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राष्ट्रद्रोह, शाखा और जातीय समीकरण: संघ प्रतिनिधि सभा का मंत्र

समीर चौगांवकर | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • संघ का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश को तोड़ने और अफजल गुरु के महिमामंडन की अनुमति नहीं दी जा सकती. 
  • राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देशभर में फैले अपने दायरे को और फैलाने की तैयारी में है. अपनी स्थापना के 90 साल पूरा कर चुका संघ देश के हर गांव में शाखा शुरू करने की तैयारी में है. 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राजस्थान के नागौर में चल रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में देश के विश्वविद्यालयों में कथित तौर पर चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर चिंता जाहिर की है. संघ ने सरकार से आह्वान किया है कि देश के कुछ विश्वविद्यालयों में देश को तोड़ने वाले नारों और देशविरोधी गतिविधियों पर तत्काल लगाम लगाए. संघ की इच्छा है कि ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों से कठोरता से निपटा जाय.

संघ का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश को तोड़ने और अफजल गुरु के महिमामंडन की अनुमति नहीं दी जा सकती. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जेएनयू का नाम लिए बगैर कहा कि देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के केन्द्र बन रहे है जो चिंता का विषय है. 

उनके मुताबिक ऐसी देशविरोधी ताकतों का राजनैतिक दलों द्वारा समर्थन करना राष्ट्र के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

देश के हर गांव में शाखा खोलने तैयारी

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ देशभर में फैले अपने दायरे को और फैलाने की तैयारी में है. अपनी स्थापना के 90 साल पूरा कर चुका संघ देश के हर गांव में शाखा शुरू करने की तैयारी में है. संघ ने अपने लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए है, उसके अनुसार संघ की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी शाखाओं के विस्तार की है. 

संघ ने देश के छह लाख गांवों तक अपनी पैठ बनाने के लिए नई योजना तैयार की है. इसके तहत दस-दस गांवों का समूह बनाया गया है. हरेक समूह को एक खंड या एक ब्लॉक माना जाएंगा. संघ की योजना 2016 तक इन सभी 60 हजार खंडों में एक शाखा खोलने की है.

एक कुंआ, एक श्मशान, एक मंदिर को आगे बढ़ाएगा संघ

राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है. उल्लेखनीय है कि पिछले साल नागपुर में हुई संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में दलितों को जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी. इसके तहत एक कुंआ, एक श्मशान और एक मंदिर का प्रस्ताव पारित किया गया था. 

एक साल बाद इस दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति न होने के कारण संघ में चिंता है. संघ इसे तेजी से गति देने की तैयारी में है. संघ देशभर मेें फैली अपनी शाखाओं को सामाजिक सेवा से जुड़ी योजनाओं पर काम करने के साथ ही संघ के स्वंयसेवक एक गांव में सभी जातियों के लिए एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मशान के लिए लोगों को तैयार करने का काम करेंगे.

तेजी से बढ़ती शाखाओं की संख्या

देश के युवाओं में संघ के प्रति बढ़ते रुझान और इसके चलते बढ़ती शाखाओं की संख्या से गद्गद राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ इसका इस्तेमाल अपने समर्थकों की बड़ी संख्या तैयार करने में कर रहा है. 

संघ के सहसरकार्यवाह कृष्णगोपाल ने बताया कि 2012 में जहां संघ की शाखाओं की संख्या 40,922 थी, वही 2015 में शाखाओं की संख्या बढकर 51,335 हो गई. चार साल की अवधि में संघ की 10413 शाखाएं बढ़ी हैं. संघ का दावा है कि मार्च 2016 तक देशभर में कुल शाखाओं की संख्या 56,859 हो गई है. 

साप्ताहिक मिलन शाखाओं की संख्या भी इस दौरान बढ़ी है. यह 12847 से बढ़कर 13784 हो गई है. साप्ताहिक मिलन शाखाओं की संख्या पिछले साल की तुलना में इस साल 937 बढ़ी है. इसी तरह देशभर में 40 वर्ष से अधिक आयु की कुल 5175 शाखाएं है. 

संघ ने बताया कि 40 वर्ष से कम उम्र के युवा और तरूण युवकों की शाखाएं कुल शाखाओं का 91 प्रतिशत है. संघ की नजर में देश में 840 जिले हैं जिसमें से 95 प्रतिशत जिलों में संघ की शाखाएं लगती है. संख्या के लिहाज से यह लगभग 820 के करीब है.

संघ अंबेडकर की 120 वी जयंती, संघ के पूर्व सरसंघचालक बाला साहेब देवरस के जन्मशती वर्ष, दक्षिण के संत रामानुजाचार्य के एक हजारवें जन्मदिवस और दीनदयाल उपाध्याय के 100वें जन्मदिवस को ध्यान में रखकर पूरे साल कार्यक्रम और अभियानों की श्रृंखला शुरू करने वाला है.

First published: 12 March 2016, 9:13 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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