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निहलानी पर बोले रविशंकर प्रसाद- पीएम को चमचों की जरूरत नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2016, 17:17 IST
(पीटीआई)

फिल्‍म 'उड़ता पंजाब' को लेकर फिल्मकार अनुराग कश्यप और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी के बीच चल रहे घमासान से केंद्र सरकार ने दूरी बना ली है. केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सरकार हमेशा से रचनात्‍मक आजादी की समर्थक रही है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुंबई में आयोजित एक्‍सप्रेस अड्डा कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सेंसर बोर्ड में सरकार की किसी भी तरह की कोई भूमिका नहीं होती है.

'मैं मोदी का चमचा'

रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के प्रमुख पहलाज निहलानी के ‘मोदी का चमचा होने पर गर्व है’ वाले बयान पर कहा, "मुझे लगता है कि किसी भी आदमी को इस तरह के बयानों से बचना चाहिए. हमारे प्रधानमंत्री खुद को देश का प्रधान सेवक कहते हैं. मुझे नहीं लगता कि प्रधान सेवक को किसी चमचे की जरूरत है."

गौरतलब है कि फिल्म 'उड़ता पंजाब' के मामले में एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए पहलाज निहलानी ने कहा था, "'हां, जैसे अनुराग कश्‍यप कहते हैं कि मैं नरेंद्र मोदी का चमचा हूं. तो मैं गर्व से कहता हूं कि हां मैं भी मोदी चमचा हूं. क्‍या मुझे इटली के प्रधानमंत्री का चमचा होना चाहिए."

सोमवार को फिर सुनवाई

फिल्म 'उड़ता पंजाब' का विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. इस मामले में फिल्म के निर्माताओं की सेंसर बोर्ड के खिलाफ याचिका पर सोमवार को फैसला आने की संभावना है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया था कि फिल्म 'उड़ता पंजाब' किसी भी तरह से पंजाब की छवि को खराब नहीं कर रही है. सेंसर बोर्ड केवल फिल्‍म को कैटेगरी में सर्टिफाई कर सकता है, उसे सेंसर नहीं कर सकता.

आज भी बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई. सोमवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई होगी. जिसके बाद फिल्म की रिलीज पर आदेश आ सकता है. फिल्म उड़ता पंजाब 17 जून को रिलीज होने वाली है.

सुनवाई के दौरान सेंसर बोर्ड के वकील की दलीलों पर हाईकोर्ट ने कहा, "चाहे टेलीविजन हो या सिनेमा, पहले लोगों को इसे देखने दें. हर किसी के पास देखने या न देखने का विकल्प मौजूद है."

अदालत ने फिल्म में अपशब्दों के इस्तेमाल की दलील पर कहा, "कोई भी फिल्म इस तरह के कंटेट पर नहीं चल सकती. कोई कहानी होनी जरूरी है. फिर आप इतना परेशान क्यों हैं?"

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, "आपकी (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) तरफ से उठाए गए गैर जरूरी कदमों से फिल्म को बेवजह पब्लिसिटी मिल रही है."

'ट्रेलर में था चिट्टा वे'

वहीं इस मामले में फिल्मकारों के वकील ने अदालत से कहा, "जिस चिट्टा वे शब्द को लेकर सेंसर बोर्ड सवाल खड़े कर रहा है, फिल्म के पास किए गए ट्रेलर में भी इसका इस्तेमाल था, फिर अब क्यों इसे हटाने का आदेश दिया जा रहा है."

दरअसल चिट्टा का मतलब होता है सफेद रंग. हेरोइन का पाउडर भी सफेद होता है, इसलिए पंजाब में ड्रग्स के लिए चिट्टा शब्द का इस्तेमाल होता है. अनुराग कश्यप की फिल्म उड़ता पंजाब के एक गाने के बोल भी चिट्टा वे हैं.

फिल्मकारों के वकील ने अपनी बात के पक्ष में कुछ फिल्मों के नाम की मिसाल देते हुए कहा, "डेल्ही बेली, बैंडिट क्वीन और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों के नामों को भी सेंसर बोर्ड ने पास किया था."

First published: 10 June 2016, 17:17 IST
 
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