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अरूणाचल प्रदेशः विरोध दरकिनार, पेमा खांडू नए खेवनहार

आकाश बिष्ट | Updated on: 18 July 2016, 8:11 IST

अरुणाचल प्रदेश में जब कांग्रेस सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जा रही थी, उससे कुछ ही घंटों पहले मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने अपना इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही 36 वर्षीय पेमा खांडू के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया.

45 कांग्रेस और 2 निर्दलीय विधायकों के समर्थन के दावे के साथ खांडू देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं.

कौन हैं पेमा खांडू?

पेमा खांडू पूर्व मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू के पुत्र हैं. उनकी 2011 में हेलीकाॅप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. यह युवा नेता दो बार राज्य की विधानसभा में रह चुका है. पिता की मृत्यु के बाद उन्हें जरबोम गमिन के मुख्यमंत्रित्व काल में जल संसाधन और पर्यटन मंत्री बनाया गया.

गमिन के बाद जब तुकी मुख्यमंत्री बने तो खांडू को ग्रामीण कार्य, पर्यटन एवं उड्डयन मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया.

तुकी सरकार में चार साल तक पद पर रहने के बाद उन्होंने 2015 में इस्तीफा दे दिया और कलिको पुल धड़े के साथ हो लिए, जिसने राज्यपाल जेपी राजखोवा को राज्य की कांग्रेस सरकार बर्खास्त करने पर मजबूर कर दिया. तब खांडू 30 कांग्रेसी विधायकों के साथ पीपुल्स पार्टी आॅफ अरूणाचल में शामिल हो गए जिसने 11 भाजपा विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाई.

अरुणाचल में कांग्रेस का पैंतरा, तुकी का इस्तीफा पेमा खांडू विधायक दल के नेता

मुक्तो (जजा) विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि खांडू दिल्ली के हिन्दू काॅलेज से स्नातक हैं. वे 2005 में अरूणाचल प्रदेश कांग्रेस के सचिव बने. वे 2010 में तवांग जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे.

तुकी की जगह खांडू कैसे आए

कांग्रेस विधायक दल की रविवार सुबह ईटानगर में बैठक हुई. पर्दे के पीछे हुई लंबी बातचीत के बाद कालिखो पुल के नेतृत्व में इस अलग धड़े ने बैठक में शामिल होना तय किया.

अरूणाचल प्रदेश पूर्व के सांसद निनांग ईरिंग ने पर्दे के पीछे विधायकों को मनाने के अथक प्रयास किए, खासकर खांडू और चाउनामीन को. इन्हें कहा गया कि अगर वे पार्टी में लौटते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा.

बैठक के दौरान ही तय किया गया कि तुकी को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाएगा क्योंकि उनकी कार्य शैली की वजह से दिसम्बर 2015 में पुल धड़ा बागी हो गया था. तब कांग्रेस विधान मंडल दल ने खांडू को अपना नेता चुना और तुकी ने तुरंत ही कार्यवाहक राज्यपाल राजखोवा के घर जाकर इस्तीफा दिया जो तुरंत स्वीकार कर लिया गया.

कांग्रेस विधायकों व विद्रहियों के समर्थन पत्र के साथ खांडू राज्यपाल से दोपहर में ही मिले.

वक्त जैसे थम गया

दिन की शुरुआत में घटे इस नाटकीय घटनाक्रम में जहां तुकी को फ्लोर टेस्ट के लिए जाना था. जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा अरूणाचल में 15 दिसम्बर 2015 की स्थिति बहाल कर दी जाए. राॅय ने शनिवार को तुकी को बहुमत साबित करने के लिए कहा.

तुकी ने कार्यवाहक राज्यपाल से थोड़ा समय और मांगा. उनका तर्क था कि शनिवार को बहुमत साबित करने का निर्णय बहुत ही जल्दबाजी में लिया गया पूर्णतः निरर्थक फैसला था. तुकी ने 30 दिन में फ्लोर टेस्ट के सरकारिया आयोग की सिफारिशों का हवाला दिया. हालांकि राज्यपाल ने तुकी की यह बात खारिज करते हुए उन्हें शनिवार को ही बहुमत सिद्ध करने के निर्देश दिए.

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मात्र 15 विधायकों के समर्थन के चलते तुकी की मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में थी. इससे कांग्रेस को किसी न किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए कोई समझौता तो करना ही था. बीते बुधवार को तुकी ने कैच न्यूज से कहा था कि वह कांग्रेस के बागियों के भी संपर्क में हैं और उन्हें पार्टी में लौटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी है.

कैच ने पहले ही खबर दी थी कि पार्टी तुकी के समर्थन में बागियों को नहीं मना पाई तो वह किसी और नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाएगी.

कांग्रेस के 2 भाजपा के 0

उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा के लिए यह एक और झटका था, जो कि पुल के भरोसे थी कि वे भाजपा विधायकों की मदद से बागियों को बांधे रखेंगे. ईटानगर में एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा भाजपा ने भी खांडू के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के समर्थन की बात कही थी पर बागी नहीं माने.

कांग्रेस खांडू को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके भाजपा को शह और मात देने में सक्षम थी. सूत्रों ने बताया इसमें राहुल गांधी की बड़ी भूमिका थी. पूर्व में कांग्रेसियों की शिकायत थी कि गांधी तुकी की जगह किसी सर्वमान्य नेता को नहीं ला रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह कांग्रेस की दूसरी विजय है, जिसने भाजपा को एकदम पिछले पांव पर ला दिया है जो कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर की बात करती है.

हालांकि मेघालय और मणिपुर सहित अन्य राज्यें में बागियों के स्वर उठने लगे हैं लेकिन अरूणाचल की घटना से कांग्रेस को सबक लेना होगा, जिसने इस ओर से आंखें पूरी तरह बंद कर रखी थी. कांग्रेस की इस लापरवाही के कारण भाजपा उन राज्यों में जगह बना सकी जो केवल कांग्रेस के गढ़ होते थे.

First published: 18 July 2016, 8:11 IST
 
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