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राफेल के बाद S-400 डील में भी रिलायंस शामिल, गरमा सकती है राजनीति

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2018, 13:27 IST
(file photo )

भारत और रूस के बीच शुक्रवार को एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम समझौता हो गया है. दोनों देशों के बीच साल 2015 से एस-400 को लेकर बातचीत चल रही थी. भारत ने रूस के साथ ये समझौता पांच अरब डॉलर में किया है. रूस के एस-400 मिसाइल डिफेंस को खरीदने के लिए कई देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं. एस-400 को अमेरिका के थाड से अच्छा माना जाता है.

हालांकि दोनों नेताओं ने अपनी साझा प्रेस वार्ता में एस-400 डील को लेकर कोई बयान नहीं दिया. इस डील में अनिल अबानी की कपंनी रिलायंस डिफेंस का नाम भी शामिल बताया जा रहा है. जिसको लेकर भारत में राजनीति गरमा सकती है. रिलायंस का नाम मोदी सरकार के लिए समस्या खड़ी कर सकता है.

मीडिया खबरों के मुताबिक, रूसी कंपनी अल्माज-एंटी रोसोबोरोनक्सपोर्ट  एस-400 की प्रमुख निर्माता कंपनी है. जिसका अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस के साथ भारत में रक्षा उपकरणों के व्यापार को लेकर समझौता है. साल 2015 में पीएम मोदी की मास्को यात्रा के दौरान रिलायंस ने अल्माज-एंटी के साथ समझौता किया था. रिलायंस ने अल्माज-एंटी के साथ  6 अरब डॉलर के संभावित विनिर्माण और रख-रखाव सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. 

दिसंबर 2015 में रिलायंस ने इस समझौते को लेकर एक प्रेस वार्ता की थी. जिसमें जानकारी देते हुए बताया गया था कि  रिलायंस डिफेंस लिमिटेड और रूस की वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम की प्रमुख निर्माता कंपनी अल्माज-एंटी ने संयुक्त रूप से काम करने का फैसला किया है. डीएसी ने एस-400 वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है. इससे रिलायंस को 6 अरब डॉलर के व्यापार का मौका मिला है.

रिलायंस के चेयरमैन अनिल अंबानी ने इस प्रेस वार्ता में कहा था कि इससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को मजबूती मिलेगी. वहीं, अल्माज-एंटी की तरफ से कहा गया था कि रिलायंस के साथ मिलकर हम भारत के सुरक्षा बलों की जरूरतों को पूरा कर नई दिशा देंगे.

आपको बता दें कि एस-400 में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस का नाम आने से मोदी सरकार के लिए समस्या खड़ी हो सकती है. फ्रांस के साथ हुए राफेल समझौते में रिलायंस के नाम को लेकर पहले से ही राजनीति गरमायी हुई है. कांग्रेस सहित विपक्षी दल राफेल सौदे को लेकर पहले ही मोदी सरकार पर हमलावर हैं. अब एस-400 में रिलायंस के नाम को लेकर विपक्ष बड़ा मुद्दा बना सकता है.

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First published: 6 October 2018, 13:27 IST
 
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