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मुकेश अंबानी की रिलायंस पर मोदी सरकार ने लगाया 10,385 करोड़ का जुर्माना

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 November 2016, 11:31 IST

केंद्र सरकार ने केजी बेसिन में ओएनजीसी (ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन) के तेल ब्लॉक से प्राकृतिक गैस के दोहन पर मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके साझीदारों पर 1.55 अरब डॉलर (करीब 10 हजार 385 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है.

केजी बेसिन अपतटीय क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी को नुकसान पहुंचाने के आरोप में रिलायंस, उसके भागीदार बीपी और नीको से मुआवजा मांगा गया है.

ओएनजीसी के तेल क्षेत्र से मार्च 2016 तक सात साल के दौरान 33.83 करोड़ ब्रिटिश थर्मल यूनिट गैस का उत्पादन करने के लिए रिलायंस को यह रकम अदा करनी होगी.

शाह कमिटी की रिपोर्ट के बाद उत्पादित गैस पर 7.17 करोड़ डॉलर रॉयल्टी भुगतान को कम करने और शेष राशि पर दो फीसदी दर से ब्याज जोड़ने के बाद रिलायंस और उसके भागीदारों से कुल 1.55 अरब डॉलर मुआवजे की मांग की गई है.

शाह कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आंध्र प्रदेश तट के पास बंगाल की खाड़ी में कृष्णा गोदावरी (केजी) बेसिन के अपने ब्लॉक से सटे ओएनजीसी ब्लॉक से रिलायंस इंडस्ट्रीज प्राकृतिक गैस निकालती रही है. 

रिलायंस: केजी डी-6 ब्लॉक के दायरे में खुदाई

समिति ने कहा है कि इसके लिए उसे सरकार को भुगतान करना चाहिए. शाह कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ओएनजीसी के क्षेत्र से गैस अपने ब्लॉक में बहकर या खिसक कर आई गैस के दोहन के लिए उसे सरकार को भुगतान करना चाहिए.

वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि उसने जिन गैस कुओं में भी खुदाई की गई है और उत्पादन हुआ वह सभी उसके केजी डी-6 ब्लॉक के दायरे में ही थे.

कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि केंद्र सरकार की इजाजत के बाद ही उसने इनमें खुदाई और खोज के बाद उत्पादन शुरू किया. तेल और गैस क्षेत्रों में उत्पादन भागीदारी अनुबंध में विवाद को सुलझाने के लिए यही प्रक्रिया तय की गई है.

क्या है पूरा विवाद?

आरोपों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने केजी बेसिन में ओएनजीसी के ब्लॉक से सात साल तक प्राकृतिक गैस का दोहन किया. आरआईएल और ओएनजीसी के गैस ब्लॉक आसपास ही हैं.

केंद्र सरकार ने कंपनी को तीस दिनों के भीतर इस नोटिस का जवाब देने को कहा है. आरआईएल की तरफ से सरकार की ओर से दिए गए नोटिस को आर्बिट्रेशन में चुनौती दिए जाने की पूरी संभावना है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिकी एजेंसी डीगोलयर और मैगनॉटन की रिपोर्ट के आधार पर यह नोटिस जारी किया है. रिलायंस पहले ही अपने गैस ब्लॉक के विकास पर आई लागत के कुछ हिस्से की वसूली की इजाजत नहीं देने का मामला अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में ले जा चुकी है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी के आरोपों के बाद इन एजेंसियों से सर्वे करवाया गया था. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मार्च, 2016 के अंत तक मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने ओएनजीसी के ब्लॉक से 11.122 करोड़ घनमीटर गैस निकाली थी.

ओएनजीसी ने अपने ब्लॉक से कॉमर्शियल उत्पादन अभी शुरू नहीं किया है. जबकि रिलायंस के ब्लॉक से कई वर्षों से गैस निकाली जा रही है. हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने भी सरकार को रिलायंस पर जुर्माना लगाने का सुझाव दिया था.

इसके बाद मोदी सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एपी शाह की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की थी. शाह समिति ने भी कहा था कि अमेरिकी एजेंसियों की रिपोर्ट सही है और रिलायंस ने जो गैस निकाली है, उसकी आर्थिक भरपाई की व्यवस्था होनी चाहिए.

ओएनजीसी ने जुलाई, 2013 में इस बारे में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी. ओएनजीसी का कहना है कि उसके गैस ब्लॉक के कुछ हिस्से अब तकरीबन खाली हो चुके हैं. कंपनी का आरोप है कि उसके ब्लॉक से तकरीबन 11 हजार करोड़ रुपये की प्राकृतिक गैस निकाली जा चुकी है.

First published: 5 November 2016, 11:31 IST
 
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