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खुद का प्लेन बनाकर थाॅमस ने भरी सपनों की उड़ान

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 October 2016, 19:26 IST

किसी भी सपने को पूरा करने के लिए के लिए मजबूत इरादों की जरूरत होती है, फिर आपके हालात चाहे जैसे हों. एेसी ही कहानी है साजी थॉमस की, जो बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन उन्होंने बचपन में ही खुद का प्लेन बनाकर उसमें उड़ने की जिद कर ली थी आैर इस सपने को साकार कर दिखाया. 

थाॅमस केरल के गांव के रहने वाले हैं, जब वो 15 साल के थे, तक एक छोटे से प्लेन को खेतों पर दवा छिड़कते देखा. तभी से वे प्लेन के दीवाने हो गए.  

कहां से शुरू हुर्इ कहानी 

एक बार वे छिड़काव करने वाले प्लेन के पायलट के पास गए. पायलट ने उन्हें अपना मुंबई का पता दे दिया. कुछ महीनों बाद थॉमस घर से भागकर मुंबई पहुंच गए जहां उन्होंने पायलट को खोज लिया. बच्चे की जिद देखकर पालयट भी हैरान था, उसने थॉमस को एयरोडायनेमिक्स का कुछ सामान और नौकरी दी. थॉमस ने प्लेन बनाने के लिए करीब 30 साल तक मेहनत की.  

प्लेन में लगाया बाइक का इंजन

अपने सपने को पूरा करने के लिए थॉमस ने एक छोटा का जमीन का टुकड़ा था, वो भी बेच दिया. थॉमस ने इस दौरान पहली बार एक प्लेन का ढांचा बनाया. दूसरी बार उन्होंने प्लेन में बाइक का इंजन लगाया. उनका यह एक्सपेरिमेंट कामयाब नहीं हो सका. इसके बाद इंजन खरीदने के लिए पैसे कम पड़ रहे थे तो एक इंजीनियरिंग कॉलेज को दूसरे एयरक्राफ्ट का मॉडल बेचकर पैसे जुटाए.  

इंडियन एयरफोर्स के फॉर्मर विंग कमांडर एसकेजे नायर ने सपनों को पूरा करने में मदद 

इस दौरान थॉमस कभी रबर फार्म में, तो कभी इलेक्ट्रिशियन और कभी फोटोग्राफर के तौर पर काम कर घर चलाते रहे. आखिरकार उन्होंने साजीएक्स एयर एस नाम का टू-सीटर प्लेन बना लिया. इस बीच तिरुअनंतपुरम में रहने वाले इंडियन एयरफोर्स के फॉर्मर विंग कमांडर एसकेजे नायर को थॉमस के बारे में पता चला. नायर ने उन्हें टेस्टिंग उड़ान के लिए सरकार से परमिशन दिला दी. अब थॉमस सिविल एविएशन मिनिस्ट्री एंड डायरेक्टोरेट से लाइसेंस चाहते हैं. 

First published: 22 October 2016, 19:26 IST
 
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