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राम मंदिर रिटर्न: इन पत्थरों का निशाना मंदिर नहीं सरकार है

समीर चौगांवकर | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • बीते रविवार को अयोध्या के कारसेवक पुरम में 15 टन पत्थरों की नई खेप राजस्थान के भरतपुर से अयोध्या पहुंची है. इसके साथ ही मंदिर निर्माण आंदोलन की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं.
  • उत्तर प्रदेश से आ रहे नकारात्मक संकेतों के कारण भाजपा के अंदरखाने में \r\nबेचैनी है. भाजपा एक बार फिर से \r\nपुरानी रणनीति अपना रही है. उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण की रणनीति.

अयोध्या में फिर से हलचल है. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठन एक बार फिर से राम मंदिर आंदोलन का धार देने में जुट गए है. बीते रविवार को अयोध्या के कारसेवक पुरम में 15 टन पत्थरों की नई खेप राजस्थान के भरतपुर से अयोध्या पहुंची है.

इस बेमौसम मंदिर राग की क्या वजह हो सकती है? क्या विहिप एक बार फिर से मंदिर आंदोलन छेड़ने जा रही है या फिर इसके पीछे कुछ और मंशा है? रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने शिलापूजन करके इन पत्थरों के आमद का स्वागत किया है.

केंद्र में नरेंद्र मोदी की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ धारा 370, समान नागरिक संहिता और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर बेहद आश्वस्त था. संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों को उम्मीद थी कि संघ के प्रचारक रहे मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसके लंबे समय से लंबित पड़े एजेंडे को लागू करने में तेजी आएगी.

लेकिन विकास के नाम पर सत्ता में आए मोदी ने अब तक संघ के प्रिय विषयों से किनारा किए रखा है. संघ की इच्छा के खिलाफ मोदी ने जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है. मोदी के इस दांव ने संघ की धारा 370 हटाने की मांग को कुंद कर दिया. संघ और भाजपा के लोगों की मानें तो मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संघ तीन बार राम मंदिर निर्माण को बात रख चुका है लेकिन तीनों ही बार मोदी ने इस पर चुप्पी साधे रखी.

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संघ तीन बार मंदिर निर्माण की बात रख चुका है लेकिन हर बार मोदी ने चुप्पी साध ली

उल्लेखनीय है कि संघ और सरकार की समन्वय समिति की बैठक दो से चार सितंबर तक दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश सरकार के भवन मध्यांचल में हुई थी. इस बैठक के आखरी दिन प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी भी बैठक में भाग लेने पहुंचे थे. इसी दिन मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की बंद कमरे में लगभग 23 मिनट बैठक चली थी. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मोदी ने संघ प्रमुख को साफ कह दिया था कि राम मंदिर का निर्माण फिलहाल उनकी सरकार के एजेंडे में नहीं है.

मोदी ने संघ प्रमुख को साफ कहा कि इस कार्यकाल में वे सिर्फ विकास के एजेंडे पर काम करेंगे. इस बैठक के बाद संघ एक बार फिर से रांची में इकट्ठा हुआ. 28 से 31 अक्टूबर तक रांची में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में राम मंदिर निर्माण को लेकर विस्तार से विमर्श हुआ. विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल खराब स्वास्थ के चलते पहली बार इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे.

कह सकते हैं कि आज जो पत्थर अयोध्या पहुंच रहे हैं उसकी नींव रांची की बैठक में पड़ी थी. उस बैठक में विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को संघ ने फिर से राम मंदिर आंदोलन को तेज करने की हरी झंडी दे दी थी. विश्व हिंदूू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के निधन के बाद 23 नवबंर को एक श्रद्धांजलि सभा में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सार्वजनिक मंच से बयान दिया कि- "राम मंदिर का निर्माण ही अशोक सिंघल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी".

संघ धारा 370, समान नागरिक संहिता और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर बेहद आश्वस्त था

संघ ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे. संघ प्रमुख ने अपनी बात को यही पर पूर्ण विराम नहीं दिया. उन्होंने यह कहकर  कहकर मोदी सरकार पर दबाव बढ़ाया कि उनको उम्मीद है कि उनके जिंदा रहते अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो जाएंगा. इस तरह मौके-बेमौके संघ प्रमुख राम मंदिर का जिक्र करते रहे.

