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महबूबा-माधव मुलाकात और ढाक के तीन पात

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2016, 20:04 IST
QUICK PILL
  • जेएनयू में अफजल गुरु प्रकरण होने के बाद पीडीपी के लिए राजनीतिक मुश्किलों में बढ़ोतरी ही हुई है. इस बहस  ने देश को दक्षिणपंथ बनाम अन्य में विभाजित कर दिया है. पार्टी की मुश्किलों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि घाटी में जेएनयू विवाद की गूंज सुनाई दे रही है.
  • बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन को लेकर बेहद उत्साहित नजर आ रही है लेकिन पीडीपी की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा है. पीडीपी का कहना है कि अभी सरकार गठन को लेकर कोई निर्णायक बातचीत नहीं हुई है.

राम माधव और महबूबा मुफ्ती के बीच हुई हालिया गुप्त मुलाकात के खुलासे के बाद जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन को लेकर सुगबुगाहट बढ़ गई है. लेकिन ऐसा नहीं है. उमर अब्दुल्ला ने बुधवार शाम छह बजकर नौ मिनट पर एक ट्वीट कर श्रीनगर एयरपोर्ट पर एक फ्लाइट के उतरने की जानकारी दी. उन्होंने लिखा, 'पीडीपी-बीजेपी के बीच सरकार बनाने को लेकर कुछ पक रहा है.'

अब्दुल्ला के ट्वीट के बाद एनसी के प्रवक्ता जुनैद अजिम मट्टू ने कहा, 'माधव-महबूबा की बैठक को गुप्त रखा जाना था. इसलिए देर शाम की फ्लाइट ली गई. सीआईडी को एयरपोर्ट से बाहर निकाला गया लेकिन पोल खुल गई.' इसके बाद फिर उमर ने ट्वीट कर कहा, 'कई बार फ्लाइट ट्रैकिंग वाले एप से भी अदभुत जानकारी मिलती है. अगली बार रडार के अंदर उड़िएगा.'

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माधव एयरपोर्ट से निकलकर सीधे महबूबा के आधिकारिक निवास फेयरव्यू गए. दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. पीडीपी के सूत्रों ने बताया, 'महबूबा ने अपनी पुरानी मांगों को दोहराया. उन्होंने गठबंधन को बनाए रखने के लिए नए सिरे से शुरूआत करने की दिशा में कुछ विश्वास बहाली के उपायों  की घोषणा की मांग की. उन्होंने एजेंडा ऑफ अलायंस को बनाए रखने के लिए भरोसा मांगा.'

माधव अब दिल्ली लौट चुके हैं और वह महबूबा की मांग को लेकर बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह के साथ बातचीत करेंगे. मीडिया से बातचीत करते हुए माधव ने गठबंधन के एजेंडे को जारी रखे जाने की दिशा में सकारात्मक संदेश दिए. उन्होंने संवाददाताओं को बताया, 'बातचीत सकारात्मक रही. मुझे उम्मीद है कि पहले की व्यवस्था जारी रहेगी.' माधव ने कहा कि गठबंधन के एजेंडे में न तो कोई बदलाव किया जाएगा और नहीं इसमें नए प्रावधान किए जाएंगे.

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अब पीडीपी नेताओं के दिल्ली आने की उम्मीद बढ़ गई है. इस दौरान उनके बीजेपी के नेतृत्व के साथ बातचीत होगी. माधव ने कहा, 'बीजेपी नेताओं के साथ पीडीपी के नेताओं की मुलाकात होने के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट हो पाएगी.'

श्रीनगर में एक स्थानीय न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में पूर्व उप-मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने भी यही कहा. उन्होंने कहा, 'राम माधव ने मुझे बताया कि उनकी महबूबा के साथ घंटे भर चली बैठक सकारात्मक मोर्चे पर खत्म हुई और हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दोनों दल नई सरकार का गठन करेंगे.' हालांकि उन्होंने इस बात को 'बेतुका' करार दिया कि बीजेपी ने पीडीपी की मांगों के समक्ष घुटने टेक दिए हैं.

सिंह ने कहा, 'पीडीपी ने कोई शर्त नहीं रखी है लेकिन हां कुछ मुद्दों को लेकर पार्टी को आपत्ति है और हमने आधिकारिक तौर उन्हें गठबंधन के एजेंडे को आगे बढ़ाए जाने की सहमति दी है. इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा.' 

हालांकि पीडीपी के नेता बहुत अधिक उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं. पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा, 'बैठक सही दिशा में हुई लेकिन सरकार गठन को लेकर अभी कोई ठोस फैसला नहीं किया है.' उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद हैं कि भविष्य में सब कुछ ठीक होगा. हम विवाद वाले मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं  और इसमें समय लगेगा.'

जेएनयू में अफजल गुरु प्रकरण होने के बाद पीडीपी के लिए राजनीतिक मुश्किलों में बढ़ोतरी ही हुई है. इस बहस ने देश को दक्षिणपंथ बनाम अन्य में विभाजित कर दिया है. 

पार्टी की मुश्किलों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि घाटी में जेएनयू विवाद की गूंज सुनाई दे रही है. जेएनयू प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी अपने एजेंडे से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

ऐसे में बीजेपी के साथ एक बार फिर से गठबंधन करना पीडीपी पर भारी पड़ सकता है. पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हम बीजेपी से उम्मीद करते हैं कि वह कश्मीर को लेकर ज्यादा संवेदनशील रुख अपनाएगी.' उन्होंने कहा, 'हम विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाकर ही अपने वैचारित मतभेदों से निजात पा सकते हैं.'

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First published: 19 February 2016, 20:04 IST
 
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