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'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं रोहिंग्या मुसलमान, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल न दे'

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 September 2017, 14:15 IST

रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोरटे में हलफनामा दायर किया है. सोमवार को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों का आना 2012 से शुरु हुआ है.

कोर्ट में पेश हलफनामे में केंद्र ने कहा कि कुछ रोहिग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क का पता चला है. ऐसे में ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खतरा साबित हो सकते हैं.

 

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोर्ट को इस मुद्दे को सरकार पर छोड़ देना चाहिए और देशहित में सरकार को नीतिगत फैसले लेने दिया जाए. कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि याचिका में जो विषय दिया गया है, उससे भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर विपरीत पर असर पड़ेगा.

 

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार वापस भेजने के केंद्र के फैसले को चुनौती देती याचिका पर तीन अक्टूबर को सुनवाई का निर्देश दिया है. केंद्र सरकार द्वारा कोर्ट को यह बताने पर कि वे दिन में इस मामले में अपना जवाब दाखिल करेंगे.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाय. चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में करने का निर्देश दिया.

 

अदालत ने सुनवाई स्थगित करते हुए याचिकाकर्ताओं और अन्य को मामले की अगली सुनवाई से पूर्व केंद्र के रुख पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.

वहीं इस मामले पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संवाददाताओं ने सवाल पूछा तो, उन्होंने कहा कोर्ट में एफेडेविट फ़ाइल किया गया है, अब जो फैसला करना है कोर्ट को करना है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत में अवैध रूप से रह रहे म्यामांर के रोहिंग्या समुदाय के लोगों के भविष्य को लेकर सरकार से अपनी रणनीति बताने को कहा था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीती जुलाई में रोहिंग्या समुदाय के अवैध अप्रवासियों को भारत से वापस भेजने के लिए राज्य सरकारों को इनकी पहचान करने के निर्देश दिए थे.

First published: 18 September 2017, 14:15 IST
 
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