Home » इंडिया » SBI-Big Bazaar deal: How Ramdev & Chandrababu Naidu's family stand to gain
 

एसबीआई-बिग बाज़ार डीलः मुनाफ़े के लिए बेक़रार रामदेव और चन्द्रबाबू नायडू का परिवार

आदित्य मेनन | Updated on: 10 February 2017, 1:41 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • बिग बाज़ार ने स्टेट बैंक आफ इंडिय़ा के साथ एक डील की है. इसके तहत बिग बाज़ार के आउटलेट में लगी पीओएस मशीन से 2000 तक की नगदी मिल जाएगी.
  • इस डील के बाद फ्यूचर ग्रुप के चेयरमैन किशोर बियानी ने कहा है कि हम नोटबंदी की वजह से जनता को होने वाली परेशानियों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
  • मगर इस डील में अब भाजपा और गठबंधन के सहयोगी दलों और बाबा रामदेन का कनेक्शन सामने आ रहा है. 

फ्यूचर ग्रुप के मालिकाना हक वाले बिग बाज़ार ने मंगलवार को घोषणा की है कि ग्राहक किसी भी बिग बाज़ार आउटलेट में डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर 2,000 रुपए निकाल सकते हैं. यह सुविधा 24 नवम्बर से देश भर के 115 कस्बों और शहरों में बने उसके 258 बिग बाजार स्टोर्स पर उपलब्ध होगी. फ्यूचर ग्रुप के चेयरमैन किशोर बियानी ने कहा है कि हम नोटबंदी की वजह से जनता को होने वाली परेशानियों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.

बिग बाज़ार की यह डील स्टेट बैंक आफ इंडिय़ा के साथ हुई है. आउटलेट में लगी पीओएस मशीन से नगदी मिल जाएगी. देखा जाए तो निश्चित रूप से यह सरकार की हरी झंडी के बिना मुमकिन नहीं हुआ है. बड़े रिटेल समूहों को फायदा पहुंचे, इसके लिए मोदी सरकार धीरे-धीरे इस तरह की नीतियों को आगे करती जा रही है. इसमें ऑनलाइन सेल पर प्रतिबंध भी शामिल है. ऑनलाइन बिक्री से विक्रेता को नगदी मिल जाती है.

लेकिन बिग बाजार को एटीएम में बदलने से, स्टेट बैंक और सरकार बिग बाजार के ग्राहकों की संख्या बढ़ा रही है और ग्राहकों को बिग बाजार में जाने को प्रोत्साहित कर रही है. इससे साफ जाहिर है कि बिग बाजार की बिक्री में इजाफा होगा. इस कदम से बिग बाजार की ब्रांड वेल्यू कितनी बढ़ेगी, इसका तो अनुमान ही नहीं लगाया जा सकता है.

सवाल दर सवाल

1- पहला बड़ा सवाल है कि नगदी कहां से आ रही है? मान लीजिए, हर दिन औसतन 500 लोग बिग बाजार को एटीएम के रूप में इस्तेमाल करते हैं तो हर आउटलेट पर हर दिन कम से कम 10 लाख रुपए की जरूरत होगी. सभी 258 आउटलेट पर 25.80 करोड़ रुपए की एकसाथ जरूरत होगी.

2- क्या यह नगदी स्टेट बैंक के जमाधारकों की बचत की आ रही है? या क्या यह नगदी रिजर्व बैंक या सरकार मुहैया करा रही है?

3- सरकार और रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों के बैंकों और डाकघरों तक नगदी पहुंचे. स्टेट बैंक समेत अन्य बैंकों को भी दूर-दराज के इलाकों में स्थित अपनी शाखाओं में नगदी पहुंचाने में अच्छी-खासी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. क्या ऐसे समय धन को बिग बाजार जैसे निजी व्यापिरक संगठनों को बांटने के लिए दे दिया जाना चाहिए?

4- किस आधार पर सरकार या स्टेट बैंक ने बिग बाजार के साथ यह डील कर ली. और अपनी जिम्मेदारी को निजी रिटेल कम्पनी को सौंप दिया?

5- क्या बिग बाजार को इस तरह के कार्य करने के लिए बैंकिंग लाइसेंस की जरूरत है?

6- इस काम के लिए बिग बाजार को ही क्यों चुना गया, अन्य रिटेल कम्पनियों को क्यों नहीं?

