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बालाकोट एयर स्ट्राइक पर रॉयटर्स का बड़ा खुलासा- जैश का मदरसा अब भी वहीं खड़ा है

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2019, 13:29 IST
Reuters

अंतराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि बालाकोट में भारतीय वायुसेना के हमले में जिस जैश-ए-मोहम्मद के मदरसे के नष्ट होने की बात कही जा रही है, वह अभी वहीं खड़ा है. रॉयटर्स के अनुसार हाई-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि उत्तरपूर्वी पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) द्वारा संचालित एक धार्मिक स्कूल भारतीय वायु सेना द्वारा दावा किए जाने के कुछ दिनों बाद भी दिखाई दे रहा है, जहां उसके युद्धक विमानों ने हमला किया था.

सैन फ्रांसिस्को स्थित एक निजी उपग्रह ऑपरेटर प्लैनेट लैब्स इंक इस घटना के छह दिन बाद यानी 4 मार्च को मदरसा साइट पर कम से कम छह इमारतों को दिखा रहा है. अब तक कोई भी हाई-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह चित्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थे. लेकिन प्लैनेट लैब्स की इमेज इस डिटेल्स को 72 सेंटीमीटर छोटे रूप में दिखाती हैं. यह उन स्ट्रक्चर को स्पष्ट रूप से दिखाती है जिन पर हमला करने की बात कही जा रही है. ये इमेज अप्रेल 2018 को ली गई उपग्रह तस्वीर से अपरिवर्तित है.

रिपोर्ट के अनुसार इमारतों की छतों में कोई भी छेद नहीं है, जबकि मदरसे के आसपास उखड़े पेड़ या हवाई हमले के अन्य संकेत हैं. रिपोर्ट के अनुसार विदेश और रक्षा मंत्रालयों ने ईमेल से भेजे सवालों के जवाब नहीं दिए, जो उपग्रह चित्रों में दिखाए गए हैं.

मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में ईस्ट एशिया नॉनप्रोलिफरेशन प्रोजेक्ट के निदेशक जेफरी लेविस, जिनके पास हथियारों की साइटों और प्रणालियों के उपग्रह चित्रों का विश्लेषण करने में 15 साल का अनुभव है, ने पुष्टि की कि हाई-रिज़ॉल्यूशन के उपग्रह चित्र में स्ट्रक्चर को दिखाया गया है.

उन्होंने कहा "उच्च-रिज़ॉल्यूशन की छवियां बम क्षति का कोई सबूत नहीं दिखाती हैं," लुईस ने रायटर्स को प्रदान की गई छवि के कुछ घंटों के भीतर साइट के तीन अन्य उच्च-रिज़ॉल्यूशन प्लैनेट लैब्स की तस्वीरें देखीं. हालांकि सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस बात का खुलासा नहीं किया है कि स्ट्राइक में किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया था, सूत्रों ने पिछले हफ्ते रायटर को बताया था कि 1,000 किलोग्राम बम ले जाने वाले 12 मिराज 2000 जेट विमानों ने हमले को अंजाम दिया.

मंगलवार को एक रक्षा अधिकारी ने कहा कि इस विमान ने स्ट्राइक में 2,000-lb इजरायल निर्मित SPICE 2000 ग्लाइड बम का इस्तेमाल किया था. जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के एक वरिष्ठ शोध सहयोगी लुईस और डेव श्मलर ने उपग्रह चित्रों का विश्लेषण भी किया है, जिसमें कहा गया है कि बड़े से चित्र में दिखाई देने वाले स्ट्रक्चर को स्पष्ट नुकसान होगा.

भारतीय सेना की प्रेस विंग के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने रायटर को दिए एक बयान में कहा, "भारतीय घुसपैठ के परिणामस्वरूप किसी भी बुनियादी ढांचे या किसी की जान को कोई नुकसान नहीं हुआ है."

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First published: 6 March 2019, 13:07 IST
 
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