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राज्यसभा चुनाव: कपिल सिब्बल की राह में रोड़ा बनेंगी प्रीति महापात्रा!

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
(फाइल फोटो)

यूपी के राज्यसभा चुनाव में प्रीति महापात्रा की एंट्री से ये तय हो गया है कि बिना चुनाव लड़े कोई भी राज्यसभा नहीं पहुंच पाएगा. राज्यसभा की 11 सीटों के लिए राज्य में कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं.

प्रीति महापात्रा ने मंगलवार को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन दाखिल किया है. उन्हें राज्य के कई बीजेपी विधायकों के अलावा अन्य विधायकों का भी समर्थन हासिल है. ऐसे में 11 जून को होने वाले चुनाव में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है.   

सिब्बल के खिलाफ बीजेपी का दांव

सियासी हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल की राज्यसभा में एंट्री को कठिन बनाने के लिए  प्रीति महापात्रा को आगे किया गया है. सिब्बल ने यूपी से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है, लेकिन कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं.

सिब्बल को राज्यसभा पहुंचाने के लिए कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के अलावा दूसरे दलों से सहयोग की दरकार है. वहीं प्रीति महापात्रा पर दांव खेलकर बीजेपी ने उनकी राह में मुश्किल जरूर खड़ी कर दी है. राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने सात, बीएसपी ने दो जबकि बीजेपी और कांग्रेस ने एक-एक उम्मीदवार खड़े किए हैं.

लेकिन 12वें उम्मीदवार के तौर पर प्रीति के नामांकन दाखिल करने से चुनाव तय हो गया है. पर्चा दाखिल न करने की सूरत में सभी 11 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाते.

लखनऊ में राज्यसभा चुनाव का नामांकन दाखिल करतीं प्रीति महापात्रा (पीटीआई)

प्रीति का गुजरात कनेक्शन

प्रीति महापात्रा ने नामांकन के आखिरी दिन यानी 31 मई को पर्चा दाखिल किया. कई बीजेपी विधायकों, छोटी पार्टियों के सदस्‍यों और निर्दलीयों की तरफ से उनका नाम प्रस्‍तावित किया गया था.

प्रीति महापात्रा गुजरात से आती हैं. उनके पति हरिहर महापात्रा अरबपति बिजनेसमैन हैं. 36 साल की प्रीति अपने आपको समाजसेविका बताती हैं. हरिहर और प्रीति मुंबई के मालाबार हिल इलाके में रहते हैं.

प्रीति का कहना है कि उनके एनजीओ ‘कृष्णा लीला फाउंडेशन’ ने पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत कैंपेन का हिस्सा बनने के लिए गुजरात में शौचालयों का निर्माण करवाया था.

नरेंद्र मोदी समर्थक की छवि

प्रीति महापात्रा ने पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेते हुए नवसारी जिले में 10 हजार शौचालय बनवाकर मुहिम में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया था. ऐसे में प्रीति का राज्यसभा चुनाव में उतरना मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है. 

इसके साथ ही प्रीति ने 2014 में नरेंद्र मोदी विचारक मंच का हिस्सा रहते हुए भी मोदी की रैली के लिए महिला समर्थकों को जुटाया था. उनके पति हरिहर महापात्रा ने एक बार यह कहकर सबको चौंका दिया था कि वह देश की सबसे बड़ी बिल्डिंग बनाएंगे.

यह प्रोजेक्ट गुजरात में बनना था, जिसका फिलहाल कोई अता-पता नहीं है. प्रीति और हरिहर आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों के मालिक हैं, जो एविएशन, टेलीमीडिया, हॉस्पिटेलिटी, रियल एस्टेट, हीरे-जवाहरात का कारोबार करती है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि दुबई में उनके कुछ फैशन स्टोर्स भी हैं.

एक सीट पर 34 विधायक का गणित

उत्तर प्रदेश में एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए 34 विधायकों का समर्थन चाहिए. राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी समाजवादी पार्टी के सदन में कुल 229 विधायक हैं. जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी बीएसपी के 80 विधायक हैं.

इसके अलावा बीजेपी के पास 41, कांग्रेस के 29, राष्ट्रीय लोकदल के आठ, पीस पार्टी के चार और कौमी एकता दल के दो विधायक हैं. इसके अलावा छह निर्दलीय विधायक हैं. 403 सदस्यों वाली विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, मिल्लत काउंसिल और अपना दल के एक-एक विधायक हैं.

बीजेपी ने शिव प्रताप शुक्ला को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है. ऐसे में उसके सात विधायकों का वोट सीधे प्रीति महापात्रा को मिल सकता है. इसके अलावा 27 विधायकों के समर्थन की भी प्रीति को जरूरत पड़ेगी.

प्रीति के नामांकन के वक्त बहुजन समाज पार्टी के खीरी से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई. वहीं सपा के निष्कासित विधायक राम कुमार यादव, अपना दल के आरके वर्मा और एनसीपी के फतेह बहादुर सिंह भी इस दौरान मौजूद रहे.

सिब्बल की राह थोड़ी आसान

कपिल सिब्बल के पास कांग्रेस के 29 विधायकों का समर्थन है. ऐसे में उन्हें जीत के लिए पांच और विधायकों की जरूरत होगी. जहां एक ओर सिब्बल, सपा के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं सपा ने अपने सातवें उम्मीदवार सुरेंद्र नागर को टिकट देकर गणित गड़बड़ा दिया है.

गुर्जर नेता और कारोबारी सुरेंद्र नागर को राज्यसभा पहुंचाने के लिए सपा को नौ और विधायकों के मदद की जरूरत पड़ेगी. वहीं बीएसपी के दो उम्मीदवार हैं. ऐसे में वो अपने 12 विधायकों का समर्थन सिब्बल को दे सकती है. उत्तराखंड में बहुमत परीक्षण के दौरान बीएसपी ने कांग्रेस का साथ दिया था. लिहाजा कांग्रेस एक बार फिर बसपा की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है.

First published: 1 June 2016, 12:40 IST
 
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