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हंगामा है क्यूं बरपा......

गोविंद चतुर्वेदी | Updated on: 16 July 2016, 13:22 IST
(कैच न्यूज)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने भारतीय राजस्व सेवा से इस्तीफा क्या दिया, राजनीति मे भूचाल सा आ गया. करीब-करीब वैसा ही जैसा केजरीवाल के चुनावी राजनीति मे कूदते वक्त आया था. वो राजनीति मे आएंगी, नही आएंगी अथवा कब आएंगी, अभी कुछ पता नही है लेकिन अन्य राजनीतिक दलों को जैसे पसीने छूटने लगे हैं.

सब अपनी-अपनी सुविधा से उस पर प्रतिक्रिया दे रहे है. 'परिवारवाद' इसमें सबको दिखाई दे रहा है. लोग जमकर आलोचना कर रहे है लेकिन यह कोई नही देख रहा कि 'परिवारवाद' कहां नहीं है? कांग्रेस में नहीं है, कि भाजपा में नहीं है? कम्युनिस्टो में नहीं है कि, समाजवादियों में नही है?

एक जमाना था जब लोग गांधी परिवार का नाम लेते थे लेकिन आज; जिधर निगाह उठाओ, जिस दल में देखो, परिवार ही परिवार दिखता है. राष्ट्रीय से लेकर राज्य और जिले से लेकर ब्लॉक तक. हर राज्य और हर पार्टी उसे सींचती नजर आती है.

राममनोहर लोहिया के अनुयायी भी पीछे नहीं

कांग्रेस मे सिंधिया, पायलट, शीला दीक्षित, दिग्विजय सिंह, तरुण गोगोई, वीरभद्र सिंह, शंकर राव चह्वाण, वसंत दादा पाटिल, देशमुख, हुड्डा और सुरजेवाला. जिस राज्य में देखो परिवारों की धूम. लेकिन पीछे भाजपा भी कहां है? वो जमाने हवा हुए जब वहां परिवारवाद नहीं था. अब तो उसमें भी हर बड़े नेता के रिश्तेदार राजनीति में हैं.

रमनसिंह, शिवराज सिंह, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, प्रेम कुमार धूमल. किसी का बेटा एमपी है तो किसी की पत्नी पार्टी में है. स्वर्गीय प्रमोद महाजन की बेटी सांसद है तो स्वर्गीय गोपीनाथ मुण्डे की एक बेटी महाराष्ट्र में मंत्री और एक पुत्री सांसद है. ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से भी आधा दर्जन लोग राजनीति में है.

परिवारवादी राजनीति को सींचने में राममनोहर लोहिया के अनुयायी भी पीछे नहीं है. देश के सबसे बड़े समाजवादियो में शामिल मुलायम सिंह यादव के परिवार मे तो राजनीति से बाहर शायद ही कोई हो. खुद सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो बेटे अखिलेश यूपी के मुख्यमंत्री. एक भाई यूपी में मंत्री तो एक राज्यसभा में. एक भतीजा और बेटे की बहू लोकसभा में, मुलायम सिंह के समधी लालू प्रसाद यादव भी कम नहीं हैं. खुद चुनाव आयोग के फैसले की वजह से कुछ नहीं हैं. लेकिन पत्नी विधायक है, तो बेटी सांसद. दो बेटे विधायक है. उनमें से एक बिहार मे उपमुख्यमंत्री है तो एक मंत्री.

करात दंपति इसकी एक मिसाल

राजनीतिक परिवारो की सूची बहुत लंबी है. पंजाब का बादल परिवार, तमिलनाडु मे करुणानिधि की फैमिली, महाराष्ट्र मे पवार का परिवार, कर्नाटक मे देवगौड़ा का परिवार तो आंध्रप्रदेश में स्वर्गीय रामाराव, वाईएसआर और औवेसी के परिवार इस डोर को लंबा कर रहे हैं. कम्यूनिस्ट पार्टियों में करात दंपति इसकी एक मिसाल हैं.

तेलंगाना भले ही देश का सबसे युवा राज्य हो लेकिन परिवारवाद की बेल को परवान चढ़ाने में वह भी बूढ़े राज्यों से कम नहीं हैं. चन्द्रशेखर राव मुख्यमंत्री हैं तो पुत्र केटी रामाराव मंत्री और पुत्री के कविता पार्टी सांसद. भले परिवारवाद की इस सूची में शामिल ज्यादातर राजनेता योग्यता के मापदण्ड पर खरे उतरते हों लेकिन यह सच्चाई तो है ही कि उन्हें राजनीति की सीढ़ी चढ़ाने में परिवार की राजनीतिक जड़ों ने काफी मदद की है. तब सुनीता केजरीवाल भी राजनीति मे आएं तो इतना हंगामा क्यों बरपा है?

First published: 16 July 2016, 13:22 IST
 
गोविंद चतुर्वेदी @catchhindi

लेखक राजस्थान पत्रिका के डिप्टी एडिटर हैं.

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