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पचौरी के टेरी लौटने की राह में नई अड़चन

निहार गोखले | Updated on: 11 February 2016, 16:07 IST
QUICK PILL
  • टेरी के महानिदेशक रहे राजेंद्र पचौरी के खिलाफ अब एक और महिला ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है. इससे पहले एक अन्य महिला ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और इस मामले में अभी तक पुलिस ने आरोप पत्र दायर नहीं किया है.
  • पहली शिकायत के मामले में पचौरी को आईपीसीसी के डीजी पद से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि इस मामले में कोई फैसला आने से पहले टेरी की गवर्निंग बॉडी ने पचौरी को एग्जिक्यूटिव चेयरमैन बनाने का फैसला लिया. 

76 वर्षीय राजेंद्र के पचौरी 10 फरवरी 2016 को निश्चित तौर पर अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दिन के तौर पर याद करते होंगे. ऐसा क्यों? इसे समझने के लिए हमें पिछले एक साल के दौरान हुए घटनाक्रमों को समझना होगा. 

पचौरी को पिछले साल फरवरी महीने में यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना करना पड़ा. वह पिछले 30 सालों से अधिक समय से टेरी के महानिदेशक रहे हैं. जब टेरी की महिला कर्मचारी के शिकायत सार्वजनिक हुई तो पचौरी को चौतरफा आलोचना झेलना पड़ा. ऐसा लगने लगा कि इस घटना के साथ ही पचौरी का करियर खत्म हो जाएगा.

हालांकि पिछले एक साल में ऐसा कुछ नहीं हुआ. अदालतों ने तारीख दर तारीख दी और पुलिस अभी तक इस मामले में आरोप पत्र भी दायर नहीं कर पाई है. एक मामले में उन्हें दोषी पाया गया लेकिन ट्राइब्यूनल ने बिना सुनवाई किए ही इस फैसले पर रोक लगा दी. 

पूरे मामले में एकमात्र उपलब्धि यह रही कि आरोप लगने के बाद उन्हें यूएन की संस्था आईपीसीसी के डायरेक्टर  जनरल पद से इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन वास्तविकता यह रही कि वैसे भी उनका कार्यकाल कुछ महीनों में खत्म ही होने वाला था.

इस बीच पचौरी के स्टेटस में बढ़ोतरी ही हुई. हालांकि वह शुरू में छुट्टी पर चले गए लेकिन बाद में वह अचानक ही काम पर लौट आए. लेकिन उन्हें ऑफिस में काम करने की अनुमति नहीं मिली और वह घर से ही ऑफिस का काम करते रहे.

टेरी में वापस लौटने के बाद एक और महिला कर्मचारी ने पचौरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है

पिछले सप्ताह इस मामले में एक निर्णायक मोड़ आया. टेरी की एक गवर्निंग बॉडी ने पचौरी को एग्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन बना दिया. अधिकारियों की माने तो यह पद महज दिखावे का पद नहीं है बल्कि डायरेक्टर जनरल से भी ज्यादा शक्तिशाली कुर्सी है. शिकायत के बाद पिछले एक साल में अभी तक कुछ भी नहीं हो पाया है.

आगे का रास्ता

10 फरवरी 2016 को पूरी स्थिति पलट गई. पचौरी के खिलाफ एक और शिकायत सामने आई है. एक महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि कैसे पचौरी ने 2003 के बाद से उसे लगातार परेशान किया. उनका कहना है कि पचौरी ने उनके लिए वैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो बेहद आपत्तिजनकर था. उन्होंने कहा, 'एक मौके पर पचौरी ने मुझसे कहा कि वह भारी महिलाओं को उठा सकते हैं. इसलिए उन्हें मुझे उठाने में कोई समस्या नहीं होेगी.' इसके अलावा उन्होंने अश्लील तरीके से छूने और किस करने की कोशिश की.

दूसरी शिकायकर्ता के वकील की माने तो पुलिस ने शिकायत करने वाली महिला का बयान गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने डिप्टी कमिश्नर प्रेम नाथ का जिक्र किया जिनसे वह अपना बयान रिकॉर्ड करवाने के लिए मिली थी. लेकिन बार बार कहे जाने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में कुछ नहीं किया.

महिला की वकील वृंदा ग्रोवर और रत्ना अपेंदर ने कहा, 'पुलिस ने उनकी तरफ से बयान रिकॉर्ड कराए जाने की राह मे हर वक्त रोड़ा डाला. उन्हें लगता है कि यह समय अब चुप रहने का नहीं है क्योंकि आर के पचौरी को जवाबदेह ठहराए जाने के बदले टेरी बोर्ड उन्हें सम्मानित करने में जुटा है.'

