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अंबेडकर पर कथित बयान के मामले में राम बहादुर राय को हटाने की मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2016, 14:00 IST
(रामबहादुर राय)

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बारे में दिए गए कथित बयान के सिलसिले में विवाद बढ़ गया है. महाराष्ट्र कांग्रेस ने इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (आईजीएनसीए) के चेयरमैन राम बहादुर राय को हटाने की मांग की है.

महाराष्ट्र कांग्रेस ने वरिष्ठ पत्रकार और आईजीएनसीए के चेयरमैन राम बहादुर राय के खिलाफ महाराष्ट्र में प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी से उन्हें पद से हटाने की मांग की है.

महाराष्ट्र के पूर्व सांसद और दलित नेता एकनाथ गायकवाड़ का कहना है, "रामबहादुर राय ने एक साक्षात्कार में कहा है कि बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान लिखा नहीं, बल्कि सिर्फ उसकी भाषा दुरुस्त की थी.

अंबेडकर ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे, लेकिन संविधान तैयार करने में उनकी भूमिका सीमित थी. यदि संविधान में आग लगाने को कहा जाता है तो वह ऐसाा करने वाले पहले व्यक्ति होंगे."

गायकवाड़ का कहना है, "राय ने यह बयान देकर देशभर के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. प्रधानमंत्री मोदी स्वयं को पिछड़े वर्गों का शुभचिंतक बताते हैं, लेकिन उनकी सरकार के कार्यकलापों से ऐसा बिल्कुल नहीं दिखता. देखना है कि बाबा साहब पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले राय पर पीएम क्या कार्रवाई करते हैं."

'नहीं दिया कोई इंटरव्यू'

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार और आईजीएनसीए चेयरमैन राम बहादुर राय से जब संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसा कोई साक्षात्कार देने से इनकार करते हुए कहा कि यह ‘पत्रकारीय नैतिकताओं का उल्लंघन’ है.

आउटलुक हिंदी ने अपनी वेबसाइट पर तीन जून को वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स के अध्यक्ष राम बहादुर राय के इंटरव्यू के आधार पर खबर प्रकाशित की थी.

आउटलुक पत्रिका के मुताबिक उनकी प्रतिनिधि प्रज्ञा सिंह ने रामबहादुर राय से लंबी बातचीत की थी, जो आउटलुक पत्रिका (अंग्रेजी) के 13 जून, 2016 के अंक में प्रकाशित हुई.

वहीं आईजीएनसीए के सदस्य-सचिव डॉक्टर सच्चिदानंद जोशी ने छह जून को आधिकारिक पत्र भेजकर दावा किया कि आउटलुक ने कभी भी राम बहादुर राय का इंटरव्यू लिया ही नहीं.

अंबेडकर के अपमान का आरोप

राय के कथित बयान के बाद तत्काल उनकी आलोचना शुरू हो गई. बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा कि यए बयान अंबेडकर के अपमान के समान है और दलितों से संपर्क साधने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों में बाधक हैं.

बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम ने राय के कथित बयान पर निशाना साधते हुए कहा, "जो ऐसा कह रहे हैं, वे बिना सोच के ऐसा कह रहे हैं और ऐसा लगता है कि वे अनुसूचित जातियों और सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ दुर्भावना और शत्रुता रखते हैं."

इस बीच राम बहादुर राय की कथित टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि उन्हें साक्षात्कार के बारे में नहीं पता. आउटलुक पत्रिका ने राय के हवाले से लिखा है कि संविधान पर नए सिरे से पुनर्विचार की जरूरत है.

आउटलुक की प्रतिक्रिया

आउटलुक की वरिष्ठ विशेष संवाददाता प्रज्ञा सिंह को 26 मई को श्री राम बहादुर राय से मिलवाया गया था.  उन्होंने 27 मई को इंटरव्यू के लिए समय दिया. उन्होंने प्रज्ञा सिंह से संस्थान और सवालों की सूची के बारे में पूछा.

संतुष्ट होने पर श्री राय ने संवाददाता से पूरे एक घंटे तक ऑन द रिकॉर्ड बातचीत की. इंटरव्यू के ही सिलसिले में प्रज्ञा सिंह एक बार फिर श्री राय से मिलीं और यह बताया कि आउटलुक का फोटोग्राफर फोटो-शूट के लिए उनसे मिलेगा.

एक जून, 2016 को फोटो खिंचाने के समय फोटोग्राफर संजय रावत के साथ हमारी संवाददाता भी मौजूद थीं. प्रकाशित फोटो से स्पष्ट है कि श्री राय ने इसके लिए पोज दिए. वहीं वे कुछ और सवालों के जवाब देने को राजी हो गए.

अगले दिन दो जून को इसके लिए मुलाकात होनी थी, लेकिन समय बचाने के लिए फोन पर कुछ सवाल पूछे गए. आउटलुक उच्च स्तरीय नैतिक मूल्यों का पालन करता है. यह भरोसा है कि आईजीएनसीए भी सोच समझकर बदनाम करने की बजाय नैतिक मूल्यों का पालन करेगा.

आईजीएनसीए चेयरमैन राम बहादुर राय के इंटरव्यू के अपने दावे पर आउटलुक कायम (आउटलुक)
First published: 10 June 2016, 14:00 IST
 
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