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सपा-भाजपा खुश होंगी, जब आजमगढ़, मुजफ्फरनगर बन जाएगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 May 2016, 17:03 IST

आजमगढ़ जिले के खुदादादपुर गांव में शनिवार की रात दो समुदायों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद हालात लगातार तनावग्रस्त बने हुए हैं. शनिवार की रात एक वर्ग के लोगों ने दलितों और यादवों के 10 घरों को आग लगाने के बाद लूटपाट की.

मौके पर पहुंचे सीओ सिटी, एसडीएम और सिपाहियों पर भी जमकर पथराव किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए. उपद्रवी निजामाबाद के थानाध्यक्ष का मोबाइल भी छीनकर ले गए.

खबरें आ रही हैं कि शनिवार की रात एक मस्जिद से आह्वान के बाद स्थानीय लोगों ने वहां मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर भीड़ के साथ हमला कर दिया था. इस हमले में उद्रवियों ने हथियारों का भी इस्तेममाल किया.

उपद्रवियों की एक गोली शहर के सर्किल अफसर केके सरोज को भी लगी. वे शहर के एक अस्पताल में भर्ती हैं

उपद्रवियों की एक गोली शहर के सर्किल अफसर केके सरोज को भी लगी. वे शहर के एक अस्पताल में भर्ती हैं. हालांकि प्रशासन ने इस खबर को दो दिनों तक दबाए रखा. इसके अलावा पथराव में निजामाबाद के एसडीएम अनिल सिंह, तहसीलदार रत्नेश सिंह समेत दो अन्य सिपाही भी घायल हो गए.

आगजनी की शिकार खुदादादपुर में रहने वाली कमली देवी कहती हैं, "हमारा सबकुछ लूट ले गए. अब वो लोग धमकी दे रहे हैं. कह रहे हैं कि इसे पाकिस्तान बना देंगे. घर छोड़कर भाग जाओ.”

देर रात भारी संख्या में फोर्स पहुंचने के बाद हालात पर काबू पाया जा सका. घटना के दूसरे दिन रविवार की सुबह खुदादादपुर गांव पहुंचे आईजी जोन वाराणसी, एसके भगत ने घटनास्थल का मुआयना किया. पीड़ितों से मिलकर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया.

हालांकि स्थिति काबू में होने का दावा अगले ही दिन बेमानी साबित हुआ. इस बार सरायमीर कस्बे के पास दोनों समुदाय के लोगों में मारपीट हुई. इस लड़ाई की अफवाह फैली तो फरिहांं में भी दोनो समुदाय आमने-सामने आ डटे. एक युवक को जमकर पीटा गया. पूरे जिले में दोनों समुदाय अलग-अलग जगहों पर गुरिल्ला युद्ध की तर्ज पर टकरा रहे हैं. लेकिन प्रशासन कोई निर्णायक कार्रवाई करने से बच रहा है.

यह सामान्य बात नहीं है


आजमगढ़ की वर्तमान स्थिति को कम करके नहीं आंका जा सकता. पिछले डेढ़ महीने में कैफी आजमी के इस शहर को सुलगाने की कोशिशें कई बार हो चुकी हैं. यह शहर सूबे में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का निर्वाचन क्षेत्र भी है.

इस बार यूपी बोर्ड में सबसे अधिक टॉपर्स बच्चे देने वाले आजमगढ़ में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच एक साफ लाइन खिंच गई है. मौजूदा विवाद के बीज होली के समय ही पड़ गए थे. होली के दिन फरीदाबाद गांव में रंग पोतने को लेकर दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए थे. तब भी जमकर हिंसा हुई थी.तब करीब तीन घंटे तक पथराव हुआ था, जिसमें पुलिस जीप सहित कई वाहनों को तोड़ दिया गया. 

कठघरे में पुलिस-प्रशासन


आरोप है कि पुलिस ने होली के समय निष्पक्ष कार्रवाई करने की बजाय राजनीतिक दबाव में एक पक्ष पर कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया. मुजफ्फरनगर की तर्ज पर ही प्रशासन और नेताओं का रवैया मामले को पूरी तरह से शांत करने की बजाय लटकाने पर ज्यादा रहा.

