टी ने राज्य को नजरअंदाज नहीं किया है. दूसरा मोदी उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते. राजनाथ सिंह को नजरअंदाज करने से राजपूतों के बीच गलत संदेश जाता. इसके साथ ही राज्य में अगड़ी जाति के लोग भी नाराज हो सकते हैं.

बीजेपी के चेहरे

नए परिदृश्य में बीजेपी के पास नेताओं का दो समूह है जो लोगों को लुभाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह. मोदी वाराणसी सीट से सांसद हैं जबकि वह गुजरात से आते हैं. ऐसा ही अमित शाह के साथ है. इन दोनों को विपक्षी दल बाहरी बता सकते थे.

अब यहां दूसरा समूह सामने होगा जिसकी सार्वजनिक लोकप्रियता कम है लेकिन वह कम अहम नहीं है. राजनाथ सिंह और केशव प्रसाद मौर्या. अब यह चारों नेता मिलकर बीजेपी की नैया पार लगाएंगे. मोदी और शाह विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे जबकि राजनाथ सिंह और केशव प्रसाद मौर्या जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय नेतृत्व को हवा देंगे.

राजनाथ सिंह को प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने का एक मकसद यह भी बताना है कि पार्टी के बड़े नेताओं को प्रचार में पूरी ऊर्जा लगानी होगी. हालांकि सिंह को आगे करने का यह मतलब नहीं है कि वह मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे. वजह यह कि, मोदी को अच्छे से पता होता है कि उन्हें कौन सा कार्ड कब खेलना है. 

First published: 12 June 2016, 9:12 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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