खासकर, स्टेट बैंक को इस बारे में ढेर सारे जवाब देने हैं. स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुधंति भट्टाचार्य इसकी प्रबल पैरोकार हैं. वह कहती हैं कि लोगों को अगर नोट बदलने के लिए एक अन्य सुविधा और भी मिल जाए तो हर्ज क्या है.

यह आश्चर्यजनक है कि एक ऐसा बैंक जो खुद को 'बैंकर टू एवरी इंडियन' (हर भारतीय का बैंकर) कहता है, छोटी-मोटी राशि के लिए आम लोगों पर विश्वास नहीं करता है, पर उसकी चेयरपर्सन निजी रिटेलर को करोड़ों रुपए देने के लिए लालायित हैं. हालांकि, इसका जवाब फ्यूचर ग्रुप के राजनीतिक निहितार्थों में छिपा हुआ है.

चंद्रबाबू नाय़डू परिवार की लगातार नजर

नोटबंदी की घोषणा से एक दिन पहले 7 नवंबर को फ्यूचर ग्रुप ने कहा था कि उसने हैदराबाद की हेरिटेज फूड्स लि. से रिटेल और अन्य सम्बंधित व्यवसाय के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए हैं. घोषणा की गई थी कि बदले में हेरिटेज फूड्स को नए जारी किए जाने वाले शेयरों के जरिए फ्यूचर रिटेल में 3.65 फीसदी की हिस्सेदारी मिल जाएगी. फ्यूचर रिटेल ने हेरिटेज फूड्स के ग्रॉसरी रिटेल बिजनेस को खरीदने पर सहमित दी हुई है. फ्यूचर रिटेल ने कहा है कि वह हेरिटेड फूड्स को 1.78 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर देगा.

हेरिटेज फूड्स के प्रमोटर्स आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के परिजन हैं. कहना नहीं होगा कि चंद्रबाबू नायडू का भाजपा के साथ गठबंधन है.

चन्द्रबाबू नायडू के परिवार की अब फ्यूचर रिटेल में हिस्सेदारी है. बिग बाजार की मालिक कम्पनी फ्यूचर रिटेल है.

उनके बेटे नारा लोकेश, पत्नी नारा भुवनेश्वरी और लोकेश की पत्नी नन्दामूरी ब्रह्मणि डायरेक्टर्स के रूप में सूचीबद्ध हैं. लोकेश वर्तमान में बियानी के साथ थे जब हैदराबाद में इस डील को किया गया. अधिग्रहण की शर्तों के अनुरूप, नायडू के परिवार की अब फ्यूचर रिटेल में सीधी हिस्सेदारी होगी. 

हालांकि, इस सौदे का जो प्रभाव हुआ है, उसके तहत स्टेट बैंक द्वारा बिग बाजार के जरिए भाजपा के गठबंधन वाले सहयोगी के परिवार को धन से मदद करना महत्वपूर्ण है.

फ्यूचर ग्रुप की राजस्थान सरकार के साथ डील

मंगलवार के अपने बयान में किशोर बियानी ने यह भी कहा है कि ग्रुप इन उद्देश्यों की खातिर होने वाली बैठकों में सरकार के नए कदमों का समर्थन करता है. बियानी या फ्यूचर ग्रुप के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उसने भाजपा और भाजपा से जुड़े लोगों के साथ व्यापार किया है.

अगस्त 2015 में भी, फ्यूचर ग्रुप ने राजस्थान में अन्नपूर्णा भंडार योजना की लांचिंग के लिए राज्य की भाजपा सरकार के साथ एक समझौते पर दस्तख़त किए थे.

राशन की दुकानों अथवा जन वितरण प्रणाली वाले केन्द्रों पर, जहां पहले सब्सिडाइज्ड खाद्यान्न, चीनी और केरोसिन मिलता था, वहां अब फ्यूचर ग्रुप द्वारा प्रोसेस्ड खाद पदार्थ, घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले सामान और हाइजिन उत्पाद भी बिक्री के लिए आपूर्ति किए जाएंगे. इससे समूह को सरकारी ढांचे का उपयोग करते हुए पूरे राजस्थान के ग्रामीण और अर्धग्रामीण कस्बों में बड़ा बाजार मिला है.

इस सौदे से न केवल राज्य के चार करोड़ से ज्यादा जन वितरण प्रणाली से लाभ लेने वाले लाभार्थियों तक समूह की पहुंच हुई है बल्कि हर कोई इन दुकानों से सामान खरीद सकता है जो सामान वह खरीदना चाहता है.

