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भारतीय मजदूर संघ: सरकार ने बिना तैयारी के नोटबंदी कर आम लोगों को मुसीबत में झोंक दिया

आकाश बिष्ट | Updated on: 10 December 2016, 7:58 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

एक महीने पहले नोटबंदी की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘इससे भ्रष्टाचार, काला धन और फर्जी करेंसी से लड़ने के लिए आम आदमी के हाथ मज़बूत होंगे.’ मगर भारतीय मज़दूर संघ के अध्यक्ष बैज नाथ राय ने नोटबंदी को प्रधानमंत्री का ‘बिन तैयारी वाला कदम’ बताया, जो काले धन पर अंकुश लगाने में बिलकुल विफल रहा.

भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय श्रमिक संगठन है. उसका एक लक्ष्य ‘मजदूरों को श्रमिक संगठनों में स्वयं संगठित होने में मदद करना है, मातृभूमि के हित में, भले ही वे किसी भी धर्म और राजनीति के हों. 

राय के मुताबिक, पिछले एक महीने में रोजगार में काफी कमी आई है और नोटबंदी के एक महीने में दिहाड़ी मजदूरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. राय ने इस बारे में कैच न्यूज़ से विस्तार से बात की. 

सवाल-जवाब

एक महीने पहले प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा कर पूरे देश को चौंका दिया. इसकी सफलता के बारे में आप क्या सोचते हैं?

अर्थव्यवस्था के लिए यह निश्चित रूप से अच्छा कदम है, पर इसके फायदे काफी आगे जाकर मिलेंगे. पिछले एक महीने में हमने देखा कि इसकी वजह से आम आदमी को केवल समस्याएं ही आईं. पूरे देश में लोग कतार में खड़े इंतजार कर रहे हैं. इससे इसका फ़ैसला लेने वालों की तैयारी पर सवाल उठता है. इसे लागू करने को लेकर भी काफी सवाल हैं, इसके मद्देनजर कि एक महीने बाद भी स्थितियां सामान्य नहीं हो रही हैं.

सरकार को इस स्तर की घोषणा करने से पहले पर्याप्त तैयारियां करनी चाहिए थीं, पर ऐसा नहीं हुआ. फ़िलहाल पूरे देश में जो हो रहा है, उससे योजना की हक़ीक़त जाहिर है. सरकार उन समस्याओं को रोकने में विफल रही, जो तैयारी करके रोकी जा सकती थीं. 

कैसी तैयारियां?

उन्हें और खाते खोलने चाहिए थे, ताकि जिनके खाते नहीं हैं, वे उन खातों में अपना पैसा जमा करवा सकते. इसके अलावा सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि बैंक ऐसा भारी-भरकम काम करने को तैयार हैं. सबसे ज्यादा परेशान दिहाड़ी मजदूर हुए, जिनके खाते नहीं हैं और जिन्हें मजदूरी लेने बैंक भेजा जाता है या फिर अपना पैसा बदलवाने. सरकार ने इन सबको अनदेखा किया है. मैं उनके मकसद पर संदेह नहीं करता, पर जिस तरह से लागू किया गया, वह बिलकुल ठीक नहीं था.

नोटबंदी ने देश में रोजगार को किस तरह प्रभावित किया?

हाल के समय को भूल जाएं. हम तो पिछले तीन महीनों से रोज़गार में भारी कमी देख रहे हैं. इन सालों में 20 लाख से ज्यादा रोजगार खत्म हुए, जबकि केवल 1,35,000 बनाए गए. जहां तक नोटबंदी का सवाल है, असंगठित क्षेत्रों के लोग बेतहाशा प्रभावित हुए हैं और उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. 

ठेकेदारों के पास वर्कर्स को देने के लिए कैश नहीं है, खासकर उनको जो रियल एस्टेट सेक्टर में हैं. यहां तक कि लोहार, जौहरी, इलैक्ट्रिशियन जैसे रोज कमाने वालों के पास कैश की भारी कमी है. अगर सरकार पहले सुनिश्चित करती कि उनके पास खाते हैं, तो इस स्तर पर उनकी समस्याएं नहीं होतीं. 

क्या नोटबंदी से काले धन पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है, जैसा कि प्रधानमंत्री और सरकार के अन्य लोगों ने कहा है? 

इसका मकसद तो यही था, पर पूरी तरह से विफल रहा. जो लोग साधन-संपन्न थे, उन्होंने अपनी ब्लैक मनी को व्हाइट करने के रास्ते ढूंढ़ लिए. देश में जिस तरह से काले धन की बरामदगी हो रही है, उससे लगता है, उसने अपनी गली फिर बना ली. काले धन पर अंकुश तभी लग सकता है, जब हम कैश काम में नहीं लें, पर यह हमारे जैसे देश में संभव नहीं है. अगर थोड़ा भी कैश है, तो काला धन वहां हमेशा रहेगा. 

कैशलेस अर्थव्यवस्था के बारे में आपकी क्या राय है, जिसका प्रधानमंत्री बराबर प्रचार कर रहे हैं?

यह कभी संभव नहीं होगा और कई जटिलतां पैदा होंगी. दिहाड़ी मजदूर कैसे जिएंगे, अगर उनके हाथ में रोजाना कैश नहीं होगा. लोग पेटीएम की बात कर रहे हैं, पर एक अशिक्षित हॉकर उसका कैसे इस्तेमाल करेगा. सब्जी विक्रेता अपने सभी तरह के लेन-देन के लिए पेटीएम इस्तेमाल नहीं कर सकता. 

बीएमएस भारत का सबसे बड़ा मजदूर यूनियन संगठन है. क्या आप इनकी समस्याएं प्रधानमंत्री और सरकार की सहायता से निपटाना चाहते हैं?

हमारी वर्किंग कमेटी पुणे में जनवरी में मिलेगी और फिर हम विस्तार से चर्चा करेंगे. फिलहाल हमारी मांग है कि वर्कर्स और दिहाड़ियों की मजदूरी देने के लिए ठेकेदारों को अग्रिम राशि दी जाए. साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करे कि सबके पास बैंक खाते हैं, खासकर उनके पास जो असंगठित क्षेत्रों से हैं.

First published: 10 December 2016, 7:58 IST
 
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