लिहाजा इस घटना के बाद लगातार अलग-अलग इलाकों में दोनों समुदाय आमने सामने आते रहे. होली वाली घटना के कुछ ही दिन बाद फूलपुर कस्बे की भोरमऊ राजभर बस्ती और कतरानूरपुर गांव के मुस्लिम आपस में भिड़ गए.

इस हमले में राजभर बस्ती का एक व्यक्ति को घायल हो गया, बाद में उसकी मौत हो गई. तब भी प्रशासन नहीं चेता. देखते ही देखते फिर दोनों समुदाय 22 अप्रैल को फिर टकरा गए.

मुबारकपुर कस्बे में अरबी भाषा में लिखे एक प्लेट में चाट बेचने को लेकर तनाव पैदा हो गया. प्लेट पर लिखी भाषा को धर्म ग्रंथ की आयत बताकर कुछ लोगों ने दंगा कर दिया. इसके बाद तीन मई को पवई के रज्जाकपुर और निजामाबाद के फरीदाबाद में दोनों समुदाय के लोग आपस में उलझ गए.

हालात काबू से बाहर 14 मई को हुए. इस बार खुदादादपुर में स्थितयां बेकाबू हुईं, जिसमें सर्किल ऑफिसर को गोली लगी और दलितों के दस घर फूंक दिए गए.

हमले में घायल भोला यादव ने बताया, "पांच-सात सौ की संख्या में लोगों ने बस्ती को घेर लिया, फिर पथराव व हवाई फायरिंग शुरू कर दी. जब हम भागने लगे तो हमारे ऊपर लक्ष्य कर फायरिंग होने लगी जिसमें गोली लग गई. पुलिस वहां मौजूद थी लेकिन उसने कुछ नहीं किया.”

चुनाव से पहले जरूरी ध्रुवीकरण !


वर्तमान में जो हालात बन रहे हैं, वह कुछ और इशारा कर रहे हैं. सूबा चुनाव के मुहाने पर है. यह सीट मुलायम सिंह का निर्वाचन क्षेत्र भी है. वीवीआईपी जिला होने के बावजूद चीजें इतने लंबे समय तक कैसे खिंचती रहीं. क्या यह जानबूझकर दी जा रही छूट है?

दबी जुबान में लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं. जाहिर है पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस तरह का कोई भी ध्रुवीकरण सपा और भाजपा को फायदा पहुंचाएगा. लंबे समय से सपा-भाजपा के बीच सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर अंदरूनी सहमति की बातें कही सुनी जाती रही हैं.

दंगे के बाद इलाके में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां भी इसी तरफ इशारा करती हैं.भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या ने जिले में छह सदस्यीय जांच दल भेजने की घोषणा की है.

इस बीच आजमगढ़ जिले की लालगंज लोकसभा सीट से भाजपा की सांसद नीलम सोनकर विवादग्रस्त गांव के दौरे पर जा रही थी जिन्हें प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक लिया है. अब खबर है कि पूर्वांचल के हिंदू हृदय सम्राट योगी आदित्यनाथ भी आजमगढ़ का दौरा करेंगे.

दूसरी तरफ सपा और मुलायम सिंह यादव हैं, जो लखनऊ में बैठकर फिलहाल समाजवादी कुनबे को सजाने-संवारने में व्यस्त हैं. बेनी बाबू को पार्टी में लाना ज्यादा जरूरी है, बनिस्बत अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने के. उन्हें पता है आजमगढ़ में जो हो रहा है, वह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए जरूरी है.

महीने भर में दर्जन भर सांप्रदायिक हिंसा की वारदातें हो जाएं, तो फिर समझने को कुछ बचता नहीं. इस बीच वह जिला प्रशासन जो पहले भी एकतरफा कार्रवाई के आरोप से घिरा था, अब भी एकतरफा कार्रवाई ही कर रहा है.

बस अब उसका निशाना दूसरा समुदाय हो गया है. दाउदपुर गांव के निवासी हाजी मिस्फीक कहते हैं, "पुलिस मनमानी कर रही है. यदि पुलिस गंभीर होती तो इस तरह की नौबत नहीं आती.

हमारा बेटा मुजम्मिल अपने दोस्त रईस के साथ दाउदपुर चक्की पर बैठा था. तभी वहां से एसपी और डीएम का काफिला गुजरा और दोनों को अपने साथ उठा ले गए, जबकि वे पूरी तरह निर्दोष हैं.”

First published: 16 May 2016, 17:03 IST
 
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