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ऋत्विका पर निर्भर हैं 100 से अधिक सांसद

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 March 2016, 17:43 IST

ऋत्‍विका भट्टाचार्य सौ से ज्यादा सांसदों के कामकाज पर बारीक नजर रखती हैं. इनमें मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी, हीना गावित, कमलनाथ, दिनेश त्रिवेदी और पूनम महाजन जैसे सांसद शामिल हैं.

अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुकी ऋत्‍विका सामाजिक क्षेत्र में आने से पहले विश्व बैंक में काम कर चुकी हैं.

कौन हैं ऋत्‍विका भट्टाचार्य


केरल की रहने वाली ऋत्‍विका भट्टाचार्य के पिता रंजन भट्टाचार्य भी केरल में राजनेता हैं. ऋत्‍विका जब महज 12 साल की थीं तो उनके पिता ने कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी से कहा कि कहा कि ऋत्‍विका भी नेताओं के साथ काम करना चाहती हैं. पिता के इस बात को सुनकर मनीष तिवारी ने कहा कि ऋत्‍विका पहले पढ़ाई करले, उसके बाद राजनीतिक क्षेत्र में काम करे.

आज ऋत्‍विका भट्टाचार्य सौ से ज्‍यादा सांसदों के विकास कार्यों को देख रही हैं. बंगाली परिवार में जन्मीं और दिल्ली में पली-बढ़ी ऋत्‍विका ने अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा पाई है. हार्वर्ड के दिनों में भी उन्होंने अमेरिकी सीनेटर कैथरीन हैरिस के विकास कार्यों में भाग लिया.

हार्वर्ड से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विश्व बैंक में भी काम किया. साल 2009 में 22 साल की ऋत्‍विका ने स्वनीति नाम से एक एनजीओ शुरू किया. यह एनजीओ सांसदों को विकास कार्यों की पहचान करने में मदद करता है. इसके अलावा ये संगठन सांसदों को यह भी सूचना देता था कि उनके द्वारा शुरू किये गये विकास कार्यों की जमीन पर क्या स्थिति है.

ऋत्‍विका ने सबसे पहले यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहे दिनेश त्रिवेदी के संसदीय क्षेत्र बैरकपुर में जूट मिलों में मजदूरों की सांस की तकलीफों से सांसद महोदय को अवगत कराया. इसके बाद त्रिवेदी ने उन मजदूरों की भलाई के लिए कई कदम उठाए. उन मजदूरों की देखभाल का जिम्मा पहले तो जिला प्रशासन ने ले रखा था, लेकिन बाद में उसकी जिम्मेदारी ऋत्‍विका को दे दी गई. जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया. 

ऋत्‍विका ने इसी तरह के कई अलग-अलग कार्य किये हैं. इन कामों के लिए उन्‍होंने दो अलग-अलग टूल भी बना रखे हैं. इनमें से एक का नाम है 'ताम्रपत्र' और दूसरे का 'जिज्ञासा'. एनजीओ स्वनीति का 'ताम्रपत्र' सभी सरकारी स्कीमों का डेटाबेस है.

इसे कोई भी सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में इस्‍तेमाल में ले सकता है. इसको लगातार अपडेट किया जाता है. इसके बाद नाम आता है 'जिज्ञासा' का. ये अलग-अलग राजनीतिक दलों के कार्यों का लेखा-जोखा रखता है.

First published: 21 March 2016, 17:43 IST
 
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