बिग बाजार जैसे बड़े रिटेल चेन वाली कम्पनियों को स्थानीय किराना दुकानदारों से कड़ी चुनौती मिलती है. अन्नपूर्णा भंडार योजना जैसे प्रयोग इस प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का प्रयास ही है.

अब नोटबंदी के कारण पूरे देश के किराना व्यवसायी एक अलग तरह के संकट का सामना कर रहे हैं. रिटेल चेन्स अपना जाल फैला लेना चाहती हैं. उपभोक्ताओं पर विजय पाने या उनको अपने वश में कर लेने का क्या अनोखा तरीका निकाल लिया गया है, वह भी सेमी एटीएम के जरिए.

बाबा रामदेव का संबंध

जैसे ही कोई उपभोक्ता नगदी निकालने या कोई सामान लेने के लिए बिग बाजार के स्टोर में घुसेगा, उसे तुरन्त ही पतंजलि आयुर्वेद के उत्पादों की भी पूरी श्रृंखला दिख जाएगी. हम सभी जानते हैं कि पतंजलि बाबा रामदेव की कम्पनी है. बाबा रामदेव का भाजपा से जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है. वह भाजपा के कालेधन के मुद्दे पर हमेशा पार्टी के साथ रहे हैं. बाबा रामदेव यह भी दावा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी की नीति के पीछे उनका ही विचार था.

अक्टूबर 2015 में, पतंजलि ने फ्यूचर ग्रुप के साथ एक एक्सक्लूसिव साझेदारी की थी जिसके तहत उसके उत्पाद पूरे देश में बिग बाजार के आउटलेट्स पर उपलब्ध हो सकें. ग्रुप की फूड आधारित अन्य श्रृंखलाएं जैसे ईजीडे, केबी का आधार और नीलगिरी हैं.

पतंजलि के उत्पाद फ्यूचर रिटेल पर बिकने वाले तीसरा और सबसे तेज गति से बढ़ने वाले एफएमसीजी सेलर में से एक हैं

इस डील को आदर्शवादी सुर देते हुए रामदेव ने काफी गर्व से घोषणा की थी कि पतंजलि ने एक 'स्वदेशी' रिटेल श्रृंखला से साझेदारी कर ली है. यह साझेदारी जादुई छड़ी जैसा काम करेगी.

एक साल से कम ही समय में, पतंजलि उत्पाद भीमकाय हिन्दुस्तान लीवर और पी एंड जी को पीछे छोड़ते हुए फ्यूचर रिटेल पर बिकने वाले फास्ट मूविंग कंजूमर गुड्स (एफएमसीजी) में तीसरा सबसे ज्यादा बिक्री वाला ब्रांड बन गया.

बियानी कहते हैं कि पतंजलि उत्पादों की बिक्री हर माह 20 फीसदी की गति से बढ़ रही है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि फ्यूचर रिटेल श्री श्री रविशंकर और उनके आर्ट ऑफ लिविंग के उत्पादों को भी अपने आउटलेट्स पर बेचे जाने की प्रक्रिया में है. रामदेव की तरह से श्री श्री भी भाजपा के निकट समझे जाते हैं.

आदित्य बिरला ग्रुप के साथ साझेदारी

वर्ष 2012 में, आदित्य बिरला ग्रुप ने फ्यूचर ग्रुप के साथ एक समझौता किया था और फ्यूचर ग्रुप के मालिकाना हक वाली कम्पनी पैंटालून्स फैशन एंड रिटेल में 1,600 करोड़ रुपए लगाए थे. इससे आदित्य बिरला समूह को पैंटालून्स में बड़ी हिस्सेदारी मिली थी. अब इसका नाम आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल हो गया है.

संयोगवश, 2012 में ही जिस साल यह एग्रीमेन्ट हुआ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि आदित्य बिरला ग्रुप द्वारा नरेन्द्र मोदी को कथित रूप से रिश्वत दी गई. मोदी उस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

केजरीवाल के आरोपों की जांच किए जाने की जरूरत है. लेकिन यह स्पष्ट है कि फ्यूचर ग्रुप के भाजपा और उसके सहयोगियों जैसे नायडू परिवार और बाबा रामदेव के साथ व्यापारिक रिश्ते हैं और यह समूह इस रिश्ते का आनन्द उठा उठा रहा है.

First published: 24 November 2016, 8:25 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

पिछली कहानी
अगली कहानी