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मोदी की मंजूरी के बावजूद रूस के साथ अभी एस-400 डील टालने के पक्ष में थे NSA डोभाल ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2018, 10:41 IST

भारत के दौरे पर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच लगभग 5.43 बिलियन डॉलर के S-400 मिसाइल प्रणाली समझौता हो गया. हालांकि मीडिया के सामने आये मोदी और पुतिन ने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया. राफेल के बाद भारत के सबसे बड़े विदेशी हथियार अनुबंध पर एमईए द्वारा जारी भारत-रूसी संयुक्त वक्तव्य में केवल एक संक्षिप्त वाक्य के माध्यम से आधिकारिक उल्लेख किया गया है. संयुक्त बयान में कहा गया है "नई दिल्ली और मॉस्को ने भारत को एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति के लिए अनुबंध के समापन पर सहमति बनाई है''.

इस डील से जुड़े नजदीकी सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार एस-400 खरीद का समर्थन किया है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल जो यूएस सिग्नलिंग के लिए अधिक सतर्क थे, वह इस अनुबंध पर हस्ताक्षर को अभी स्थगित करने के पक्ष में थे. सितंबर के मध्य में में वाशिंगटन की अपनी यात्रा पर, डोवाल ने शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की, जिनमें सचिव सचिव माइक पोम्पे, रक्षा सचिव जेम्स मैटिस और उनके अमेरिकी समकक्ष जॉन बोल्टन शामिल थे. माना जाता है कि उन्हें चेतावनी दी गई है कि एस-400 की भारत की खरीद "प्रतिबंध अधिनियम सीएएटीएसए के तहत आ सकती है.

 

सीएएटीएसए के तहत अमेरिकी प्रशासन ने रूसी, ईरानी और उत्तरी कोरियाई रक्षा और खुफिया संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन में शामिल देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया है. हलांकि भारत और वियतनाम जैसे करीबी साझेदारों को मुक्त करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने एक छूट का कानून बनाया था. हालांकि, डोभाल को बताया गया कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत के लिए छूट का आह्वान करेंगे.

अमेरिका से लौटने के दो दिन बाद मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा अनुबंधों के ब्योरे को पूरा करने के लिए डोभाल मॉस्को की रक्षा निर्यात एजेंसी रोसोबोरोनॉक्सपोर्ट से एक शीर्ष स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मिले. डोवाल ने एस-400 अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बारे में अपनी राय व्यक्त की.

अमेरिका हमेशा से यह चाहता रहा है कि कि वह इस तरह की रक्षा प्रणालियों को अमेरिका से ही खरीदे. बुधवार को एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि एक बार रक्षा मंत्रालय अनुबंध पर हस्ताक्षर करता है,तो एस -400 सिस्टम की डिलीवरी 24 महीने में शुरू होगी. अक्टूबर 2016 में दोनों देशों ने एस -400 सिस्टम के लिए इंटर-गवर्नमेंट एग्रीमेंट्स (आईजीए) पर बातचीत शुरू की.

पिछले महीने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक Pompeo ने कहा कि वाशिंगटन रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से भारत को छूट देने के बारे में सोच रहा है. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का उद्देश्य भारत जैसे महान रणनीतिक साझेदारों को दंडित करना नहीं है.

क्या है एस-400

एस-400' मिसाइल प्रणाली दुनिया की सबसे बेहतरीन रक्षा प्रणाली मणि जाती है. रूस इसका इस्तेमाल 2007 से कर रहा है. एस-400 की खासियत है कि यह करीब 400 किलोमीटर के क्षेत्र में दुश्मन के विमान, मिसाइल और यहां तक कि ड्रोन को भी नष्ट कर सकत है. यह अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट F-35 को भी टक्कर दे सकता है. इससे एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं.एस-400 के में 72 मिसाइलें आती हैं, जो 36 लक्ष्यों भेदने में सक्षम है.

First published: 6 October 2018, 10:39 IST
 
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