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दो साल तक जेल में रहे सहारा सेबी से हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 June 2016, 22:48 IST
QUICK PILL
  • सेबी अगले महीने सहारा समूह की संपत्तियों को नीलाम करने जा रही है. सेबी ने सहारा के 16 और भूखंड को नीलामी के लिए जोड़ा है. इन संपत्तियों की आरक्षित कीमत 1,245 करोड़ रुपये है.
  • इन 16 भूखंड को नीलामी में जोड़े जाने के बाद कुल संपत्तियों की संख्या 42 हो गई और इनकी कुल कीमत करीब 4,345 करोड़ रुपये बनती है. आने वाले दिनों में सहारा समूह की इतनी ही संपत्तियों को नीलाम किए जाने की उम्मीद है.
  • अदालन ने सहारा के पैरोल को 11 जुलाई तक बढ़ाते हुए साफ कर दिया कि अगर उन्होंने सेबी के पास 200 करोड़ रुपये जमा नहीं कराए तो उन्हें फिर से जेल जाना पड़ेगा.

सेबी अगले महीने सहारा समूह की संपत्तियों को नीलाम करने जा रही है. सेबी ने सहारा के 16 और भूखंड को नीलामी के लिए जोड़ा है. इन संपत्तियों की आरक्षित कीमत 1,245 करोड़ रुपये है.

इन 16 भूखंड को नीलामी में जोड़े जाने के बाद कुल संपत्तियों की संख्या 42 हो गई और इनकी कुल कीमत करीब 4,345 करोड़ रुपये बनती है. आने वाले दिनों में सहारा समूह की इतनी ही संपत्तियों को नीलाम किए जाने की उम्मीद है.

पैरोल मिलने के कुछ हफ्तों पहले सुप्रीम कोर्ट में सुब्रत रॉय सहारा ने खराब सेहत का हवाला देते हुए रिहाई की गुहार लगाई थी. उन्होंने कहा था, 'तिहाड़ में मैं एक और गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा.' 

करीब दो सालों तक जेल में रहने के बाद अब सहारा प्रमुख फिर से तिहाड़ जाने के मूड में नहीं है. नहीं वह सुप्रीम कोर्ट से किसी तरह का टकराव लेने की हालत में है. 

सहारा फिलहाल 11 जुलाई तक पैरोल पर बाहर हैं. अप्रैल महीने में सुनवाई के दौरान जब सुब्रत रॉय के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के बेंच को सीलबंद लिफाफे में जब उनकी संपत्ति का ब्योरा सौंपा था तब बेंच ने आश्चर्य जताते हुए पूछा था, 'आखिर इतने धनी व्यक्ति ने अपनी संपत्ति का एक छोटा सा हिस्सा खर्च करने की बजाए दो साल जेल में रहना कैसे मंजूर कर लिया.' इसका जवाब सिर्फ सहारा के पास हो सकता है.

लेकिन अगर सहारा कोर्ट को दिए गए आश्वासन को पहले ही पूरा देते तो शायद उन्हें जेल में इतने लंबे समय तक नहीं रहना पड़ता. इस बात की भी संभावना थी कि अदालत उन्हें निवेशकों का पैसा लौटाने के मामले में रियायत भी दे देता.

सहारा फिलहाल पैरोल पर बाहर हैं और इस बीच बाजार नियामक संस्था ने उनकी संपत्ति को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सहारा समूह को निवेशकों का करीब 36,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.

सेबी ने कहा कि एसबीआई कैप्स 20 जुलाई को सहारा समूह की 8 संपत्तियों को नीलाम करेगी और जिनका बेस प्राइस 666 करोड़ रुपये रखा गया है. वहीं एचडीएफसी रियल्टी 18 जुलाई को अन्य आठ संपत्तियों की ई नीलामी करेेगी, जिनका रिजर्व प्राइस 579 करोड़ रुपये रखा गया है.

