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तीन चरणों के चुनाव के बाद राहुल और बुद्धदेब की साझा रैली क्यों?

रजत रॉय | Updated on: 29 April 2016, 8:18 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और सीपीएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य ने बुधवार को कोलकाता में साझा रैली की.
  • दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की साझा रैली से कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन वोटरों को एकजुटता का संदेश देना चाहता है. राज्य में दो चरणों का मतदान बाकी, तीन चरण पूरे.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम और सीपीएम नेता बुद्धदेब भट्टाचार्य के साथ मंच साझा किया.

राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है जब दोनों दलों के शीर्ष नेता एक साथ दिखे. कांग्रेस और सीपीएम ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ राज्य में गठबंधन किया है.

सीपीएम पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य भट्टाचार्य ने इस रैली में कहा, "ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, न कोलकाता में न ही देश में कहीं और. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सत्ताधारी पार्टी ने बंगाल में 'जंगल राज' ला दिया है. कांग्रेस और लेफ्ट इस सरकार को सत्ता से बाहर फेंकने के लिए साथ आए हैं ताकि जनता के लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए जा सकें."

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इससे पहले भी दोनों दलों के नेता साथ आए लेकिन उनमें वो करीबी नहीं दिखी जो राहुल और बुद्धदेब में दिखी. उन दोनों के कार्यक्रम से एक दिन पहले कुछ स्थानीय सीपीएम नेता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ मंच साझा करते दिखे.

सोमवार को सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने राज्य कांग्रेस के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी के साथ एक रैली की. हालांकि येचुरी कार्यक्रम में तब आए जब चौधरी अपना भाषण दे कर जा चुके थे.

कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन के बारे में फैल रही अफवाह दूर करने के लिए की राहुल गांधी और बुद्धदेब भट्टाचार्य ने साझा रैली

इसके बाद ये चर्चा होने लगी कि कांग्रेस और सीपीएम नेता एक दूसरे के ज्यादा करीब आने से बच रहे हैं. और ये गठबंधन केवल चुनाव के नतीजे आने तक ही है. टीएमसी ने इस अफवाह को हवा भी दिया.      

टीएमसी ने दावा किया कि कांग्रेस और लेफ्ट के समर्थक दूसरी पार्टी को वोट नहीं देंगे. हालांकि राज्य में विपक्षी दल के नेता सूर्ज्य कांत मिश्रा और बुद्धदेब भट्टाचार्य इस आशंका को निर्मूल करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं.

मिश्रा ने सीपीएम के वरिष्ठ नेता सोमेन मित्रा के साथ भवानीपुर में मंच साझा किया था. इस सीट से सीएम ममता बनर्जी खुद उम्मीदवार हैं. कांग्रेस-सीपीएम गठबंधन ने उनके खिलाफ दीपा दासमुंसी को उतारा है. वहीं बीजेपी ने सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र बोस को प्रत्याशी बनाया है.

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राहुल और बुद्धदेब की रैली संभवतः जानबूझकर आयोजित की गई ताकि वोटरों में गठबंधन के बारे में किसी तरह की अफवाह न फैले. रैली में बुद्धदेब ने कहा भी कि पूरे राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट के कार्यकर्ता एकजुट होकर लोकतंत्र की बहाली के लिए काम रहे हैं.

स्वास्थ्य कारणों से बुद्धदेब चुनाव प्रचार में ज्यादा सक्रिय भूमिका में नहीं हैं. वो नियमित तौर पर पार्टी मुख्यालय जाते हैं फिर भी वो पार्टी के पोलित ब्यूरो से हट गए. जमीनी कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी काफी सिमट गई है.

पिछले साल सीपीएम ने सिंगुर से सालबोनी तक करीब 100 किलोमीटर लंबी रैली निकाली थी. बुद्धदेब ने कार्यक्रम को हरी झंड दिखायी थी. उसके बाद से वो ऐसे किसी प्रमुख कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं.

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बंगाल में पहले तीन चरणों के मतदान में बुद्धदेव ने गठबंधन के लिए प्रचार नहीं किया. उसके बाद उन्होंने दक्षिण कोलकाता में एक रोड-शो में हिस्सा लिया और भाषण दिया.

जब पार्टी को जरूरत पड़ी तो उसने बुद्धदेब को राहुल की रैली में बुलाया और वो आए भी. रैली में आते ही उन्होंने राहुल के साथ फोटो खिंचाई.

बंगाल में बुद्धदेब भट्टाचार्य ने की राजीव गांधी की तारीफ, राहुल गांधी ने उठाया शारदा और नारद का मुद्दा

रैली में बुद्धदेब ने राहुल के पिता राजीव गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि वो बंगाल की पंचायती राज व्यवस्था के प्रशंसक थे.

रैली में दोनों नेताओं के भाषण भी एक-दूसरे के पूरक लग रहे थे. बुद्धदेब ने ममता राज में कानून व्यवस्था, औद्योगीकरण, अर्थव्यस्था इत्यादि में आई गिरावट का जिक्र किया. वहीं राहुल ने बुद्धदेब के सीएम काल की तारीफ करते हुए ममता शासन में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने ममता के पिछले साल 70 लाख नई नौकरी देने के दावे पर भी सवाल खड़ा किया.

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ये रैली कांग्रेस ने आयोजित की थी. इसलिए कांग्रेस समर्थक इसमें बड़ी तादाद में मौजूद थे. हालांकि कांग्रेसी झंडे के साथ छिटपुट लाल झंडे भी दिखायी दे रहे थे.

राहुल ने रैली के दौरान शारदा चिट फंड घोटाला, नारद स्टिंग और कोलकाता के फ्लाईओवर गिरने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने इन्हें ममता प्रशासन के भ्रष्टाचार के नमूने के तौर पर पेश किया.

दोनों ही नेताओं ने ममता बनर्जी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जोड़ने की कोशिश की.

First published: 29 April 2016, 8:18 IST
 
रजत रॉय

Journalist based out of Kolkata.

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