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रिसर्च में दावा: बढ़ते प्रदूषण से देश के 48 करोड़ लोगों की 7 साल पहले ही हो जाएगी मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 November 2019, 16:22 IST

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण सबसे खतरनाक स्तर पर है. दिल्ली के आसमानों में प्रदूषण की एक परत छाई हुई है. वहीं रिसर्च में दावा किया गया है कि इसी तरह प्रदूषण रहा तो देश के 48 करोड़ लोगों की सात साल पहले ही मौत हो जाएगी. इसका मतलब यह है कि इतने लोगों की उम्र 7 साल तक कम हो सकती है.

एक वैश्विक अध्ययन में यह बात सामने आई है. शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने सर्वे किया है. इस सर्वे की तरफ से कराए गए अध्ययन के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से देखा जाए तो देश की 40 फीसदी जनसंख्या यानि कि लगभग 48 करोड़ लोगों के जीवन प्रत्याशा में 7 साल की कमी का खतरा मंडरा रहा है.

रिसर्च के मुताबिक, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रदूषण सबसे खतरनाक स्तर पर है. इसके बुरे प्रभाव के कारण इन राज्यों के लोगों की उम्र में कटौती हो सकती है. पिछले 18 सालों में प्रदूषण में 72 फीसदी का इजाफा हुआ है. साल 1998 से अब तक जीवन प्रत्याशा पर खतरा बढ़कर दो गुना हो गया है. इन सात राज्यों में हवा में पीएम 2.5 का स्तर लगभग दोगुना हो चुका है.

रिसर्च के मुताबिक, देश के कई शहरों में तो जीवन प्रत्याशा 10 साल तक कम हो गई है. जिन 14 शहरों में जीवन प्रत्याशा 10 साल तक कम हुई है, उसमें देश की राजधानी दिल्ली का नाम भी शामिल है. इन 14 शहरों में तो 10 शहर उत्तर प्रदेश के हैं.

वहीं, हरियाणा का फरीदाबाद शहर सबसे प्रदूषित हवा वाले शहरों में शुमार है. हालांकि भारत में चल रहे नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम का असर भी अब दिखने लगा है और अगले पांच सालों में इसका और सकारात्मक असर पड़ता दिखाई देगा. इससे देश की हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर कणों का स्तर 20 से 30 फीसदी कम हो जाएगा.

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First published: 1 November 2019, 16:10 IST
 
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