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बेटी के अबॉर्शन के लिए RJ नावेद ने किया डॉक्टर को कॉल, उसके बाद जो हुआ जानकर दंग रह जाएंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 February 2018, 10:22 IST

आर जे नावेद हमेशा से अपने हसीं-मजाक के ऑडियो के लिए मशहूर है. रेडियो मिर्ची चैनल पर अपने 'मुर्गा' शो के लिए मशहूर रेडियो जॉकी नावेद कई बार सोशल एक्सपेरिमेंट भी करते रहते हैं. मजाक-मजाक में कई बार वो कुछ सीरियस सन्देश भी देते रहते हैं. अपने इसी अंदाज के लिए अपने फैन्स के बीच काफी पसंद किये जाते हैं.

हाल ही में 8 महीने कि एक बच्ची के साथ हुए रेप कि घिनौनी घटना पर नावेद ने अपना गुस्सा दिखाया. नावेद ने एक लेडी डॉक्टर को फेक कॉल करके बोला कि वो अपनी बीवी का एबॉर्शन करना चाहता है. डॉक्टर के कारण पूछने पर नावेद ने कहा कि वो 'बेटी' है. ये सुनते ही डॉक्टर भड़क गयी. पर उसके आगे जो हुआ वो सुन कर आप भी हैरान रह जायेंगे.

 

डॉक्टर ने कहा कि आजकल लोग बेटी नहीं चाहते इसीलिए एबॉर्शन करवाते हैं, तुम्हे भी बेटा ही चाहिए होगा. इसीलिए अपनी बेटी को पैदा होने से पहले मार देना चाहते हो. इस पर नावेद ने जो जवाब दिया उसे सुन डॉक्टर भी खामोश हो गयी.

नावेद ने कहा में 'बेटी' ही चाहता हूं, पर मैं उसे जन्म इसलिए नही देना चाहता "क्यूंकि उसका रेप हो जाएगा."

 

नावेद ने बाद में कहा, "मुझे समझ नही आता कि जो लोग "बेटी पढाओ, बेटी बचाओ" स्लोगन सुन कर खुश होते हैं. वो ये क्यों नही कहते कि बेटे को संभालो और न माने तो थप्पड़ लगाओ.  नावेद ने कहा कि हम लोग जब ये कहते हैं कि बेटी पढाओ, तो इसका मतलब है कि बेटियां अनपढ़ है. "बेटी बचाओ" यानी बेटियां बहुत कमजोर हैं. और उन्हें हमेशा से किसी सहारे कि जरुरत है.


और जब ये कहा जाता है कि बेटियां किसी से कम नहीं तो दरअसल हम कह रहे होते हैं कि उन्हें बराबरी करने के लिए बहुत कुछ करना है अभी. नावेद ने पिछली हुई घटना का हवाला देते हुए कहा की जो लोग ये कहते हैं कि लड़कियां रात को घर से बाहर निकलती हैं तो रेप होता है, उनके मुंह पर ये तमाचा है कि कैसे 8 महीने कि एक बच्ची को उसके ही रिश्तेदार ने उसके घर के अंदर अपनी हवस का शिकार बनाया.

सांप्रदायिक दंगो पर भी साधा निशाना 

साथ ही साथ साम्प्रदायिकता के बल पर हो रहे खून खराबे को निशाना बनाते हुए नावेद ने कहा कि ये जो हिन्दू मुस्लिम धर्म के नाम पर जुलूस निकाल कर एक दुसरे को मारने पर आमादा है. वो इतनी ही भीड़ लेकर ऐसे घिनौने लोगों के खिलाफ क्यों नही आवाज़ उठाते? 

जिस तरह से आज कल लोग धर्म, जाति, छद्म सम्मान के लिए मार पीट और जुलुस निकाल कर उन्माद फैला रहे हैं, वो सब देश में लड़किओं के साथ हो रही इन घटनाओं के खिलाफ खड़े हो जायें तो लड़कियों को रेप के डर से घर में दुबकने कि सलाह न दी जाएं. वो भी अपनी मर्जी से अपने काम का वक्त तय कर सकें न कि दिन और रात के हिसाब से.

First published: 3 February 2018, 9:58 IST
 
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