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सवर्ण आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला, करोड़ों बेरोजगार युवाओं को नौकरी कहां से देगी सरकार?

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2019, 14:37 IST

चुनावी मौसम में मोदी सरकार ने सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला सुनाया है. इसे लागू करने के लिए आज सरकार सदन में संविधान संशोधन बिल पेश करेगी. अगर ये आरक्षण लागू हुआ तो देश में कुल आरक्षण का प्रतिशत 59.5 फ़ीसदी हो जाएगा. लेकिन अहम प्रश्न ये है कि मौजूदा समय में देश में सरकारी नौकरियों का क्या हाल है? देश में बेरोजगारी दर को अगर देखा जाए तो केवल पिछले साल यानी 2018 में ही बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी थी. देश में केवल एक साल में ही 1.09 करोड़ रोजगार में कमी आई है.

हर महीने 80 लाख से ज्यादा नौकरियों की जरुरत


आंकड़ों की मानें तो डाटा विश्लेषक फर्म इंडियास्पेंड के अनुसार भारत में 15 साल की उम्र से ज्यादा कामकाजी आबादी में हर महीने 1.3 मिलियन यानी कि 13 लाख की बढ़त हो रही है. इस हिसाब से अगर जोड़ा जाए तो भारत में बेरोजगारी दर को संतुलित करने के लिए हर साल औसतन 80 लाख से अधिक नौकरियों की जरूरत होगी.

देश में महिलाएं छोड़ रही हैं नौकरी

एक अन्य रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि देश में लगातार महिलाएं अपनी नौकरी छोड़ रही हैं. 15 अप्रैल, 2018 को छपी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट, 'जॉबलेस ग्रोथ' के अनुसार महिलाएं लगातार नौकरी छोड़ने के कारण भारत के रोजगार दर में कमी आई है. आंकड़ें देखें तो भारत में साल 2005 से 2015 के बीच यानी 10 साल में भारत में पुरुष रोजगार दर में गिरावट बहुत कम दर्ज की गई हैं लेकिन महिला रोजगार दर में हर साल करीब 5 फीसदी की गिरावट देखी गई है.

क्या है सरकारी नौकरी का आंकड़ा

भारत में अगर बेरोजगारी का आंकड़ा देखा जाए तो 2018 मई में 'इंडियास्पेंड' में छपे एक लेख के अनुसार साल 2017 में देश में बेरोजगारों की संख्या तकरीबन 1.8 करोड़ थी. इन आंकड़ो के हिसाब से देखा जाए तो आगे इस दर में अभी और भी बढ़त होने का आसार हैं. बेरोजगारी की हालत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि साल 2018 में भारतीय रेलवे द्वारा निकाली गई 90,000 नौकरियों के लिए 2.8 से अधिक लोगों ने आवेदन किया था.

यही हाल मुंबई में हुआ था जब केवल 1,137 पुलिस कॉन्स्टेबल को पदों के लिए 200,000 से अधिक आवेदन किए गए थे. इतना ही नहीं आवेदक आवश्यक पात्रता से ज्यादा क्यालिफाईड थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन पदों के लिए आए 423 आवोदनों में आवेदक के पास इंजीनियरिंग में डिग्री थीं. इसी के साथ 167 आवेदक बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर हासिल किए थे जबकि 543 आवेदकों के पास पोस्ट-ग्रेजुएशन था. जानकर हैरानी होगी कि इन पदों के आवेदन करने की जरूरी योग्यता 12 वीं कक्षा पास थी.

2018 में खत्म हुए 1.09 करोड़ रोजगार

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट में ये बताया गया है कि साल 2018 1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां खत्म हो गईं. रिपोर्ट में ये साफ है कि दिसंबर 2017 तक 40.79 लोगों के पास रोजगार था, जो कि केवल एक साल में ही घटकर 39.07 रह गया है.

 

First published: 8 January 2019, 14:37 IST
 
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