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मौर्य के बाद आरके चौधरी ने भी छोड़ा मायावती का साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 16:14 IST
(फेसबुक)

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती को एक और झटका लगा है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ बसपा नेता आरके चौधरी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

इससे पहले इसी महीने स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने भी मायावती पर टिकटों की नीलामी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी. आरके चौधरी बीएसपी में महासचिव के पद पर थे.

इस्तीफा देते हुए चौधरी ने पार्टी सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया. चौधरी ने कहा कि वे आगामी 11 जुलाई को सियासी भविष्य को लेकर रणनीति तय करेंगे.

टिकट न मिलने पर नाराज!

आरके चौधरी की गिनती बीएसपी के दिग्गज नेताओं में होती है. सूत्रों की मानें तो चौधरी लखनऊ की मोहनलाल गंज सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन बीएसपी सुप्रीमो ने यहां से किसी और को प्रत्याशी घोषित कर दिया था.

पार्टी छोड़ने के पीछे इसे ही जिम्मेदार माना जा रहा है. स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद आरके चौधरी का पार्टी  छोड़ना मायावती के लिए शुभ संकेत नहीं है.

टिकट बेचने का लगाया आरोप

यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता और पार्टी महासचिव स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने भी बीएसपी प्रमुख मायावती पर इसी तरह के आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी.

बसपा छोड़ने के बाद आरके चौधरी ने आरोप लगाया कि मायावती ने पार्टी को अपनी जागीर बना लिया है. प्रॉपर्टी डीलर और भूमाफिया पार्टी में बढ़ते जा रहे हैं, जबकि मिशनरी कार्यकर्ता बाहर.

मायावती पर धन उगाही का आरोप लगाते हुए चौधरी ने कहा, "बसपा छोड़ने वालों का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है. मायावती पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर जमकर लूट-खसोट करती हैं. बीएसपी अब रियल एस्टेट कंपनी बनकर रह गई है."  

कांशीराम के पुराने सहयोगी

आरके चौधरी ने साथ ही कहा, "बीएसपी अब वो पार्टी नहीं रही जो पहले कांशीराम के जमाने में थी." इससे पहले 22 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी मायावती पर अंबेडकर के सपनों को बेचने का आरोप लगाया था. 

आरके चौधरी बीएसपी के शासनकाल में मंत्री भी रह चुके हैं. यही नहीं आरके चौधरी पार्टी के संस्थापक कांशीराम के पुराने साथी रहे हैं. कांशीराम के साथ मिलकर बसपा की नींव रखने में आरके चौधरी का अहम योगदान रहा है. 

बीएस-4 के भी संस्थापक

बसपा की स्थापना से पहले दलित समाज को जागरूक करने के अभियान में वे कांशीराम के साथ थे. 2001 में उन्हें पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

कांशीराम के डीएस-4 (दलित शोषित समाज संघर्ष समिति) की तर्ज पर आरके चौधरी ने बीएस-4 (बहुजन समाज स्वाभिमान संघर्ष समिति) का गठन किया था. बाद में वह फिर से बसपा में शामिल हो गए थे.

First published: 30 June 2016, 16:14 IST
 
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