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जान दांव पर लगाकर एफएसएसएआई ने दी अखाद्य पदार्थों को अनुमति

सुहास मुंशी | Updated on: 2 June 2016, 23:18 IST
एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के 84 ब्रेड सैम्पल में हानिकारक ब्रोमेट और पोटेशियम आयोडेट पाए गए

डा. गोपाल कृष्ण, निदेशक, टॉक्सिस वॉच के अनुसार 'इस तरह बिना स्वास्थ्य पर प्रभाव के जांच-पड़ताल के सूची स्वीकृत कर देना बहुत ही अवैज्ञानिक है. ताजा खुलासे के बाद इन यौगिकों के स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव के बारे में जांच करवानी चाहिए और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए इस लिस्ट पर रोक लगनी चाहिए.

23 दिसम्बर, 2015 को एफएसएसएआई ने अपनी वेबसाइट पर जनता की जानकारी के लिए एक सूची जारी की. विडंबना यह है कि एफएसएसएआई ने यौगिकों की सूची तो जारी कर दी लेकिन उनके अधिकतम उपयोग के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. ऐसे यौगिकों के लिए उसमें केवल 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) शब्दों का प्रयोग किया गया है. जीएमपी का मतलब है कि भोजन में ऐसे यौगिकों की न्यूनतम मात्रा जो किसी भोज्य पदार्थ के साथ जुड़कर अपना प्रभाव दिखाए.

इसके अनुसार नियामक खाद्य प्रसंस्करणों से ऐसे यौगिकों की मात्रा न्यूनतम स्तर तक घटाने के लिए भी कह सकता है. दूसरे शब्दों में नियामक ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को हमारे खाद्य पदार्थों में संभावित खतरनाक केमिकल्स मिलाने की छूट दे दी है यह उम्मीद करते हुए कि वे इसका अतिशय उपयोग नहीं करेंगे.

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14 जनवरी को एफएसएसएआई ने यौगिकों की सूची स्वीकृत की. विभागीय पत्राचार के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों को विभिन्न खाद्य पदार्थों में उपरोक्त सूची के अनुसार खाद्य यौगिकों की मात्रा सुनिश्चित करने को कहा है.

अगले दिन खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब जब प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल कर दिया है, जिन खाद्य पदार्थों में एफएसएसएआई द्वारा स्वीकृत सामग्री काम में ली जाती है उनको अब और स्वीकृति की कोई जरुरत नहीं होगी. इससे पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा मिलेगा, नए प्रोडक्ट लांच होंगे और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा.

मंत्री ने साथ ही जोड़ा कि जहां तक उद्योग की बात है नए नियमों से बड़े पैमानें पर खाद्य उत्पादों को स्वीकृति मिलेगी और मैं आशा करती हूं कि आने वाले महीनों में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विदेशी निवेश बढ़कर 25 प्रतिशत तक हो जाएगी. किंतु मंत्री ने यह नहीं बताया कि एफएसएसएआई ने जिन यौगिकों को स्वीकृत किया है वे नुकसानदेह हैं. यहां हम ऐसे 10 केमिकल्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं:

First published: 2 June 2016, 23:18 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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