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सारदा और रोज वैली चिटफंड घोटालों में कैसे ठग लिए गए लोगों के करोड़ों, जानिए पूरी कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 February 2019, 16:06 IST

 

बंगाल को दो बड़े चिटफंड घोटालों ने दिलाकर रख दिया. इनमे से सारदा घोटाला एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी थी जिसने लाखों निवेशकों को चमकदार ब्रोशर के जरिये ज्यादा रिटर्न का वादा किया था. एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक शारदा ने लगभग अपने चिट फंड के माध्यम से 1200 करोड़ इकट्ठा किये लेकिन कुछ आंकड़ों में यह भी कहा गया है कि यह 4000 करोड़ रु तक हो सकता है. जबकि कंपनी अप्रैल 2013 में बंद हो गई थी.

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के चिट फंड समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन के साथ घनिष्ठ संबंध थे और इसी कथित निकटता ने निवेशकों और एजेंटों को बोर्ड पर लाने में मदद की. विपक्ष का आरोप है कि तृणमूल के राज्यसभा सांसद कुणाल घोष ने शारदा के मीडिया प्रभाग का नेतृत्व किया. एक अन्य तृणमूल सांसद, शताब्दी रॉय, सारदा की प्रचार सामग्री में हैं.

उन्होंने यह भी दावा है कि ममता बनर्जी ने दो सारदा कार्यालयों का उद्घाटन किया था. समूह ने अपनी वैधता को उजागर करने के लिए कई तरीके अपनाए. फुटबॉल क्लब में निवेश करने से लेकर दुर्गा पूजा के आयोजनों को प्रायोजित करने तक के कार्यक्रम चलाये. कंपनी ने अपनी स्वच्छ छवि बनाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आरोप है कि TMC के कई राजनीतिक नेताओं को सारदा समूह से वित्तीय सहायता मिली और राज्य के बाहर के राजनेताओं को भी इस घोटाले से लाभ हुआ.

 

शारदा पोंजी घोटाले में सबसे अधिक प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, झारखंड और त्रिपुरा थे. इस पर हंगामा मचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया. घोटाला सामने आने के तुरंत बाद कंपनी के प्रमुख सुदीप्त सेन लापता हो गए. इसके कुछ दिनों पहले उसके सारदा ग्रुप द्वारा जारी किए गए चेक बाउंस होने लगे थे. कई दिनों तक पीछा करने के बाद जम्मू और कश्मीर में उसे और उसके दाहिना हाथ माने जाने वाली महिला को गिरफ्तार कर लिया गया.

रोज वैली घोटाला

रोज वैली घोटाला शारदा घोटाले की तुलना में एक बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी था और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से जमाकर्ताओं से 15,000 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे. ईडी के अनुसार धन का एक हिस्सा नेताओं को रिश्वत देने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था ताकि घोटाला आसानी से चल सके. उच्च रिटर्न की उम्मीद के साथ लाखों लोगों ने अपनी जीवन बचत को इसमें निवेश के जरिये लगाया था. शारदा घोटाला सामने आने के ठीक बाद, बंगाल ने रोज वैली के अखबारों में प्रमुख विज्ञापनों को देखा. जिसमें अपने निवेशकों से सारदा समूह के चिट फंड के पतन के मद्देनजर नही घबराने की अपील की गई. सुदीप्ता सेन के स्वामित्व वाली सारदा की तरह रोज़ वैली में एक मीडिया प्रभाग था और चार टेलीविजन चैनल थे.

ईडी ने आरोप लगाया है कि इस फर्म ने विभिन्न राज्यों में भोले-भाले निवेशकों को आठ से 27 प्रतिशत के बीच निवेश पर रिटर्न का वादा किया था. कंपनी ने कथित रूप से जमीन जायदाद और संपत्ति और अचल संपत्ति क्षेत्र में की गई बुकिंग पर जमाकर्ताओं को रिटर्न देने का वादा किया था.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कंपनी को ईडी और सीबीआई द्वारा समूह के खिलाफ मामले दर्ज करने से पहले जांच की थी. ईडी ने 2014 में पीएमएलए के तहत फर्म के अध्यक्ष गौतम कुंडू और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. गौतम कुंडू को 2015 में कोलकाता में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया था. वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है. इस मामले में ED द्वारा कोलकाता और भुवनेश्वर की अदालतों में कई आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं. रोज वैली को धोखा देने के आरोप में पूर्वी भारत की सबसे बड़ी फिल्म निर्माण कंपनियों में से एक के प्रमुख श्रीकांत मोहता को जनवरी के अंत में कोलकाता में गिरफ्तार किया गया. एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि फिल्म निर्माता ने चिट-फंड कंपनी रोज वैली के प्रमुख गौतम कुंडू से 25 करोड़ लिए.

श्रीकांत मोहता को उस पैसे से रोज वैली समूह के लिए कई फिल्मों का निर्माण करना था. जब गौतम कुंडू ने उनसे अपने पैसे मांगे, तो श्रीकांत मोहता ने कथित तौर पर उन्हें चेतावनी दी और कई शक्तिशाली नामों का जिक्र किया. 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2014 में मामला सीबीआई को हस्तांतरित करने से पहले सारदा और रोज वैली पोंजी घोटाले से जुड़ी एक एसआईटी जांच का नेतृत्व किया था. अब जांच से जुड़े दस्तावेजों को लेकर वह सीबीआई गुस्से में है.

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First published: 4 February 2019, 16:06 IST
 
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