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पढ़ें आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का अपने सहयोगियों को लिखा त्यागपत्र

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 20 June 2016, 13:05 IST

प्रिय साथियों,

मैंने सितंबर 2013 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 23वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला था. उस समय, भारतीय मुद्रा हर रोज नीचे गिर रही थी, मुद्रास्फीति ऊंची थी और विकास की रफ्तार कमजोर पड़ चुकी थी. भारत को उस समय "पाच संवेदनशील" में से एक मान लिया गया था. 

गवर्नर के रूप में अपने उद्घाटन भाषण में मैंने काम करने के लिए एक एजेंडा तैयार किया था, जिसकी चर्चा मैंने आपके साथ भी की थी. इसमें एक मौद्रिक रूपरेखा बनाई गई थी जिसका मकसद मुद्रास्फीति को नीचे लाना, अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत आधार देने के लिए अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा कराना, नए सार्वभौमिक और प्रमुख बैंकों के लिए स्पष्ट पारदर्शी लाइसेंस प्रणाली बनाना, भारत बिल भुगतान प्रणाली और व्यापार प्राप्य एक्सचेंज जैसे नए संस्थानों का निर्माण, मोबाइल फोन के माध्यम से सभी तक भुगतान का विस्तार और पूरी अर्थव्यवस्था में बड़े संकट की पहचान और उसका हल तलाशना था. 

मैं कहना चाहूंगा कि इन सब उपायों को लागू कर हमने "वैश्विक वित्तीय बाजारों में पैदा हुई डरावनी तूफानी लहरों से पार पाने वाले भविष्य के एक मजबूत पुल का निर्माण किया है."

आज मुझे गर्व है कि हमने रिजर्व बैंक की ओर से इन सभी कोशिशों पर सकारात्मक परिणाम दिया है. एक नया मुद्रास्फीति केंद्रित ढांचा बन चुका है जिसने मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने में मदद की है और एक लंबे समय के बाद जमाकर्ताओं को जमा पर सकारात्मक ब्याज दरों से मुनाफा कमाने का अवसर दिया है.

शुरुआत में ब्याज दरों में मामूली बढ़ोत्तरी के बाद हम उनमें 150 आधार अंकों की कटौती करने में सफल रहे हैं. इससे उन नाममात्र के ब्याज दरों में भी कमी आ गई है जो सरकार को बॉन्ड की परिपक्वता अवधि बढ़ाने पर देना पड़ता है. परिणामस्वरूप सरकार पहली बार 40 साल के लिए बॉन्ड जारी करने में सक्षम हो पाई है. 

अंततः, हमारे उठाए गए कदमों के बाद भारतीय मुद्रा स्थिर है, और हमारा विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर है. यह सब तब हुआ है जब हमने 2013 के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार से निकासी को पूरी छूट दी है. आज हम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था हैं और 'संवेदनशील पांच' के दायरे से तो काफी समय पहले ही बाहर निकल चुके हैं.

हमने उससे बहुत अधिक काम कर दिखाया है जितना शुरुआती भाषण मेंं लक्ष्य तय किया था. इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रबंधन की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए (आरबीआई द्वारा नियुक्त नायक समिति की सिफारिश के आधार पर) बैंक बोर्ड ब्यूरो का गठन कर सरकार की मदद करना शामिल है.

साथ ही फेल हो रहे प्रोजेक्टों से पैसा निकालने में बैंकों को सक्षम बनाने के लिए पूरी नई संरचना बनाना, और बैंकों को अपने फंसे हुए ऋण की समय पर पहचान कर उन्हें स्वीकार करने को मजबूर करना तथा संपत्ति की गुणवत्ता की समीक्षा (एक्यूआर) के उपाय भी शामिल हैं.

यूनिवर्सल भुगतान इंटरफेस को शुरू करने के लिए हमने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ ​इंडिया) के लिए एक अनुकूल ढांचा बनाया है. यह जल्द ही देश में मोबाइल से मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला देगा. 