एसबीआई कैप्स पहले से ही 7 और 13 जुलाई को दो अलग-अलग नीलामी करेगी वहीं एचडीएफसी रियल्टी 4 और 15 जुलाई को सहारा के भूखंड की नीलामी करेगी. 

दोनों कंपनियां 13 संपत्तियों को नीलाम करेंगी और इसमें प्रत्येक संपत्ति की आरक्षित कीमत 3,100 करोड़ रुपये रखी गई है.

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेबी ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और एचडीएफसी रियल्टी को सहारा के 61 जमीन के टुकड़े की नीलामी के लिए अधिकृत किया है.

एचडीएफसी रियल्टी जहां 31 जमीन के टुकड़े की नीलामी करेगी. इसका रिजर्व प्राइस 2,400 करोड़ रुपये रखा गया है, वहीं  एसबीआई कैप्स को 30 जमीन के टुकड़े की नीलामी करने के लिए कहा गया है. इसकी बाजार कीमत करीब 4,100 करोड़ रुपये है.

सहारा की संपत्ति पूरे देश में फैली हुई है. अदालत ने साफ कर रखा है कि इन जमीनों को संबंधित इलाके के सर्किल रेट से 90 फीसदी से कम कीमत पर नहीं बेचा जा सकता. दो साल जेल में रहने के बाद सहारा समूह फिलहाल पैरोल पर बाहर है. 

टकराव के मूड में नहीं सहारा

12 मई को सहारा प्रमुख को एक और मौका दिए जाने की मांग को ठुकराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके पैरोल को 11 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया था. 

कोर्ट ने उन्हें यह समय इसलिए दिया ताकि वह सेबी के पास 200 करोड़ रुपये जमा करा सके. रॉय की मां की मृत्यु के बाद उन्हें और सहारा के दो अन्य निदेशकों को अदालत ने पैरोल दिया था, जिसकी आखिरी तारीख 4 जून को थी. 

अदालन ने सहारा के पैरोल को 11 जुलाई तक बढ़ाते हुए साफ कर दिया कि अगर उन्होंने सेबी के पास 200 करोड़ रुपये जमा नहीं कराए तो उन्हें फिर से जेल जाना पड़ेगा. 

रॉय और उनके सहयोगी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासनों को पूरा करने में विफल रहे और इसका खमियाजा सहारा को दो सालों तक जेल में रहकर उठाना पड़ा. अब सहारा सुप्रीम कोर्ट को दिए गए वादे को तोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते. 

वजह सुप्रीम कोर्ट की सख्ती है. 12 मई को कोर्ट ने कहा था, इस बार आप अपने वादे से नहीं मुकर सकते. इससे पहले आप किया गया वादा तोड़ चुके हैं. हम उम्मीद करते हैं कि इस बार आप फिर से जेल जाना नहीं चाहेंगेे. सुप्रीम कोर्ट में सहार के मामले की पैरवी  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं.

सहारा समूह को निवेशकों का करीब 36,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है

सिब्बल ने आश्वासन देते हुए कहा कि सहारा प्रमुख 11 जुलाई तक सेबी के पास 200 करोड़ रुपये जमा कराएंगे. इसके बाद अगर उनका पैरोल बढ़ाया जाता है तो बाकी 200-300 करोड़ रुपये की रकम का इंतजाम 4 अगस्त तक कर लिया जाएगा.

अदालत ने कहा कि राय 6 मई के आदेश के मुताबिक देश में कहीं भी जाने को आजाद हैं ताकि वह संपत्ति के संभावित खरीदारों से मुलाकात कर सके. हालांकि इस दौरान पुलिस उनके साथ होगी. कोर्ट ने कहा कि इस बीच सेबी नीलामी जारी रखेगी और सहारा को अपनी तरफ से संपत्तियों की बिक्री कर 5,000 करोड़ रुपये जुटाने होंगे ताकि वह बैंक गारंटी दे सके. रेगुलर जमानत के लिए उन्हें यह रकम बतौर बैंक गारंटी देनी होगी. 

First published: 16 June 2016, 22:48 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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