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बड़ा खुलासा: कोहिनूर हीरा अंग्रेजों ने नहीं किया था चोरी, खुद महाराजा ने रानी विक्टोरिया को किया था 'सरेंडर'

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 October 2018, 12:08 IST

कोहिनूर हीरे को लेकर साल 2016 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ब्रिटिशों द्वारा कोहिनूर हीरा न तो जबरन लिया गया और न ही चोरी किया गया था. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोहिनूर हीरा तत्कालीन पंजाब पर शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को उपहार में दिया गया था. लेकिन अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने आरटीआई के जवाब में सरकार के उस जवाब का खंडन किया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण न बताया है कि कोहिनूर हीरा वास्तव में लाहौर के महाराजा द्वारा इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया को 'सरेंडर' किया गया था.

 

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, दरअसल आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने जानकारी मांगी थी कि किस आधार पर कोहिनूर ब्रिटेन को ट्रांसफर किया गया था. इसके बाद पीआईएल के जवाब में सरकार ने कहा था कि महाराजा रणजीत सिंह के रिश्तेदारों ने कोहिनूर को ब्रिटिशों को एंग्लो-सिख युद्ध के खर्चों को कवर करने के लिए स्वैच्छिक मुआवजे के रूप में दिया था.

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इसके बाद पीएमओ ने ये आरटीआई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को स्थानांतरित कर दी था, जहां से सरेंडर की शर्तों का सटीक विवरण दिया गया है. पुरातत्व सर्वेक्षण ने जवाब दिया कि रिकॉर्ड के अनुसार, 1849 में लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दुलीप सिंह के बीच लाहौर संधि आयोजित की गई थी. कोहिनूर हीरा को लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की रानी को सरेंडर कर दिया था.

पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, संधि इंगित करती है कि कोहिनूर को दुलीप सिंह की इच्छा पर अंग्रेजों को नहीं सौंपा गया था. संधि के समय दुलीप सिंह नाबालिग थे. बता दें कि ये दावा सरकार के 2 साल पहले के दावे से अलग है. 

First published: 16 October 2018, 12:08 IST
 
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