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जॉबलेस विकास: पांच साल में बेरोज़गारी रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंची

नीरज ठाकुर | Updated on: 9 October 2016, 7:54 IST
QUICK PILL
  • भारत विश्व में कुछेक सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. विश्वभर में भारत की छवि चमक रही है. ऐसा अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष का दावा है.
  • मगर एक तथ्य यह भी है कि भारत में बेरोजगारी दर 2015-16 में 5 प्रतिशत पर जा पहुंची, जो पिछले पांच साल में सर्वोच्च स्तर पर है.

विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला यह देश आज वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, पर यह अर्थव्यवस्था अपने ही लोगों के लिए नौकरियां उपलब्ध करा पाने में समर्थ नहीं है. 2016 में अलग-अलग स्रोतों से जुटाए गए आंकड़े कम से कम यही कहते हैं.

स्पष्ट और मौजूदा खतरा

विश्व बैंक के एक शोध में पूर्वानुमान लगाया गया है कि ऑटोमेशन यानी मशीनों के बढ़ते उपयोग से भारत में 69 प्रतिशत तक रोजगार को खतरा है. चीन में यह खतरा 77 प्रतिशत तक है. ऑटोमेशन से बड़े पैमाने पर रोजगार जा सकते हैं. हर दिन हजारों लोगों के सामने रोबोट, मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी के चलते नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है, हाथ से किए जाने वाले काम समाप्त हुए हैं.

यहां तक कि, बैंकिंग सेक्टर भी, जो पिछले कई दशकों से युवाओं को क्लर्कीकल जॉब उपलब्ध कराता चला आ रहा है, उसने भी ऑटोमेशन की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं. बैंकों का जो स्टॉफ, वर्तमान में बैंकिंग ऑपेशन से जुड़ा हुआ है, उस स्टॉफ को भी हटाने की जरूरत समझी जा रही है.

हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक खबर छापी है कि आईसीआईसीआई बैंक भारत के सबसे बड़े निजी बैंकों में पहला और दुनिया के चुनिन्दा बैंकों में से एक है जिसने 'सॉफ्टवेयर रोबोटिक्स' की तैनाती की है, जिससे कई मानवीय कार्य स्वचालित हो जाएंगे. ये सॉफ्टवेयर बैंकिंग से जुड़ी 200 से ज्यादा प्रक्रियाओं को निपटाएगा.

बैंक का कहना है कि जल्द ही वित्त वर्ष के अंत तक सॉफ्टवेयर रोबोट की संख्या दोगुनी हो जाएगी जिसके बाद 500 से ज्यादा बैंकिंग प्रक्रियाएं निबटाई जा सकेंगी. इससे बैंक की उत्पादकता और कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होगी. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर भी रोबोट का पहले से ही बड़ा उपयोग कर रहा है जिसके चलते अधिकांश काम बिना मानव श्रम के ही किए जा सकते हैं.

भारत इस हालात का कैसे सामना करे?

रोबोट, मशीनीकरण का खतरा केवल विशेषकर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं है, वरन यह खतरा पूरे विश्व में मंडरा रहा है. रोबोट के चलते लोगों के रोजगार खत्म हो रहे हैं. इसकी वजह है कि रोबोट सौंपे गए अपने काम को तत्परता और दक्षता से कम लागत में बखूबी अंजाम दे देता है.

सवाल है कि क्या भारत जैसे देश में, जहां उसकी विशालकाय आबादी है, रोबोट या ऑटोमेशन के चलते रोजगार का खतरा है? पूरे संसार में ऐसा कोई देश नहीं है जहां हर माह 10 लाख लोगों की आबादी वर्कफोर्स में शामिल हो जाती हो. यह स्थिति कम से कम वर्ष 2030 तक लगातार बनी ही रहेगी. वर्कफोर्स को काम मिले, इसके लिए रोजगार के साधन उत्पन्न करने के बजाए ऑटोमेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

आज जो लोग काम पर हैं, उन पर भी तलवार लटक रही है. विश्व की तुलना में भारत में युवाओं की आबादी सबसे ज्यादा है. कुछ सालों पहले तक यह सोचा जाता था कि भारत को उसके युवाओं का लाभ मिलेगा, पर अब लगने लगा है कि कहीं यह सामाजिक अशांति में न तब्दील हो जाए.

कोई भी सरकार इस समस्या की तरफ आंख बन्द करके नहीं रह सकती. लेकिन क्या कोई सरकार श्रम बाजार में मशीनों को आने से रोक सकती है? दुर्भाग्य से, यह सम्भव नहीं है. हालांकि, भारत सरकार को इस मुद्दे को गम्भीरता से लेना चाहिए और ऐसा कार्यबल गठित करने चाहिए जो देश में बढ़ती बेरोजगारी का हर सम्भव समाधान निकाल सके.

पश्चिमी देशों से सबक सीखें

पश्चिमी संसार के अर्थशास्त्रियों ने यूनीवर्सल न्यूनतम मजदूरी पर चर्चाएं, विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है. इस योजना में बेरोजगार युवकों को गारंटी के साथ निश्चित राशि दी जाएगी, इस राशि के मिलने से वे आर्थिक गतिविधियों में खुद की भागीदारी निभाने में समर्थ हो सकेंगे. वे अपनी जरूरत भी पूरी कर सकेंगे जिससे अर्थव्यवस्था में उनका योगदान भी मिलेगा. न्यूनतम मजदूरी मिलने से सामाजिक अशांति फैलने की सम्भावना भी कम रहेगी.

हालांकि, भारत जैसे देश में जहां जीडीपी में टैक्स का अनुपात 17 फीसदी के लगभग है, वहां उसके वर्कफोर्स को न्यूनतम मजदूरी देने के बारे में सोचा तक नहीं जा सकता. सरकार का समय निकलता जा रहा है. जीडीपी के आंकड़ों से परे जाकर देखने की जरूरत है. विशालकाय बेराजगारी का समाधान तलाशे जाने की जरूरत है.

सरकार को रोजगार बढ़ाने के लक्ष्य को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखना होगा. बेरोजगार लोगों की बढ़ती संख्या को जानबूझकर नकारने की प्रवृत्ति से राष्ट्र को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, वह भी तब भारत सुपर पावर बनने की दिशा में बढ़ रहा है.

First published: 9 October 2016, 7:54 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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