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'भाजपा की यूपी' करने के वास्ते संघ ने कसी कमर

महेंद्र प्रताप सिंह | Updated on: 9 July 2016, 7:41 IST

उत्तर प्रदेश में मिशन 2017 को कामयाब करन के लिए राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ भी पूरी तत्परता से जुट गया है. यूपी चुनाव को देखते हुए कानपुर में पांच साल बाद होने जा रही आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक के कई खास मायने हैं. यह जानना दिलचस्प है कि पांच साल पहले कानपुर में हुई संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी में सबसे पहली बार नरेंद्र मोदी को पीएम पद पर प्रोजेक्ट करने की बात संघ के किसी मंच से उठी थी.

संघ की यह महत्वपूर्ण बैठक 11 जुलाई से लेकर 15 जुलाई तक कानपुर शहर में चलेगी. बैठक में देश भर के संघ से जुड़े संगठनों के 150 वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे. संघ प्रमुख मोहन भागवत भी पांच दिन तक चलने वाली इस बैठक में मौजूद रहेंगे.

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संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक यह बैठक संघ के पांच साल के काम-काज की समीक्षा के लिए बुलाई गई है. लेकनि अगर कहें कि इस बैठक में यूपी चुनाव जीतने की रणनीति बनाई जाएगी, तो ये गलत नहीं होगा.

कोई कसर बाकी नहीं रखेगा संघ

यूपी का दंगल जीतने के लिए संघ के प्रचारक यूपी में पूरी तरह सक्रिय हैं. यूपी में बीजेपी की तरफ से अहम रणनीति बनाने वाले जितने भी पदाधिकारी हैं, वो संघ के प्रचारक रह चुके हैं.

इस लिस्ट की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओम माथुर का, जो शुरुात से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं. इस कड़ी में दूूसरा बड़ा नाम राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश का है, तीसरे नंबर पर प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल और चौथा नाम प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का आता हैै. 

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इन सब नेताओं की खासियत एक ही है वो यह कि ये सभी लोग आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं. यूपी में इन्हीं के बनाए गए रोडमैप पर पार्टी आगे प्रस्थान करेगी.

लोकसभा चुनावों से पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी

संघ किसी भी हाल में यूपी चुनाव जीतना चाहता है. इसके लिए रणनीति लोकसभा के चुनाव से पहले ही बनायी जा चुकी थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ाना भी इसी योजना का हिस्सा था.

संघ का मानना है कि पीएम मोदी यहां से चुनाव जीतते हैं तो संसदीय चुनाव के साथ यूपी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को लाभ होगा. अब इस रणनीति का 2017 में होने वाले चुनाव में कितना फायदा मिलेगा वो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि संघ का मुख्य फोकस यूपी में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाने पर रहेगा.

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बैठक के दौरान मोहन भागवत बीजेपी नेताओं को यूपी चुनाव जीतने के मंत्र भी देंगे. वैसे संघ का मानना है कि यह कार्यक्रम नहीं बल्कि संघ का सम्मेलन है. बैठक में सिर्फ संघ से जुड़े लोग ही मौजूद रहेंगे.

लेकिन संघ और बीजेपी सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो इस पांच दिवसीय बैठक के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केशव प्रसाद, मानवेंद्र सिंह और सरकार की तरफ से गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उमा भारती सहित संगठन के अन्य लोग बैठक में शिरकत करेंगे. 

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जहां पर यूपी चुनाव फतेह करने की रणनीति के साथ ही 14 जुलाई को उत्तर प्रदेश बीजेपी के सीएम उम्मीदवार के नाम पर विचार किया जा सकता है. यूपी विधानसभा की 403 सीटों पर समग्र चर्चा और संभावित जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश भी इस दौरान की जाएगी.

संघ का विस्तार भी चर्चा में रहेगा

कार्यकारिणी की बैठक में संघ प्रमुख के सामने संघ के विचारों, संस्थाओं और स्वीकार्यता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. संघ का मानना है कि जिस तरह शहरों में संघ की शाखाएं चल रही हैं, उसी तरह हर गांव में संघ का स्वयंसेवक होना चाहिए.

संघ इस पांच दिवसीय बैठक के दौरान पहले यूपी को चार भागों में बांटकर एक-एक प्रांत प्रचारक बनाएगा. ये प्रांत प्रचारक फिर गांव और कस्बों में जाएंगे और संघ की विचारधारा से उन्हें अवगत कराने के साथ ही लंबे समय तक के लिए उससे जोड़ने का काम करेंगे.

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संघ की एक और अहम योजना इस कार्यकारिणी के दौरान दलितों और अन्य पिछड़े लोगों तक अपनी बात पहुंचाना भी है. 

संघ का मानना है कि जब तक वह अपनी पकड़ गांव-गांव तक नहीं पहुंचाएगा, तब तक बीजेपी की स्थिति ठीक नहीं हो सकती है. यूपी की राजनीति में बीते दो दशकों के दौरान भाजपा की राजनीति में उतार की एक वजह गांवों में उसका मजबूत जनाधार नहीं होना भी रहा है.

First published: 9 July 2016, 7:41 IST
 
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