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12 खातों में फंसे हैं बैंकों के NPA के 2 लाख करोड़ रुपये

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 June 2017, 11:26 IST

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 12 बैंक खातों की पहचान की है, जिन पर बैंकों के एनपीए का 2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. ये रकम 8 लाख करोड़ के कुल एनपीए का तकरीबन 25% है. इन 12 खातों पर 5 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऐसे खातों को लेकर बैंकों को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने जा रहा है. 

6 लाख करोड़ सरकारी बैंकों का 

आरबीआई के मुताबिक, बैंकों का एनपीए यानी नॉन परफोर्मिंग एसेट्स 8 लाख करोड़ रुपये का है, जिनमें से 6 लाख करोड़ सरकारी बैंकों का है. ये कर्ज लंबे समय से फंसा हुआ है और इसकी रिकवरी नहीं हो पा रही है.

बढ़ते एनपीए से बैंकों की हालत खस्ता है और इस कर्ज की वसूली के लिए अब खुद रिजर्व बैंक सक्रिय हो गया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उन 12 खाता धारकों के नाम नहीं बताए हैं, जिन पर बैंकों का सबसे ज्यादा पैसा बकाया है.

इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एनपीए की परिभाषा में ही कुछ राहत देने पर विचार कर रहा है. उसकी एनपीए वर्गीकरण की अवधि को 90 दिन से आगे बढ़ाने की योजना है. इससे लघु एवं मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है.

क्या है NPA?

मौजूदा व्यवस्था के तहत कोई भी कर्ज का खाता उस समय एनपीए में परिवर्तित हो जाता है, जब उसकी किस्त और ब्याज का भुगतान 90 दिन तक नहीं किया जाता है.

जहां तक सूक्ष्म और लघु इकाइयों की बात है, उन्हें माल के बदले भुगतान कई बार देरी से मिलता है. ऐसे में जैसे ही वह बैंकों से लिये कर्ज के भुगतान में 90 दिन से अधिक देरी करते हैं उनका कर्ज एनपीए श्रेणी में चला जाता है और फिर उन्हें आगे कर्ज नहीं मिलता है.

First published: 14 June 2017, 11:26 IST
 
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