उधर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष जनमेजय शरण दास विभिन्न पक्षकारों से मंदिर निर्माण के लिए चर्चा में लीन थे. उनका दावा है कि सभी पक्ष मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए तैयार हैं, और अगले साल की शुरूआत में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा. उनके मुताबिक मामला भले ही कोर्ट में हो लेकिन आपसी समझौता अंतिम दौर में है. अदालत में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड, हिंदू महासभा सहित 17 पक्षों के बीच वार्ता जारी है.

संघ और सरकार के बीच कुछ पक रहा है

अब तक कोर्ट का हवाला देकर मंदिर निर्माण पर चुप्पी साधे रहने वाले हिंदू नेता अचानक से इसके लिए आवाज क्यों उठाने लगे है? भाजपा के एक बड़े नेता के मुताबिक अचानक से राम मंदिर निर्माण की आवाज उठने के पीछे पार्टी और संघ की सोची-समझी रणनीति है. दोनों की निगाह उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर टिकी है.

बिहार में भाजपा की बुरी हार और उत्तर प्रदेश से आ रहे नकारात्मक संकेतों के कारण भाजपा के अंदरखाने में बेचैनी है. मौदूदा रुझान बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी पहले स्थान पर चल रही है. संकेत हैं कि भाजपा फिलहाल तीसरे स्थान पर है. हालांकि चुनाव में अभी लगभग 15 महीने का समय बचा है. भाजपा एक बार फिर से पुरानी रणनीति अपना रही है. उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण की रणनीति.

विकास के नाम पर सत्ता में आए मोदी ने अब तक संघ के प्रिय विषयों से किनारा किए रखा है

विश्व हिंदू परिषद के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनवरी 2016 से 2017 तक उनका संगठन पूरे प्रदेश में राम मंदिर, घर वापसी और लव जेहाद जैसे मामलों को घर-घर तक पहुंचाने का काम केरगा. उनका मानना है कि ये मामले जितना तूल पकड़ेंगे भाजपा को उतना ही बड़ा चुनावी फायदा मिलेगा.

भाजपा और संघ रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मंदिर मुद्दा उछाल रहे हैं.

ऐसा लगता है कि यह भाजपा और संघ के बीच यह रणनीतिक साझेदारी है जिसमें मोदी राज्य में विकास और कानून व्यवस्था की बात करेंगे जबकि संघ और उसके आनुषंगिक संगठन राम मंदिर, घर वापसी, लव जेहाद का मुद्दा उछालेंगे. हिंदूवादी संगठनों की कोशिश एक बार फिर बाबरी मस्जिद गिराने से पहले हुए 1991 के चुनाव के पुनरावृत्ति करने की है.

गौरतलब है कि 1991 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सांप्रदायिकता को हवा देकर और राम मंदिर का कार्ड खेलकर 425 विधासभा सीटों में से 221 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

पत्थर पहुंचने लगे रामसेवकपुरम

संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों द्वारा मंदिर मुद्दे को उछाले जाने के बाद अब देश भर से मंदिर निर्माण के लिए पत्थर इकट्ठा होने लगा है. राम जन्मभूमि न्यास के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए करीब 2.25 लाख क्यूबिक फुट पत्थरों की आवश्यकता होगी. अयोध्या स्थित विहिप मुख्यालय और कारसेवकपुरम में पहले से ही करीब 1.25 लाख क्यूबिक फुट तराशे और अनगढ़ पत्थर पड़े हुए हैं.

शेष एक लाख क्यूबिक फुट पत्थर देश भर से इकट्ठा करने के लिए विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता जुटे हुए हैं. रविवार को राजस्थान के भरतपुर से करीब 15 टन पत्थरों की पहली खेप इसी रणनीति के तहत अयोध्या पहुंचाई गई है. विहिप के अनुसार अभी करीब 75 हजार घनफुट पत्थर और आएंगे. कारसेवकपुरम स्थित कार्यशाला में पत्थरों की खेप पहुंचने पर रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने वैदिक मंत्रोच्चर के बीच शिला पूजन किया और उम्मीद जताई की जल्द ही राम मंदिर निर्माण शुरू हो जाएंगा.

जब उनसे सवाल किया गया कि क्या वे फिर से मंदिर आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं या वे मोदी सरकार पर किसी तरह का दबाव बनाएंगे तो उनका जवाब था, 'हम मोदीजी पर कोई दबाव नहीं बनाएंगे क्योंकि वे पहले से ही देश की कई समस्याओं में उलझे हुए हैं.'

जिस तरह से अचानक मंदिर मुद्दा गर्माया है उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में मिशन-2017 की दबे पांव शुरुआत कर दी है.

First published: 23 December 2015, 7:39 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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