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राकेश अस्थाना केस में पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलासा- घूस देने की बात निकली सच

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 November 2019, 9:21 IST

 सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना पर चल रहे करप्शन मामले में नया खुलासा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस केस में घूस देने के आरोपी हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना के पॉलीग्राफ टेस्ट से घूस देने की पुष्टि हुई है. सतीश बाबू सना की शिकायत पर पिछले साल पूर्व सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था. शिकायत में कहा गया था कि 2016 में एक व्यवसायी के माध्यम से मांस निर्यातक मोईन कुरैशी को बचाने के लिए घूस दी गई थी.

सीबीआई के पास मामले में अपनी जांच पूरी करने के लिए 8 दिसंबर तक का समय है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस केस की अधिकांश जांच पूरी हो चुकी है और अब सीबीआई अमेरिका और यूएई को भेजे गए पत्र रोजरी (एलआर) के उत्तरों की प्रतीक्षा कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला है कि 12 मार्च और 13 मार्च को को सना पर पॉलीग्राफ (लाई -डिटेक्टर) परीक्षण किए गए थे.

यह परिक्षण बिचौलिए मनोज प्रसाद के ससुर सुनील मित्तल और प्रसाद के भाई सोमेश्वर श्रीवास्तव और एक अन्य गवाह पुनीत खरबंदा पर भी किये गए थे. अप्रैल के तीसरे सप्ताह में प्रस्तुत केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और फोरेंसिक स्टेटमेंट विश्लेषण रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि सना और खरबंदा ने एक अनुकूल सीबीआई निर्णय लेने के उद्देश्य से पैसे दिए थे.

मित्तल और श्रीवास्तव पर परीक्षण रिपोर्ट में कोई राय नहीं थी क्योंकि उनके बयान अपर्याप्त थे, जांच के बाद घटना के बारे में जानकारी का खुलासा नहीं किया गया था. इस साल जनवरी में CBI ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक आवेदन दिया था, जिसमें आरोपी और शिकायतकर्ता पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए सहमति मांगी गई थी. 9 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच के लिए दो महीने का समय दिया था. मई में चार महीने की अनुमति के बाद यह दूसरा विस्तार था.

इससे पहले, जनवरी में अदालत ने अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया और सीबीआई को 10 सप्ताह के भीतर जांच समाप्त करने के लिए कहा था. अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और आपराधिक कदाचार का आरोप लगाते हुए मामला अक्टूबर 2018 में दर्ज किया गया था.

सना ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मांस निर्यातक मोइन अख्तर कुरैशी और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर एक मामले में राहत पाने के लिए दुबई के व्यवसायी मनोज प्रसाद के माध्यम से रिश्वत दी थी. तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और उनके डिप्टी अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए थे. दोनों को अक्टूबर 2018 में सरकार द्वारा जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया. 10 जनवरी, 2019 को वर्मा को सीबीआई निदेशक के रूप में हटा दिया गया और एक हफ्ते बाद अस्थाना को नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो में स्थानांतरित कर दिया गया.

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First published: 8 November 2019, 9:12 IST
 
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