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संघ में खाकी हाफपैंट हुई पुरानी बात, नया गणवेश फुलपैंट

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 October 2016, 19:50 IST
(एजेंसी)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों ने मंगलवार को विजयदशमी के अवसर पर पिछले 90 साल से पहनी जा रही खाकी रंग की हाफपैंट को गणवेश से बाहर कर दिया है. संघ के स्वयंसेवक अब भूरा फुलपैंट पहनेंगे.

आरएसएस के स्थापना दिवस यानी दशहरा के अवसर पर संघ ने जो नया गणवेश अपनाया है, उसमें अब खाकी नेकर की जगह भूरी फुलपैंट और खाकी जुराबों की जगह भूरी जुराबें होंगी, जबकि हमेशा से पहनी जा रही सफेद कमीज़, काली टोपी और लाठी अब भी गणवेश का हिस्सा बनी रहेगी.

इस मामले में संघ के संचार विभाग के प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा, 'भले ही अलग-अलग मुद्दों पर संघ के साथ मिलकर काम करने को लेकर समाज में स्वीकार्यता बढ़ी है, गणवेश में बदलाव काम करने के दौरान आराम तथा सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है. यह बदलाव संघ के भी समय के साथ बदलने का प्रतीक है."

उन्होंने बताया कि आठ लाख से ज़्यादा पैंट बांटी जा चुकी हैं, जिनमें छह लाख पैंट सिलवाकर दी गई है.

मनमोहन वैद्य के मुताबिक, गणवेश में बदलाव का प्रस्ताव सबसे पहले वर्ष 2009 में किया गया था, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हो पाया.

इसके बाद इस प्रस्ताव को वर्ष 2015 में फिर लाया गया और फिर विचार-विमर्श के बाद आरएसएस के नेताओं तथा स्वयंसेवकों ने सर्वसम्मति से तय किया कि गणवेश में परिवर्तन आवश्यक है. इसके बाद अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने इस निर्णय का अनुमोदन किया.

First published: 11 October 2016, 19:50 IST
 
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