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कौमी एकता दल के 'आयाराम-गयाराम' प्रकरण से मुलायम कुनबे की दरार चौड़ी हो गई है

अतुल चंद्रा | Updated on: 28 June 2016, 10:32 IST
QUICK PILL
  • अखिलेश यादव ने सोमवार को कैबिनेट में फेरबदल करते हुए चार दिन पहले निकाले गए मंत्री बलराम यादव को फिर से मंत्री बना दिया. इस कार्यक्रम से उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव नदारद रहे.
  • कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. उनकी शह पर ही शिवपाल ने अफजाल अंसारी का स्वागत किया.
  • मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह फैसला रास नहीं आया और उन्होंने तत्काल प्रभाव से बलराम यादव को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया.

सोमवार को अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और इस दौरान किसी की भी नजर उनके मंत्रिमंडल में शामिल नए मंत्रियों पर न होकर शिवपाल सिंह को खोज रही थीं, जो राजभवन से नदारद थे.

आधिकारिक तौर पर शिवपाल इटावा में थे. राज्यसभा के सांसद सदस्य राम गोपाल यादव ने शिवपाल की गैरमौजूदगी की खबर को कमतर बताते हुए कहा, 'अगर कोई अमेरिका में है और वह समारोह में शामिल नहीं हो पाया तो इसका यह मतलब नहीं निकलता है कि उसने समारोह का बहिष्कार कर डाला? पार्टी में कोई मतभेद नहीं है. मीडिया में आई खबरें गलत हैं.'

शिवपाल सिंह के दोस्त अमर सिंह ने इस मौके पर उनकी गैरमौजूदगी की खबर को छोटी बात बताते हुए कहा, 'मैं शिवपाल हूं.' सपा परिवार में इस कलह की शुरुआत पिछले हफ्ते शुरू हुई जब कौमी एकता दल के सपा में विलय की घोषणा हुई. कौमी एकता दल में दो विधायक अफजाल अंसारी और उसके भाई मुख्तार अंसारी शामिल हैं. अफजाल इस पार्टी के प्रेसिडेंट हैं.

कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. उनकी शह पर ही शिवपाल सिंह ने अफजाल अंसारी का स्वागत किया. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह फैसला रास नहीं आया. और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बयान देते हुए कहा, 'मुख्तार अंसारी का पार्टी में स्वागत नहीं किया जाएगा.' उन्होंने कहा, 'हम ऐसे लोगों को पार्टी में नहीं चाहते हैं.'

यादव ने इस मामले में गुस्सा निकालते हुए बलराम यादव को अपने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया. बाद में जब मीडिया में शिवपाल सिंह और अखिलेश यादव के बीच बढ़ते मतभेद की खबरें आने लगीं तो मुलायम सिंह ने मामले में दखल दी.

बाद में इस का फैसला केंद्रीय संसदीय बोर्ड पर छोड़ दिया गया. अखिलेश यादव कौमी एकता दल के विलय का पुरजोर विरोध कर रहे थे, इसलिए केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने इस विलय को रद्द करने का फैसला लिया. हालांकि इसके बाद स्थिति बनने की बजाए और अधिक बिगड़ गई.

अखिलेश यादव कौमी एकता दल के विलय का पुरजोर विरोध कर रहे थे

कौमी एकता दल के एक सदस्य ने बताया कि विलय का अखिलेश यादव से कोई लेना देना नहीं था क्योंकि मुलायम सिंह ने अफजाल को अपनी पार्टी का विलय सपा में करने के लिए कहा था. राज्यसभा के चुनाव में कौमी एकता दल के सदस्यों ने सपा के उम्मीदवारों के लिए वोट किया था और इसके बाद ही विलय की कवायद शुरू हुई थी.

शपथ ग्रहण समारोह में शिवपाल सिंह की गैर मौजूदगी बताती है कि सपा परिवार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. एक तरफ तो मुलायम, अखिलेश और राम गोपाल यादव हैं तो दूसरी तरफ शिवपाल सिंह और अमर सिंह शामिल हैं. 

समाजवादी पार्टी के संस्थापक आजम खान को अखिलेश यादव के शिविर में शामिल माना जा सकता है क्योंकि वह अमर सिंह को पसंद नहीं करते हैं. अमर सिंह को अंबानी और बच्चन परिवार में दरार पैदा करने वाला माना जाता है.

सपा परिवार में पिछले साल दिसंबर में ही दरार दिखने लगी थी जब अखिलेश यादव के दो वफादारों सुनील यादव और आनंद भदौरिया को पार्टी विरोधी गतिविधि की वजह से बाहर निकाल दिया गया. इस निष्काषन के पीछे शिवपाल यादव को बताया गया था. नाराज अखिलेश यादव ने इसके बदले में सैफई महोत्सव का बहिष्कार कर दिया. जब इन दोनों नेताओं को पार्टी में वापस लाने का फैसला लिया गया तब जाकर अखिलेश यादव ने सैफई जाने का फैसला लिया.

इसके बाद चाचा और भतीजा के बीच संघर्ष होना तय हो गया था. राज्य के मुख्य सचिव आलोक रंजन 30 जून को रिटायर हो रहे हैं और एक अति भ्रष्ट अधिकारी को उनकी जगह बिठाने की तैयारी चल रही है, जो शिवपाल सिंह के करीबी हैं.

मुख्यमंत्री इस अधिकारी को लेकर तैयार नहीं हैं और वह अपनी पसंद के अधिकारी को लाने की कोशिश कर रहे हैं. 

साथ ही अखिलेश यादव खुद को विकासवादी चेहरे के रूप में आगे रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी समझ लें तो फिर उन्हें किसी के साथ गठबंधन करने की जरूरत नहीं होगी.

पार्टी के वरिष्ठ नेता किसी से भी मदद लेने को तैयार हैं. चाहे वह आपराधिक पृष्ठभूमि का ही क्यों नहीं हो. लेकिन यह रणनीति अखिलेश यादव को पसंद नहीं है. पार्टी इस बार भी अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ेगी.

कैबिनेट में हुए बदलाव के बाद बलराम यादव को फिर से मंत्री बना दिया गया है

बलराम यादव अब कैबिनेट में वापस आ चुके हैं. इसके साथ ही मुलायम के भरोसेमंद नारद राय भी कैबिनेट में आए हैं. लखनऊ से दो विधायक रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रताप शुक्ला को भी मंत्री बनाया गया है. 

शिवपपाल की गैर मौजूदगी के अलावा साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर मनोज कुमार पांडेय को हटाया जाना भी चर्चा में रहा. कुछ दिनों पहले पांडेय ने मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बड़े यज्ञ का आयोजन किया था. 

First published: 28 June 2016, 10:32 IST
 
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