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फेरबदल कभी भी, मोदी के मंत्रिमंडल में दिखेगा उत्तर प्रदेश का दबदबा

पाणिनि आनंद | Updated on: 18 June 2016, 13:48 IST
(कैच)

असम चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के 'अच्छे दिन' आ चुके हैं, इसलिए पार्टी और प्रधानमंत्री वे सभी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं, जिनके लिए वे एक अच्छे अवसर का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है और अब बारी है कैबिनेट में फेरबदल की.

यह ऐसा मामला है जिसके कयास पिछले कुछ महीनों में अनेक बार लगाए गए हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी इस संबंध में दिए गए सभी समाचारों को गलत साबित करने का मजा लेते रहे. लेकिन सूत्रों का दावा है कि अब वह समय आ गया है और मंत्रिमंडल में फेरबदल बहुत जल्द किया जाएगा. मंत्रिमंडल में फेरबदल पर किसी कैबिनेट सहयोगी को इनाम या सजा की तुलना में राजनीतिक प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा.

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सूत्रों का कहना है कि मोदी ऊपरी परत को ज्यों का त्यों रखते हुए मंत्रिमंडल में दूसरी और तीसरी पंक्ति में परिवर्तन कर सकते हैं. ऐसा यह संदेश देने के लिए किया जाएगा कि सरकार के मंत्रियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और किसी को भी दंडित करने की कोई जरूरत नहीं है. दूसरी तरफ, शीर्ष मंत्रियों को न हटाना उन्हें मोदी के प्रति और अधिक समर्पित कर देगा और प्रधानमंत्री अधिक स्वतंत्रता और आराम से अपना काम कर पाएंगे.

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इलाहाबाद में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद परिवर्तन रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में ही इस बात का उल्लेख किया है कि उनके मंत्रिमंडल पर उत्तर प्रदेश का दबदबा है. इसका मकसद लोगों को यह बताना था कि उनके लिए अन्य की तुलना में उत्तर प्रदेश अधिक मायने रखता है और मोदी अब इस संदेश को और आगे तक पहुंचाने जा रहे हैं.

मंत्रिमंडल के फेरबदल पर उत्तर प्रदेश हावी होने जा रहा है. राज्य से कई चेहरे हैं जो मोदी की टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. राज्य से कुछ मौजूदा मंत्रियों का कद ऊंचा हो जाएगा. कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल कर लिया जाएगा. ऐसा करने के पीछे शुद्ध राजनीतिक कारण है और यह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति के अनुरूप होगा.

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संजीव बालियान और महेश शर्मा जैसे चेहरों को प्रमोशन मिल सकता है. दोनों ने हाल के वर्षों में अपनी कट्टर हिंदुत्व वाली लाइन के कारण काफी लोकप्रियता हासिल की है. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर से सांसद हैं और कथित तौर पर मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भी हैं. महेश शर्मा ने द्वेषपूर्ण भाषणों और दादरी एवं आसपास के इलाकों में कट्टर हिंदुत्व के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई है.

वे दोनों इस समय भी टीम मोदी में हैं. पदोन्नति के बाद वे और अधिक आक्रामक, आत्मविश्वासी हो जाएंगे और समर्थकों के बीच अधिक लोकप्रिय होने का पुरस्कार पाएंगे. इससे वे कट्टर हिंदुत्व और मोदी के इर्द-गिर्द गढ़े गए नारों से चुनाव प्रचार को चरम पर ले जाएंगे.

रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का कद भी ऊंचा हो सकता है. पार्टी के लिए यह जरूरी है कि वह भूमिहारों को महसूस कराए कि भाजपा उनकी पक्षधर है, विशेषकर राज्य में पार्टी अध्यक्ष के रूप में मनोज सिन्हा का नाम आखिरी वक्त में हटाने के बाद यह और महत्वपूर्ण है.

गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ को भी मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है

एक और नेता एवं राज्य के ओबीसी चेहरा संतोष गंगवार हैं, जो कुछ मंत्रालयों के राज्यमंत्री हैं. उन्हें भी मोदी की कैबिनेट में जगह मिल सकती है.

सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कदमों में से एक है मिर्जापुर से अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल को मोदी की कैबिनेट में लाना. अनुप्रिया ने 2014 के चुनाव में भाजपा का समर्थन किया था. उनके समुदाय की राज्य के पूर्वांचल में महत्वपूर्ण उपस्थि​ति है. यह विशेषकर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नीतीश कुमार और बेनी प्रसाद कुर्मी वोट को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अनुप्रिया को पदोन्नति देना मोदी का समर्थन करने के लिए उनके समुदाय के लिए एक और आकर्षक बहाना होगा.

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गोरखपुर से भाजपा सांसद आदित्यनाथ भी उन नए चेहरों में शामिल हैं, जिनको मोदी की टीम में जगह मिल सकती है. आदित्यनाथ पूर्वांचल से एक और राजपूत चेहरा हैं. यह वह क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधित्व मोदी के मंत्रिमंडल में गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा किया जाता है.

आदित्यनाथ को अब तक मोदी की ओर से कुछ भी नहीं मिला है और वे क्षेत्र में, विशेषकर राजपूतों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. आदित्यनाथ के समर्थक पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से उनको राज्य के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करते आ रहे हैं. एक बार फिर वही राग जोरों पर है. आदित्यनाथ को कैबिनेट में लेने से वे काबू में रहेंगे और उनके समर्थक चुप हो जाएंगे. ऐसी संभावना कम ही है कि वे पार्टी के खिलाफ जाएंगे या आगामी चुनाव में मदद नहीं करेंगे.

कतार में और भी

पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय सहस्त्रबुद्धे के बारे में भी चर्चा है कि वे नए मंत्रियों की सूची में हो सकते हैं. वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और मोदी सरकार के कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी उनके पास रही है.

मुख्तार अब्बास नकवी को भी पदोन्नति दिए जाने की संभावना है. वे वर्तमान में संसदीय मामलों के राज्यमंत्री हैं. लेकिन विनय सांपला, जिन्हें पंजाब का प्रभार दिया गया है, उन चेहरों में हो सकते हैं जिन्हें हटा दिया जाएगा. अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला के बारे में भी ऐसा ही अनुमान लगाया जा रहा है.

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आने वाले चुनावों के लिए कैबिनेट फेरबदल में पार्टी नेतृत्व की ओर से सही जातिगत संतुलन प्रतिबिंबित होना जरूरी है. साथ ही आगामी चुनावों को देखते हुए यह संदेश देना भी जरूरी है कि मोदी की टीम में उत्तर प्रदेश का दबदबा है.

सूत्रों ने बताया, "यह पार्टी और नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण चुनाव है और अब समय आ गया है कि मतदाताओं को 'एक मजबूत उत्तर प्रदेश' का संदेश दिया जाए. ऐसी संभावना कम ही है कि किसी बड़े नाम को मंत्रिमंडल से हटाया जाएगा. सुषमा और जेटली के बारे में रिपोर्ट गलत हैं. हालांकि, मोदी के दिमाग में क्या है, कुछ नहीं कहा जा सकता."

First published: 18 June 2016, 13:48 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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