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व्यंग्य: दलितों, मुस्लिमों के बाद गोभक्तों के निशाने पर शेर!

रंजन क्रास्टा | Updated on: 30 July 2016, 8:08 IST

अगस्त 2015 में मीडिया में खबर आई कि केंद्र सरकार बाघ की जगह शेर को भारत का राष्ट्रीय पशु बनाने पर विचार कर रही है. वहीं पिछले हफ्ते गुजरात में कुछ गोभक्तों ने कुछ दलितों की गाय की हत्या के आरोप में निर्मम पिटाई कर की. हालांकि बाद में सीआईडी जांच से पता चला कि गाय की हत्या शायद किसी शेर ने की थी.

भले ही गाय की हत्या करने वाले दलित ना हो, फिर वो भारत का प्रतिनिधित्व तो नहीं ही कर सकता. और ये भी संभव है कि गाय की हत्या करने वाला शेर भी दलित हो. इसकी अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आरंभिक जांच में ऐसे कुछ सबूत मिले हैं जिनसे उसके दलित होने का शक होता है.

एक राज गुजरात, जहां मरी गाय की कीमत जिंदा आदमी से ज्यादा है

आरोपी शेर भी बीफ खाता है. वो समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ है. उसके सुरक्षा के लिए विशेष अभ्यारण्यों की जरूरत होती है. लेकिन आज हमें ये शेर दलित है या नहीं इसकी ज्यादा चिंता नहीं है. असल सवाल ये है कि इस देश के गोभक्त अब क्या करेंगे? शेरों पर भी हमला?

जान की कीमत

पिछले कुछ समय से गाय की रक्षा के नाम पर जिस तरह से हिंसा में बढ़ोतरी हुई है उससे एक चीज तो साफ है कि गाय की जान की इस देश में बहुत कीमत है. कई बार तो ऐसा भी लगता है कि यहां केवल गाय के जान की ही कीमत है.

एक मुसलमान की भीड़ ने केवल इसलिए हत्या कर दी कि उसपर बीफ खाने का शक था. दलितों को गाय की हत्या के संदेह में सरेआम पीटा जा रहा है. अभी पिछले ही हफ्ते दो मुस्लिम महिलाओं की गोभक्तों ने बीफ रखने के संदेह में पिटाई कर दी, बाद में पता चला कि महिलाओं के पास बीफ नहीं था.

वीडियो: गुजरात के सोमनाथ में गाय का चमड़ा उतारने वालों की सरेआम पिटाई

सच तो ये है कि लिंग, जाति और समुदाय सभी से ऊपर एक गाय के जान की कीमत है. गोभक्तों की मानें तो गाय के जान की कीमत भारतीय संविधान से भी अधिक है. 

अगर आप अब तक ये मान चुके हैं कि गाय दूसरों की जान और संविधान से ऊपर है इसलिए हमें शेरों पर होने वाले हमलों के लिए पहले से ही तैयार हो जाना चाहिए तो थोड़ा ठहर जाइए. दिक्कत की बात ये है कि इस देश में पहले से ही शेर विलुप्तप्राय जीवों में शामिल हैं. ऐसे में गोभक्तों को गाय के इस नए दुश्मन के सफाए में ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी.

गोभक्त बनाम शेर

कई भक्तों का ये भी दावा है कि वो गाय के लिए जान ले ही नहीं, दे भी सकते हैं. ऐसे में सभी गोभक्तों को गऊ माता के प्रति अपना प्रेम दिखाने के लिए शेर के साथ एक पिंजड़े में बंद करके सीधा मुकाबला करा देना चाहिए.

हो सकता है कि आपको ये अजीब लगे लेकिन इससे दोहरा फायदा होगा. इससे गोभक्तों की भक्ति तो साबित होगी ही शायद शेर को भी गाय से ज्याद गोभक्त स्वादिष्ट लगने लगें और वो गायों पर हमला बंद करने दें. 

इससे एक और फायदा हो सकता है. अगर एक-एक सारे गोभक्त शेरों के शिकार हो गए तो भारत से 'मूर्खता' के गुणसूत्र पूरी तरह खत्म हो जाएंगे. इस तरह हर कोई लाभ में रहेगा.

गोभक्तों का भरोसा

गोभक्त बनाम शेर के मुकाबले में एक दिक्कत भी है. भारतीय गोभक्त ईमादारी से मुकाबला करने के लिए नहीं जाने जाते. हो सकता है कि वो शेर से अकेले मुकाबला करने से मना कर दें. हो सकता है कि पचास गोभक्त मिलकर किसी अकेले शेर पर हमला कर दें. 

या कौन जाने गोभक्त शेर से मुकाबले के लिए सलमान ख़ान को तैयार कर लें. वन्यजीवों या समस्त जीवों से जुड़ा सलमान का रिकॉर्ड अक्सर ही मीडिया की सुर्खियों में रहता है. सलमान के संग एक फायदा ये भी है कि वो भी गाय और गोभक्तों की तरह कानून के फंदे में कभी नहीं फंसते. अदालतों से क्लीन चिट मिलने के मामले में उनके रिकॉर्ड केंद्र में बैठे कई दूसरे गुजरातियों की तरह ही ठोस है.

बरवक्त यहां 'गाय' कानून तोड़ने का सुरक्षित तरीका

अब अगर आप ये सोच रहे हैं कि गाय के दुश्मन शेर से छुटकारा पाने के कई तरीके आपको मिल चुके हैं तो मैं आपको आगाह कर दूं कि हम हर मामले की तरह इस मामले में भारत सरकार पर पूरा भरोसा नहीं कर सकते.

कौन जाने सरकार अपनी आदत से मजबूर होकर इस दुविधा में पड़ जाए कि शेर कोई महिला, दलित या मुसलमान तो है नहीं कि उसे पिटने-मरने दिया जाए, गोभक्तों से मुकाबले के चक्कर में शेर ही न खत्म हो जाएं! और इस दुविधा में सरकार ये फैसला ही न कर पाए कि देश के लिए शेर जरूरी हैं या गाय.

First published: 30 July 2016, 8:08 IST
 
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