पचौरी के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि इस शिकायत के बाद पहली शिकायतकर्ता महिला के आरोपों को बल मिला है. पहली शिकायतकर्ता महिला के वकील प्रशांत मेंदीराता बताते हैं कि पचौरी 'आदतन अपराधी हैं.' इसके अलावा पुलिस के खिलाफ की गई शिकायत की वजह से उस पर आरोप पत्र दायर करने का दबाव बनेगा.

एक साल पहले एक महिला कर्मचारी ने पचौरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था लेकिन इस केस में कोई प्रगति नहीं हो पाई

दूसरा मामला सामने आने के बाद जिस तरह से पचौरी के खिलाफ आक्रोश का माहौल बना है वह चौंकाने वाला है. इसके अलावा टेरी यूनिवर्सिटी के अल्युमिनाई ने भी यूनिवर्सिटी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह 7 मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह में पचौरी के हाथों डिग्री नहीं लेंगे. 

छात्रों ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, 'डॉ. पचौरी का शाीर्ष पद पर बने रहना हमारे दीक्षांत समारो और अल्युमिनाई एवं टेरी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट छात्रों के हितों के मुताबिक नहीं है.' पहली बार यूनिवर्सिटी ने इस तरह का विरोध किया है.

इसके अलावा 4-5 साल पहले वाले बैच के अल्युमिनाई ने पचौरी के प्रोमोशन को उन लोगों के 'मुंह पर तमाचा' करार दिया है जो अभी तक लैंगिक समानता की लड़ाई लड़ते रहे हैं. इसके अलावा चेंज डॉट ओआरजी पर चल रहे पेटीशन पर अभी तक 233 दस्तखत किए जा चुके हैं. 

पेटीशन की मदद से पचौरी की नियुक्ति को वापस लिए जाने की मांग की जा रही है. इसके अलावा पिछले साल का एक पेटीशन जोर पकड़ रहा है जिसमें पचौरी को बर्खास्त किए जाने की मांग की गई है. इस पेटीशन को 436 लोगों का समर्थन मिल चुका है. इसके अलावा लगभग सभी बड़े लोगों ने टेरी और पचौरी की आलोचना की है.

सबसे ज्यादा आलोचना टेरी के गवर्निंग काउंसिल की हुई जिसके पास पचौरी को गवर्निंग काउंसिल से हटाने का अधिकार है. अब उन्होंने पचौरी को इसका एग्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन बना दिया है. जीसी की अध्यक्षता रिटायर्ड प्रोफेसर बी वी श्रीकांतन और इंडस्ट्री के जाने माने दीपक पारेख, नैना लाल किदवई और जापानी अकादमिक हस्ती के हाथों में रही है.

शिकायत करने वाली महिला पचौरी को निलंबित किए जाने की मांग कर रही हैं ताकि जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जा सके.

आईसीसी ने पचौरी को यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी पाया था और उसने यह फैसला टेरी की आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिया था जिसका गठन महिला की शिकायत के बाद किया गया था. दस दिनों बाद दिल्ली स्टेट इंडिस्ट्रयल ट्राइब्यूनल ने बिना किसी सुनवाई के इस पर रोक लगा दी. इसके बाद से कई कारणों की वजह से मामले की सुनवाई रुकी रही है.

पुलिस अपनी जांच कर रही है लेकिन एक साल बाद भी वह इस मामले में आरोप पत्र दायर नहीं कर पाई है. पुलिस का कहना है कि पचौरी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. पुलिस ने पचौरी की हिरासत की मांग की थी लेकिन पचौरी ने मार्च तक के लिए अग्रिम जमानत ले रखी है.

पिछले हफ्ते टेरी की गवर्निंग बॉडी ने यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी होने के बावजूद पचौरी को एग्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन बना दिया.

हाई कोर्ट में 10 फरवरी की कार्रवाई वैसी है जो पचौरी ने हाई कोर्ट को दिए गए अपने जवाब में कहा था. शिकायकर्ता ने पचौरी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज की मांग की थी. मामले की सुनवाई अब 11 फरवरी को की जाएगी. हाई कोर्ट में एक अन्य मामले में टेरी के खिलाफ सुनवाई हो रही है जो उन्हें निलंबित नहीं किए जाने के मामले से जुड़ा है.  

First published: 11 February 2016, 16:07 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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