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राकेश टिकैत: 44 बार जा चुके हैं जेल, 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति के मालिक

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 January 2021, 13:14 IST

Rakesh Tikait: पिछले दो दिनों से देश में जिस व्यक्ति का नाम टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक सबसे ज्यादा चर्चा में है. वह व्यक्ति भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत हैं. मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ देश के तमाम किसानों के साथ वह दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले दो महीने से आंदोलनरत हैं.

एक दिन पहले जब गाजीपुर बॉर्डर पर वह मीडिया के सामने भावुक होते दिखे तो यह घटना रातों-रात जंगल में आग की तरह फैल गई. राकेश टिकैत ने भावुक होकर दो टूक कहा कि अगर कृषि कानून वापस नहीं लिया गया तो वह आत्महत्या कर लेंगे. उन्होंने कहा कि भले ही सरकार उन्हें गोली मार दे, लेकिन वह आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे.

इसके बाद लोग उनके बारे में जानने की कोशिश करने लगे और वह चर्चा का विषय बन गए. राकेश टिकैत दिवंगत किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत(Mahendra Singh Tikait) के बेटे हैं. महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे. साल 1987 में महेंद्र सिंह टिकैत ने उस समय भारतीय किसान यूनियन की नींव रखी थी, जब किसानों ने बिजली के दाम को लेकर शामली जिले के करमुखेड़ी में किसानों ने एक बड़ा आंदोलन किया था.

महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा था, इसमें दो किसान जयपाल तथा अकबर की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गए थी. इसके बाद भारतीय किसान यूनियन का गठन किया गया. इसके पहले अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत बने. इसके बाद महेंद्र टिकैत किसानों के मसीहा बन गए और जीवनभर उनके हक की लड़ाई लड़ते रहे.

दूसरे नंंबर के बेटे हैं राकेश टिकैत

महेंद्र सिंह टिकैत की शादी बलजोरी देवी से हुई थी. उनके चार बेटे तथा दो बेटियां हुईं. सबसे बड़े बेटे नरेश टिकैत मौजूदा समय में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. महेंंद्र सिंह टिकैत के दूसरे नंबर के बेटे राकेश टिकैत वर्तमान में किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. वहीं तीसरे नंबर के बेटे सुरेंद्र टिकैत मेरठ के एक शुगर मिल में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं. महेंद्र टिकैत के सबसे छोटे बेटे नरेंद्र टिकैत खेती का काम करते हैं.

राकेश टिकैत लड़ चुके हैं लोकसभा का चुनाव

महेंद्र सिंह टिकैत के बड़े बेटे नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन में शुरू से ही सक्रिय थे, जबकि राकेश टिकैत साल 1985 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे. बाद में प्रमोशन होकर वह सब इंस्पेक्टर बनाए गए थे. 90 के दशक में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में दिल्ली के लाल किले पर किसानों का आंदोलन चल रहा था.

सरकार की ओर से ऐसे में राकेश टिकैत पर पिता से आंदोलन खत्म कराने का दबाव बनवाया गया. उसी समय राकेश टिकैत ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और किसानों के साथ हमेशा के लिए खड़े हो गए. इसके बाद वे किसान राजनीति का हिस्सा बन गए और देखते ही देखते महेंद्र सिंह टिकैत के वारिस के तौर पर उन्हें देखा जाने लगा.

15 मई 2011 को कैंसर के चलते महेंद्र सिंह टिकैत का निधन हो गया. बालियान खाप के अनुसार उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया. वहींं राकेश टिकैत प्रवक्ता के पद की जिम्मेदारी संभालते रहे. राकेश टिकैत का जन्म 4 जून 1969 को उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में हुआ था.

दो चुनाव में मिल चुकी है हार

राकेश टिकैत ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की है. उन्होंने एलएलबी करने के बाद वकालत भी की. राकेश टिकैत ने दो बार चुनाव लड़ा है. साल 2007 में उन्होंने मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, इसमें उनको हार मिली थी. फिर साल 2014 में राकेश टिकैत ने अमरोहा सीट से राष्ट्रीय लोक दल से लोकसभा का चुनाव लड़ा. इस चुनाव में भी वह जीत नहीं सके थे. साल 2014 के लोक सभा चुनाव में राकेश टिकैत ने जो शपथपत्र दाखिल किया था, उसके अनुसार उनकी संपत्ति की कीमत 4,25,18,038 रुपये थी.

44 बार जा चुके हैं जेल

किसानों की लड़ाई के चलते राकेश टिकैत 44 बार जेल जा चुके हैं. मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ राकेश टिकैत को एक बार 39 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था. एक बार  दिल्ली में संसद भवन के बाहर उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गन्ना जला दिया था. इस कारण उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जा चुका है. 

First published: 29 January 2021, 12:59 IST
 
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