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आंतरिक रूप से, भारतीय रिजर्व बैंक अपने ही  वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा निर्मित और संचालित पुनर्गठन और व्यवस्थित होने के दौर से गुजर रहा है. हम अपने कर्मचारियों की विशेषज्ञता और कौशल को मजबूत बनाने में जुटे हैं ताकि वे दुनिया में किसी से पीछे नहीं रहें. 

हमने जो कुछ भी किया, उसके पीछे हमारे बोर्ड में शामिल परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष पद्म विभूषण डॉ. अनिल काकोडकर और स्व-कार्यरत महिला एसोसिएशन की मुखिया पद्म भूषण एवं मैग्सेसे पुरस्कार विजेता इला भट्ट जैसे प्रख्यात प्रबुद्ध नागरिकों का दिशा-निर्देशन रहा है. हमारे लोगों की अखंडता और क्षमता, और हमारे कार्यों की पारदर्शिता अतुलनीय है. और इस तरह के श्रेष्ठ संगठन का हिस्सा होने का मुझे गर्व है.

मैं एक अकादमिक व्यक्ति हूं और मैं हमेशा से कहता रहा हूं कि मेरा वास्तविक घर विचारों के दायरे में ही है. शिकागो विश्वविद्यालय से अवकाश और मेरे तीन साल के कार्यकाल का निकट आता अंत यह प्रतिबिंबित करने का अच्छा समय है कि हमने कितना कुछ कर दिखाया है.

अब जबकि हम वह सब काम कर चुके हैं जो लक्ष्य पहले दिन तय किया था, दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को पूरा करना अभी बाकी है. मुद्रास्फीति की दर काबू में है, लेकिन नीति बनाने वाली मौद्रिक नीति समिति का गठन अभी किया जाना है. इसके अलावा, संपत्ति की गुणवत्ता की समीक्षा के तहत शुरू किए गए बैंकों के सफाई अभियान ने पहले ही बैंकों की बैलेंस शीट को और अधिक विश्वसनीयता दिलाई है और यह अभी भी जारी है. अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी अल्पावधि में कुछ जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं.

हालांकि मैं इन सब घटनाक्रम को देखने के लिए पहले ही तैयार था. इनके परिणामस्वरूप और सरकार के साथ परामर्श के बाद, मैं आप सबको बताना चाहता हूं कि मैं 4 सितंबर 2016 को गवर्नर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद अकादमिक दुनिया में वापस लौट जाऊंगा. निस्संदेह, जब भी जरूरत होगी, मैं अपने देश की सेवा के लिए उपलब्ध रहूंगा.

साथियों, हमने पिछले तीन साल व्यापक आर्थिक और संस्थागत स्थिरता का एक मंच बनाने के लिए सरकार के साथ काम किया है. मुझे यकीन है कि हमने जो काम किया है, वह ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन के यूरो जोन से बाहर होने के खतरे से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में सक्षम है. हमने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बी) जमा राशि और उनके बहिर्गमन की अदायगी के लिए पर्याप्त तैयारी की है. अब मोटे तौर पर ऐसी कोई घटना होनी नहीं चाहिए.

आपकी उपलब्धियों के कारण बैंक का मनोबल ऊंचा है. मुझे यकीन है कि सरकार जो सुधार कर रही है, आपके द्वारा और अन्य नियामकों द्वारा जो कुछ किया जाएगा, वह सब मिलाकर ऐसा मंच तैयार करेगा जो आने वाले वर्षों में रोजगार में भारी वृद्धि और हमारे लोगों की समृद्धि के रूप में प्रतिबिंबित होगा. 

मुझे विश्वास है कि मेरे उत्तराधिकारी आपकी मदद के साथ हमें नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे. मैं अभी भी अगले कुछ महीनों तक आपके साथ काम करूंगा, लेकिन अपने समर्पित कार्य और बेहिचक समर्थन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के परिवार में शामिल आप सभी लोग मुझे आपका अग्रिम धन्यवाद अदा करने दें. आपके साथ यह एक शानदार यात्रा रही!

आभार के साथ

सादर

रघुराम जी राजन

First published: 20 June 2016, 13:05 IST
 
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