Home » इंडिया » Sabarimala row: Travancore Devasom Board said many temples where men are not allowed
 

सबरीमाला मंदिर: देश के अनेक मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश वर्जित, SC में बोर्ड की दलील

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 July 2018, 17:27 IST

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला परंपरा का बचाव करते हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को खंडपीठ को बताया कि देश में ऐसे मंदिर हैं जहां पुरुषों को आने की अनुमति नहीं है. त्रावणकोर देवासम बोर्ड की तरफ से दलील देते हुए सिंघवी ने कहा कि जब मस्जिदों में भी महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है तब सिर्फ एक जनहित याचिका के आधार पर बिना किसी ठोस दलील के सिर्फ मंदिर मामले पर ही सुनवाई क्यों हो रही है. उन्होंने कहा समानता के अधिकार के उल्लंघन का मामला मस्जिदो पर भी लागू होना चाहिए."

सिंघवी ने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि देश के शिया मुस्लिम मुहर्रम में अपने शरीर को लहूलुहान कर लेते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि देश में काली के कई ऐसे मंदिर हैं जहां त्वचा में कांटे चुभाए जाते हैं. क्या सुप्रीम कोर्ट इस पर भी रोक लगाएगी ?

 

त्रावणकोर देवासम बोर्ड की तरफ से यह भी कहा गया कि 10 से 55 साल के बीच की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को उचित है. क्योंकि वहां कई ऐसे अनोखे रीति रिवाज और विधि विधान हैं जिसपर हिंदू ही नहीं गैर हिंदू भी आस्था रखते हैं.

इस मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने त्रावणकोर देवासम बोर्ड से कहा है कि बोर्ड साबित करे कि यह पाबंदी धार्मिक विश्वास का अभिन्न अंग है. कोर्ट ने पूछा है कि क्या सिर्फ रजस्वला अवस्था की वजह से महिलाएं मलिन हो जाती हैं? लिहाजा महिलाओं के मंदिर में दाखिले पर ही पाबंदी लगा देना उनके संवैधानिक अधिकारों और गरिमा के खिलाफ है.

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First published: 24 July 2018, 17:20 IST
 
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