Home » इंडिया » Catch Hindi: rss prant pracharak sabha in kanpur, uttar pradesh and coming assembly election
 

संघ प्रांत प्रचारक बैठक की 16 साल बाद यूपी में वापसी का मकसद क्या है?

अतुल चंद्रा | Updated on: 16 July 2016, 8:36 IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) 16 साल बाद अपनी प्रांत प्रचारकों की वार्षिक बैठक उत्तर प्रदेश में कर रहा है. यूपी में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

संघ की पांच दिवसीय बैठक बिठूर, कानपुर में सोमवार, 11 जुलाई से शुरू हुई. इसमें संघ के 44 प्रांत प्रचारक शामिल हुए. आरएसएस की पूरे देश में 57 हजार शाखाएं हैं. 

हालांकि संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने इस बात से इनकार किया कि संघ ने बीजेपी की मदद के लिए यूपी का चुनाव किया है. दूसरी तरफ बीजेपी के संगठन सचिव सुनील बंसल ने मंगलवार को संघ के नेताओं से मुलाकात की. इस मुलाकात को चुनावी तैयारी से जोड़ कर देखा जा रहा है.

'भाजपा की यूपी' करने के वास्ते संघ ने कसी कमर

बीजेपी के एक नेता ने नाम न देने की शर्त पर बताया, "वो यहां नाश्ता और सामान्य बातचीत के लिए आए थे. मीडिया में कहा जा रहा है कि बंसल ने यूपी के संबंध में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से तीन घंटे लंबे मुलाकात की. लेकिन संघ प्रमुख को ऐसी बात करनी होगी तो वो अमित शाह, नरेंद्र मोदी या राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) राम लाल से करेंगे."

वैद्य ने कहा, "ये रूटीन कार्यवाही है. इसमें पहले किए गए कार्यों की समीक्षा की जाती है और भविष्य की योजना तैयार की जाती है."

वैद्य ने कहा, "हम इस बैठक में संघ के बढ़ते सदस्यों को समाहित करने के तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं."

कार्यकर्ता है आधारस्तंभ

संघ के प्रचारक उसके आधारस्तंभ हैं. उनका काम संघ की विचारधारा का प्रचार-प्रसार होता है. संघ के पूर्णकालिक प्रचारकों को बीजेपी में संगठन सचिव के रूप में नियुक्त किया जाता है ताकि वो संघ और बीजेपी के बीच सेतु का काम कर सकें. 

राष्ट्रीय स्तर पर संघ के वरिष्ठ अनुभवी प्रचारकों को भेजा जाता है. फिर भी संघ के प्रचारक अपनी सभा को बीजेपी की चुनावी तैयारी से जोड़ने से बच रहे हैं.

पिछले 2 साल में संघ के स्कूलों में 30 फीसदी बढ़ी मुस्लिम छात्रों की संख्या

संघ के मीडिया प्रभारी पवनपुत्र बादल कहते हैं कि ये महज संयोग है कि ये सभा कानपुर में हो रही है और विधानसभा चुनाव भी करीब हैं. हालांकि संघ के एक दूसरे वरिष्ठ पदाधिकारी ने माना कि इसका संबंध आगामी चुनाव से है.

पदाधिकारी ने कैच से कहा, "प्रांत प्रचारकों की सभा आखिरी बार यूपी में 2000 में हुई थी. तब ये बैठक नैनीताल में हुई थी. उस समय उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बना था."

यूपी में आखिरी बार प्रांत प्रचारकों की बैठक 2000 में नैनीताल हुई थी

संघ के पदाधिकारी ने कहा कि बैठक के लिए कानपुर के चुनाव सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.

ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए संघ ने यूपी का चुनाव किया है? इससे पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी उतना ही संघ का है जितना की बीजेपी

बीजेपी यूपी में सरकार बनाने के लिए आतुर है. ऐसे में सभी संगठन सचिवों को राज्य में अपनी पूरी ताकत लगाने के लिए कहा जाएगा. 

आरएसएस के पदाधिकारी और राजर्षि टंडन ओपेन यूनिवर्सिटी के सूचना और संचार विभाग के निदेशक एके सिन्हा इससे इनकार करते हैं कि संघ बीजेपी के पदाधिकारियों को कोई निर्देश देता है.

मतदान प्रतिशत

ये लगभग खुला सच है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में आरएसएस ने सक्रिय भूमिका निभाई थी. नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ इस जीत का श्रेय संघ को भी दिया गया. लेकिन पवनपुत्र बादल संघ की भूमिका पर कहते हैं, "हमने तो बस ये कोशिश की थी कि 100 प्रतिशत मतदान हो."

बिठूर से जिस तरह की खबरें आ रही हैं उनपर यकीन करें तो ये मानना मुश्किल लगता है कि आरएसएस प्रचारकों को केवल मतदाताओं को वोट देने के लिए प्रेरित करने भर की जिम्मेदारी दी जाएगी.

खबरों के अनुसार सोमवार शाम को आरएसएस प्रमुख भागवत ने एक अनौपचारिक वार्ता की. उन्होंने इस वार्ता में कैराना से हिंदुओं के पलायन पर चिंता जताई.

आरएसएस से उलेमा काउंसिल का सवाल- मुस्लिमों से कैसा राष्ट्रप्रेम चाहते हैं?

बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया था कि कैराना से हिंदू पलायन कर रहे हैं. हालांकि उनके आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी लेकिन भागवत ने इसका संज्ञान लिया और कहा कि हिंदुओं को उनके घरों से भागने के लिए मजबूर किया जाना चिंता की बात है.

हालांकि वैद्य ऐसी किसी चर्चा से इनकार करते हैं. सिन्हा इसे मीडिया की कल्पना बताते हैं. सिन्हा ने कहा, "प्रांत प्रचारक बैठक में ऐसे विषयों पर चर्चा नहीं होती."

ये शायद महज संयोग ही है कि यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने 10 जुलाई को बताया कि उन्होंने कैराना पलायन, मथुरा के जवाहर बाग में हुए गोलीबारी और दादरी हत्या पर विशेष रिपोर्ट उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को भेज दी है.

First published: 16 July 2016, 8:36 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी